" गुरुग्राम की गलती अब रेवाड़ी में नहीं चलेगी" — राव इंद्रजीत का सीधा हमला रेवाड़ी के शपथ ग्रहण समारोह से केंद्रीय मंत्री एवं सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने गुरुग्राम डेवलपमेंट पॉलिसी को लेकर बड़ा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकारों की गलत नीतियों और भ्रष्ट कार्यप्रणाली ने गुरुग्राम को समस्याओं का शहर बना दिया। जहां 12 इंच की पाइपलाइन बिछनी चाहिए थी, वहां 9 इंच की पाइपलाइन डालकर जनता के साथ खिलवाड़ किया गया, जिसका नतीजा आज जलभराव और अव्यवस्थित विकास के रूप में सामने है। राव इंद्रजीत ने दो टूक कहा कि "रेवाड़ी में ऐसी लापरवाही और मनमानी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगी।" उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले पांच वर्षों में हर विकास कार्य पर उनकी सीधी नजर रहेगी और जनता के हितों के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर माफ नहीं किया जाएगा। सांसद ने नगर परिषद के जनप्रतिनिधियों को भी स्पष्ट संदेश दिया कि जनता ने उन्हें सेवा के लिए चुना है, सत्ता का आनंद लेने के लिए नहीं। विकास कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चा...
सवाल यह नहीं कि चेयरमैन कौन बना, सवाल यह है कि दक्षिणी हरियाणा से कोई क्यों नहीं बना....? या फिर दूसरा—क्या दक्षिणी हरियाणा की पैरवी उतनी मजबूत नहीं हो पाई जितनी होनी चाहिए थी...? क्या कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर होगी...? फिलहाल इतना तय है कि चेयरमैनों की सूची से ज्यादा चर्चा उस नाम की हो रही है जो सूची में नहीं था—दक्षिणी हरियाणा
चार को टिकट, चालीस को इंतज़ार? दक्षिणी हरियाणा में उठते सवाल और राव इंद्रजीत की परीक्षा राजनीति में जीत सिर्फ चुनाव जीतने का नाम नहीं होती, असली जीत तब होती है जब कार्यकर्ता खुद को सम्मानित और प्रतिनिधित्व महसूस करे। दक्षिणी हरियाणा की राजनीति में यदि किसी एक नेता का नाम सबसे प्रभावशाली चेहरों में लिया जाता है तो वह केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह हैं। वर्षों से उनकी राजनीतिक पकड़, संगठन पर प्रभाव और टिकट वितरण में उनकी भूमिका को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। माना जाता है कि जिस उम्मीदवार के सिर पर राव साहब का हाथ हो, उसकी टिकट की राह आसान हो जाती है और जीत की संभावना भी बढ़ जाती है। लेकिन निगमों और बोर्डों के चेयरमैनों की हालिया सूची ने दक्षिणी हरियाणा के राजनीतिक गलियारों में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल यह नहीं कि चेयरमैन कौन बना। सवाल यह है कि दक्षिणी हरियाणा से कोई क्यों नहीं बना? क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच चर्चा है कि विधानसभा चुनावों में कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दिन-रात मेहनत कर पार्टी को मजबूत किया। टिकटों के समय भी क्षेत्र की राजनीतिक ताकत दिखाई द...