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रेवाड़ी के योग कार्यक्रम में नहीं पहुंचे मुख्यातिथि राव इंद्रजीत:भाजपा कार्यकर्ता- पदाधिकारियों ने बनाई दूरी; लोगों ने बीच में ही छोड़ा कार्यक्रम,मुख्य अतिथि राव इंद्रजीत सिंह के नहीं पहुंचने के चलते पार्टी के दूसरे बड़े चेहरे भी कार्यक्रम में कहीं नजर नहीं आए, ऐसे में पार्टी के अहम कार्यक्रमों में से एक माने जा रहे योग दिवस को लेकर जिले में भाजपा कार्यकर्ताओं की गंभीरता को उजागर कर दिया

  रेवाड़ी के राव तुलाराम स्टेडियम में योग दिवस पर जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह के नहीं पहुंचने पर डीसी अभिषेक मीणा ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। जिला अध्यक्ष को छोड़ भाजपा के सीनियर पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी कार्यक्रम से नदारद नजर आए। मुख्यमंत्री का वर्चुअली संबोधन खत्म होने के बाद साधकों ने बीच में ही कार्यक्रम को छोड़कर निकलना शुरू कर दिया। जिलाध्यक्ष दिखीं एकमात्र बड़ा चेहरा योग दिवस पर आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष वंदना पोपली ही भाजपा के एकमात्र बड़े चेहरे के रूप में नजर आई। मुख्य अतिथि राव इंद्रजीत सिंह के नहीं पहुंचने के चलते पार्टी के दूसरे बड़े चेहरे भी कार्यक्रम में कहीं नजर नहीं आए। ऐसे में पार्टी के अहम कार्यक्रमों में से एक माने जा रहे योग दिवस को लेकर जिले में भाजपा कार्यकर्ताओं की गंभीरता को उजागर कर दिया। हालांकि समय के साथ इस बार योगा डे पर आयोजित होने वाली कार्यक्रम को लेकर गंभीरता भी कम देखने को मिली।
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रेवाड़ी में करंट से गाय की मौत के बाद बवाल:चेयरपर्सन के घर पहुंचे गौ रक्षा दल के सदस्य; बोले- धक्के मारकर बाहर निकाला

  रेवाड़ी शहर में गोल चक्कर के पास बिजली के ट्रांसफॉर्मर से करंट लगने के कारण एक गाय की मौत हो गई। हादसे के बाद क्षेत्र में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और गौ रक्षा दल के सदस्यों ने नगर परिषद चेयरपर्सन विनीता पीपल के घर पहुंचकर हंगामा किया। गौ रक्षा दल के सदस्यों ने चेयरपर्सन पर धक्के देकर घर से बाहर निकलवाने का आरोप लगाया जानकारी के अनुसार, गोल चक्कर के पास लगे बिजली ट्रांसफॉर्मर के निकट एक गाय पहुंच गई। जैसे ही वह ट्रांसफॉर्मर के संपर्क में आई, उसे जोरदार करंट लगा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के कारण आसपास के क्षेत्र की बिजली आपूर्ति भी दो घंटे से अधिक समय तक बाधित रही। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए और बिजली निगम तथा नगर परिषद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे धक्के देकर घर से बाहर निकलवाने का आरोप गाय की मौत की सूचना मिलने के बाद गौ रक्षा दल के सदस्य नगर परिषद चेयरपर्सन विनीता पीपल के आवास पर पहुंच गए। वहां उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। गौ रक्षा दल के सदस्यों ने आरोप लगाया कि चेयरप...

रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है...? भरोसा किस पर किया जाए...? रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं 12 वाले सर्वेसर्वा बन गये, 19 लुप्त हो गये आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया

  रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है।* *जनता के बीच वे सब जवाब देह हैं।* *भरोसा किस पर किया जाए?*  *रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं सवाल यह है भी है कि  लोकतंत्र क्या केवल भाषणों में सुनने और कागजों में ही पढ़ने तक ही सीमित है? क्या उसका कोई व्यवहारिक पहलू नहीं है? आज भी आप के लिए यह थोड़े ठण्डे मन से सोचने की दरकार है। विकास की दलील भी बिल्कुल बेतुकी तार्किक है। कम बजट में भी आप ईमानदारी से, बिना किसी भ्रष्टाचार के, जनता की असली समस्याओं को केन्द्रित कर, जनता की कमेटियां बना कर, जनता की निगरानी में कराते तो हरियाणा की नगर पालिका के इतिहास में एक बड़ी लकीर खींच सकते थे। आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया। *पूरे रेवाड़ी शहर की सरकार, इसका बजट, विकास कार्यों के निर्णय लेने का अधिकार सब कुछ तो आपकी मुट्ठी में आ गया था। ना जाने क्यूं आपने अपनी मुट्ठी इतनी सहज ढंग से उन्हीं की झोली में खोल दी जिनके खिलाफ आप चुन कर आए थे।* नगर परिषद का चेयर...

सांसद राव इंद्रजीत ने गुरुग्राम डेवलपमेंट पॉलिसी को बताया फेल:बोले-12 इंच की जगह 9 इंच की पाइप लाइन बिछाई, रेवाड़ी में नहीं दोहराएंगे गलती

  " गुरुग्राम की गलती अब रेवाड़ी में नहीं चलेगी" — राव इंद्रजीत का सीधा हमला रेवाड़ी के शपथ ग्रहण समारोह से केंद्रीय मंत्री एवं सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने गुरुग्राम डेवलपमेंट पॉलिसी को लेकर बड़ा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकारों की गलत नीतियों और भ्रष्ट कार्यप्रणाली ने गुरुग्राम को समस्याओं का शहर बना दिया। जहां 12 इंच की पाइपलाइन बिछनी चाहिए थी, वहां 9 इंच की पाइपलाइन डालकर जनता के साथ खिलवाड़ किया गया, जिसका नतीजा आज जलभराव और अव्यवस्थित विकास के रूप में सामने है। राव इंद्रजीत ने दो टूक कहा कि "रेवाड़ी में ऐसी लापरवाही और मनमानी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगी।" उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले पांच वर्षों में हर विकास कार्य पर उनकी सीधी नजर रहेगी और जनता के हितों के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर माफ नहीं किया जाएगा। सांसद ने नगर परिषद के जनप्रतिनिधियों को भी स्पष्ट संदेश दिया कि जनता ने उन्हें सेवा के लिए चुना है, सत्ता का आनंद लेने के लिए नहीं। विकास कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चा...

सवाल यह नहीं कि चेयरमैन कौन बना, सवाल यह है कि दक्षिणी हरियाणा से कोई क्यों नहीं बना....? या फिर दूसरा—क्या दक्षिणी हरियाणा की पैरवी उतनी मजबूत नहीं हो पाई जितनी होनी चाहिए थी...? क्या कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर होगी...? फिलहाल इतना तय है कि चेयरमैनों की सूची से ज्यादा चर्चा उस नाम की हो रही है जो सूची में नहीं था—दक्षिणी हरियाणा

  चार को टिकट, चालीस को इंतज़ार? दक्षिणी हरियाणा में उठते सवाल और राव इंद्रजीत की परीक्षा राजनीति में जीत सिर्फ चुनाव जीतने का नाम नहीं होती, असली जीत तब होती है जब कार्यकर्ता खुद को सम्मानित और प्रतिनिधित्व महसूस करे। दक्षिणी हरियाणा की राजनीति में यदि किसी एक नेता का नाम सबसे प्रभावशाली चेहरों में लिया जाता है तो वह केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह हैं। वर्षों से उनकी राजनीतिक पकड़, संगठन पर प्रभाव और टिकट वितरण में उनकी भूमिका को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। माना जाता है कि जिस उम्मीदवार के सिर पर राव साहब का हाथ हो, उसकी टिकट की राह आसान हो जाती है और जीत की संभावना भी बढ़ जाती है। लेकिन निगमों और बोर्डों के चेयरमैनों की हालिया सूची ने दक्षिणी हरियाणा के राजनीतिक गलियारों में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल यह नहीं कि चेयरमैन कौन बना। सवाल यह है कि दक्षिणी हरियाणा से कोई क्यों नहीं बना? क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच चर्चा है कि विधानसभा चुनावों में कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दिन-रात मेहनत कर पार्टी को मजबूत किया। टिकटों के समय भी क्षेत्र की राजनीतिक ताकत दिखाई द...

हरियाणा-BJP अध्यक्ष की कुर्सी: 3 साल का कार्यकाल था, 2 साल ही रहे बड़ौली,इस कारण बड़ौली को हटाने का फैसला लिया...बड़ौली का विवादों से भरा रहा है कार्यकाल,खट्‌टर से दूरी, सीएम से नजदीकी

  हरियाणा में 43 साल बाद महिला को राज्य के संगठन की जिम्मेदारी दी गई है। सबसे खास बात यह है कि बड़ौली को 2024 के विधानसभा चुनाव से ऐन पहले ही प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। उनका कार्यकाल तीन साल का था, लेकिन उन्हें एक साल पहले ही चलता कर दिया गया। राजनीति के जानकारों का मानना है कि हरियाणा में भाजपा गैर जाट वोटरों के बाद महिला वोटरों को अपनी ओर झुकाव करना चाहती है। इसी तरह पंजाब में सिख वोटरों पर भाजपा की नजर है। पंजाब में पहली बार सिख चेहरे को प्रदेशाध्यक्ष की कमान सौपी गई है। हरियाणा में महिला वोटरों की अहम भूमिका 2024 के लोकसभा चुनावों के आंकड़ों के हिसाब से आंकलन करें तो हरियाणा में महिलाओं की भूमिका अहम रहने वाली है। पुरुषों के मुकाबले महिला वोटरों की संख्या लगभग आधी है। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के आधार पर हरियाणा में महिला वोटरों की संख्या 1,56,96,906 मतदाताओं में से 71,84,122 महिलाएं और 85,12,784 पुरुष हैं। गुरुग्राम लोकसभा सीट पर महिला वोटरों की संख्या 830678, सोनीपत लोकसभा क्षेत्र में 624192, कुरुक्षेत्र में 670866, अंबाला में 761111 और फरीदाबाद में 744722 महिला वोटर हैं। इस ...

हरियाणा में किताब खरीद में गड़बड़ी, 8 पब्लिशर्स ब्लैकलिस्ट:CAG रिपोर्ट के बाद कार्रवाई, सरकारी कॉलेजों में नहीं खरीदी जा सकेंगी इनकी बुक्स

  पंचकूला 8 घंटे पहले हरियाणा उच्च शिक्षा निदेशालय। फाइल फोटो हरियाणा के सरकारी कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में किताबों की खरीद में हुई बड़ी गड़बड़ी पर सरकार ने कड़ा एक्शन लिया है। उच्चतर शिक्षा विभाग (DGHE) के महानिदेशक एस. नारायणन (IFS) ने आदेश जारी कर देश के 8 बड़े बुक पब्लिशर्स को तुरंत प्रभाव से ब्लैकलिस्ट कर दिया है। अब सूबे का कोई भी सरकारी कॉलेज इन पब्लिशर्स से किसी भी तरह की किताब नहीं खरीद सकेगा। दरअसल, प्रदेश के 149 सरकारी कॉलेजों की लाइब्रेरी के लिए की गई किताबों की खरीद में कैग (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट में करोड़ों रुपए के घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं का मामला निकला था। जांच में सामने आया कि विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर बिना कॉलेजों में किताबें पहुंचे ही पब्लिशर्स को एडवांस में करोड़ों का भुगतान कर दिया था। कई कॉलेजों में किताबें आज तक पहुंची ही नहीं। इस पूरी खरीद प्रक्रिया में पब्लिशर्स और अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई गई। ये रही ब्लैकलिस्ट के पीछे वजह प्राइस टैगिंग में हेरफेर: पब्लिशर्स ने किताबों की मूल कीमत (Original Price) से कई गुना ...

Vyas Media Network

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