Skip to main content

हरियाणा में चेयरमैन-वाइस चेयरमैन को अब ग्रुप-ए जैसी सुविधाएं:₹75 हजार सैलरी, गाड़ी और स्टाफ मिलेगा; सदस्यों के वेतन और भत्ते भी तय किए

 


हरियाणा सीएम नायब सैनी। - Dainik Bhaskar
हरियाणा सीएम नायब सैनी।

हरियाणा सरकार ने गैर-सरकारी चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और सदस्यों के लिए पहली बार एक जैसी सर्विस शर्तें तय कर दी हैं। अब अलग-अलग बोर्ड, निगम और समितियों में नियुक्त होने वाले पदाधिकारियों को मिलने वाली सुविधाओं और सैलरी को लेकर भ्रम खत्म होगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि कौन कितना वेतन, भत्ता और सुविधा पाएगा।


नई पॉलिसी के तहत चेयरमैन को हर महीने 75 हजार रुपए तक मानदेय, 50 हजार रुपए तक मकान किराया भत्ता, सरकारी गाड़ी-ड्राइवर और स्टाफ की सुविधा मिल सकेगी। वहीं वाइस चेयरमैन को 45 हजार रुपए तक मानदेय और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। नियमित जिम्मेदारी निभाने वाले सदस्यों को 30 हजार रुपए तक मानदेय मिलेगा।

सरकार ने टेलीफोन, मोबाइल, यात्रा भत्ता, मेडिकल सुविधा और स्टाफ कार तक के नियम भी तय कर दिए हैं। खास बात यह है कि अब इन पदों पर बैठे लोगों को ग्रुप-ए अधिकारियों जैसी कई सुविधाएं मिलेगी।


खास बात यह है कि अब इन पदों पर बैठे लोगों को ग्रुप-ए अधिकारियों जैसी कई सुविधाएं मिलेगी। सरकार के इस कदम से अलग-अलग बोर्ड, निगम और समितियों में नियुक्त होने वाले पदाधिकारियों को मिलने वाली सुविधाओं और सैलरी को लेकर भ्रम खत्म होगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि कौन कितना वेतन, भत्ता और सुविधा पाएगा।


अब तक फिक्स्ड या एक समान वेतन-भत्ते तय नहीं थे

नई पॉलिसी से पहले अलग-अलग बोर्डों और निगमों के गैर-सरकारी चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के लिए कोई फिक्स्ड या एक समान वेतन-भत्ते तय नहीं थे। इनकी नियुक्ति, वेतन और सुविधाएं संबंधित विभागों और समितियों के अपने नियमों के अनुसार अलग-अलग और असंगत थीं, जिसको सरकार ने अब एक समान कर दिया है।

3 सालों के नियमों को मिलाकर एक फ्रेमवर्क बना

मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से जारी निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 2017, 2019 और 2021 में जारी अलग-अलग नियमों को मिलाकर अब एक ही फ्रेमवर्क बनाया गया है, ताकि सभी विभागों में एक जैसी व्यवस्था लागू हो सके। सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि तय नियमों से अलग किसी विशेष छूट या अतिरिक्त सुविधा की मांग पर विचार नहीं होगा। यानी अब नियुक्तियों और सुविधाओं में मनमानी की गुंजाइश कम रहेगी।

Comments

Vyas Media Network

Vyas Media Network

Popular posts from this blog

रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है...? भरोसा किस पर किया जाए...? रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं 12 वाले सर्वेसर्वा बन गये, 19 लुप्त हो गये आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया

  रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है।* *जनता के बीच वे सब जवाब देह हैं।* *भरोसा किस पर किया जाए?*  *रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं सवाल यह है भी है कि  लोकतंत्र क्या केवल भाषणों में सुनने और कागजों में ही पढ़ने तक ही सीमित है? क्या उसका कोई व्यवहारिक पहलू नहीं है? आज भी आप के लिए यह थोड़े ठण्डे मन से सोचने की दरकार है। विकास की दलील भी बिल्कुल बेतुकी तार्किक है। कम बजट में भी आप ईमानदारी से, बिना किसी भ्रष्टाचार के, जनता की असली समस्याओं को केन्द्रित कर, जनता की कमेटियां बना कर, जनता की निगरानी में कराते तो हरियाणा की नगर पालिका के इतिहास में एक बड़ी लकीर खींच सकते थे। आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया। *पूरे रेवाड़ी शहर की सरकार, इसका बजट, विकास कार्यों के निर्णय लेने का अधिकार सब कुछ तो आपकी मुट्ठी में आ गया था। ना जाने क्यूं आपने अपनी मुट्ठी इतनी सहज ढंग से उन्हीं की झोली में खोल दी जिनके खिलाफ आप चुन कर आए थे।* नगर परिषद का चेयर...

रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी, BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए, जहां राव का इशारा होता है, वहां समीकरण बदल जाते हैं

    रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी! रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव को लेकर भाजपा इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि राव इंद्रजीत सिंह अगर नाराज़ हुए, तो पूरा खेल बिगड़ सकता है। दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव साहब अपनी रणनीति, संगठन क्षमता और पसंदीदा उम्मीदवार को जिताने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण मानेसर निगम चुनाव रहा, जहां भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन अपनी पसंद के प्रत्याशी सुंदरलाल को जीत नहीं दिला सकी। कारण साफ था—राव साहब ने अपनी समर्थक डॉ. इंद्रजीत यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया और जीत भी दिलवा दी। वहीं, पिछले रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भी राव साहब का दबदबा साफ नजर आया। उन्होंने अपनी समर्थक पूनम यादव को टिकट दिलवाकर मैदान में उतारा। संगठन के कुछ नेताओं ने अंदरखाने विरोध और बगावत की, लेकिन भीतरघात के बावजूद राव समर्थक पूनम यादव अध्यक्ष बनने में सफल रहीं। अब आगामी चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए। क्य...

नगर निकाय चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के फिर दबाव में आएगी भाजपा...?

      राव समर्थक या संगठन का होगा चेहरा   रेवाड़ी नगर परिषद चेयरपर्सन पद के चेहरे को लेकर भाजपा में लगातार मंथन का दौर जारी है। आम लोगों में चर्चा है कि क्या गत विधानसभा चुनाव की तरह नगर निकाय चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह  को तरजीह मिलेगी या फिर पार्टी संगठन अपनी चला पाएगा। टिकट लेने की लाइन में एक तरफ तो वह चेहरे है जो वर्षों से पार्टी में रहकर संगठन को मजबूत कर रहे हैं। वहीं दूसरी और केंद्रीय मंत्री राव इंदरजीत सिंह के खास समर्थक है जो राव के आशीर्वाद से टिकट प्राप्त करना चाहते हैं। । गत विधानसभा चुनाव की बात करें तो केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को पार्टी ने फ्री हैंड दिया था। जिस तरह से पार्टी ने उन पर विश्वास जताया था उसका परिणाम भी सामने आया था। दक्षिणी हरियाणा की 11 विधानसभा सीटों में से  10 विधानसभा सीट जीत कर भाजपा की झोली में डाली थी। भाजपा जानती है कि केंद्रीय मंत्री  राव इंदरजीत सिंह का इस क्षेत्र में काफी प्रभाव है। पार्टी राव की नाराजगी मोल लेकर  अपने दम पर चुनाव में चेहरा उतारने का दम नहीं दिखा पा रही। चर्चा यह...