कांग्रेस की राह नही इतनी आसान रेवाड़ी, रेवाड़ी नगर परिषद व धारूहेड़ा नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस पार्टी भले ही अपने सिमबल पर चुनाव लड रही हो लेकिन डगर बहुत कठीन है क्योंकि कांग्रेस की फूट ही कांग्रेस को ले बैठैगी। पिछले दिनों कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जब सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने रेवाड़ी आए थे तो पिता पुत्र पूर्व मंत्री व पूर्व विधायक और एक अन्य पूर्व मंत्री भी नहीं पहुंचे। इससे साफ हो गया था कि कांग्रेस में गुटबाजी कायम है। कांग्रेस वाले ही कांग्रेस को हरवा सकते है। वहीं भाजपा भी गुटबाजी में पिछे नहीं है। भाजपा में कुछ प्रोटोकॉल है उसके तहत यहां सबसे बडे नेता राव इंद्रजीत सिंह है। सबसे ज्यादा उन्हीं को महत्व दिया गया है। उनकी सहमति से ही कई नाम फाइनल हो चुके हैं।जिनकी कभी भी घोषणा हो सकती है।चैयरपसन में पीपल का नाम फाइनल बताया जा रहा है। तथा अनेक उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए गए हैं।अब देखना बाकी यह है कि किसका भाग्य साथ देता है। वैसे इस बार नगर परिषद चुनाव का वह उत्साह दिखाई नहीं दे रहा जो पहले होता था।
रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी, BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए, जहां राव का इशारा होता है, वहां समीकरण बदल जाते हैं
रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी! रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव को लेकर भाजपा इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि राव इंद्रजीत सिंह अगर नाराज़ हुए, तो पूरा खेल बिगड़ सकता है। दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव साहब अपनी रणनीति, संगठन क्षमता और पसंदीदा उम्मीदवार को जिताने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण मानेसर निगम चुनाव रहा, जहां भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन अपनी पसंद के प्रत्याशी सुंदरलाल को जीत नहीं दिला सकी। कारण साफ था—राव साहब ने अपनी समर्थक डॉ. इंद्रजीत यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया और जीत भी दिलवा दी। वहीं, पिछले रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भी राव साहब का दबदबा साफ नजर आया। उन्होंने अपनी समर्थक पूनम यादव को टिकट दिलवाकर मैदान में उतारा। संगठन के कुछ नेताओं ने अंदरखाने विरोध और बगावत की, लेकिन भीतरघात के बावजूद राव समर्थक पूनम यादव अध्यक्ष बनने में सफल रहीं। अब आगामी चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए। क्य...