रेवाड़ी में सियासी ‘खेला’: नरबीर सिंह ने मारी बाजी, इंद्रजीत सिंह बैकफुट पर! 🔴 मुख्यमंत्री के ऐलान के बाद बदला पूरा समीकरण, 320 दिन का संघर्ष खत्म रेवाड़ी की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी मोड़ देखने को मिला है। मुख्यमंत्री नायब सैनी के दौरे के दौरान रामगढ़-भगवानपुर के लिए 8 एकड़ जमीन पर आयुर्वेदिक कॉलेज, अस्पताल और खेल स्टेडियम की घोषणा ने पूरे इलाके का राजनीतिक माहौल बदल दिया। 🟡 घोषणा के साथ बदला माहौल जैसे ही मुख्यमंत्री ने बड़ी सौगात का ऐलान किया, राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई कि इस उपलब्धि का श्रेय किसे मिलेगा। इसी बीच उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह ने अपनी सक्रियता और मजबूत पकड़ के चलते बाजी मार ली। स्थानीय स्तर पर उनके समर्थकों ने इसे उनकी रणनीति और क्षेत्र में मजबूत नेटवर्क का परिणाम बताया। 🔥 इंद्रजीत सिंह क्यों दिखे बैकफुट पर? रेवाड़ी की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रखने वाले राव इंद्रजीत सिंह इस घटनाक्रम में अपेक्षाकृत शांत नजर आए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार मैदान में चाल नरबीर सिंह ने चली और फायदा भी वही ले गए। 🧠 सियासी संकेत क्या हैं? क्...
पूनम यादव ने पिछला नगर परिषद चुनाव भाजपा की टिकट पर लड़ा था और केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के आशीर्वाद से जीत हासिल की थी,❓ अब क्यों उठ रहे सवाल..? सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस 5 साल के कार्यकाल को लेकर भाजपा को जनता के बीच जाना चाहिए था, उसी चेयरपर्सन को अब पार्टी से निष्कासित करना क्या संकेत देता है..? क्या 5 साल का कार्यकाल सवालों के घेरे में..? अब नजर इस बात पर है कि पार्टी इस फैसले के बाद जनता के बीच क्या संदेश लेकर जाती है
🚨 रेवाड़ी की सियासत में भूचाल: पूर्व चेयरपर्सन पूनम यादव 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित रेवाड़ी की राजनीति में बड़ा उलटफेर सामने आया है। नगर परिषद की पूर्व चेयरपर्सन पूनम यादव को पार्टी ने 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है। इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। 🗳️ भाजपा टिकट पर जीती थीं चुनाव बता दें कि पूनम यादव ने पिछला नगर परिषद चुनाव भाजपा की टिकट पर लड़ा था और केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के आशीर्वाद से जीत हासिल की थी। उनका 5 साल का कार्यकाल भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक आधार माना जा रहा था। ❓ अब क्यों उठ रहे सवाल? सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस 5 साल के कार्यकाल को लेकर भाजपा को जनता के बीच जाना चाहिए था, उसी चेयरपर्सन को अब पार्टी से निष्कासित करना क्या संकेत देता है? क्या यह कदम अंदरूनी खींचतान का नतीजा है, या फिर बीते कार्यकाल को लेकर कोई बड़ी बात सामने आने वाली है? ⚠️ क्या 5 साल का कार्यकाल सवालों के घेरे में? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सब कुछ सही रहा होता, तो पार्टी अपने ही चेहरे को इस तरह बाहर का रास्ता नही...