रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है...? भरोसा किस पर किया जाए...? रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं 12 वाले सर्वेसर्वा बन गये, 19 लुप्त हो गये आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया
रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है।*
*जनता के बीच वे सब जवाब देह हैं।*
*भरोसा किस पर किया जाए?*
*रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं
सवाल यह है भी है कि लोकतंत्र क्या केवल भाषणों में सुनने और कागजों में ही पढ़ने तक ही सीमित है? क्या उसका कोई व्यवहारिक पहलू नहीं है? आज भी आप के लिए यह थोड़े ठण्डे मन से सोचने की दरकार है।
विकास की दलील भी बिल्कुल बेतुकी तार्किक है। कम बजट में भी आप ईमानदारी से, बिना किसी भ्रष्टाचार के, जनता की असली समस्याओं को केन्द्रित कर, जनता की कमेटियां बना कर, जनता की निगरानी में कराते तो हरियाणा की नगर पालिका के इतिहास में एक बड़ी लकीर खींच सकते थे।
आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया।
*पूरे रेवाड़ी शहर की सरकार, इसका बजट, विकास कार्यों के निर्णय लेने का अधिकार सब कुछ तो आपकी मुट्ठी में आ गया था। ना जाने क्यूं आपने अपनी मुट्ठी इतनी सहज ढंग से उन्हीं की झोली में खोल दी जिनके खिलाफ आप चुन कर आए थे।*
नगर परिषद का चेयरपर्सन पद भाजपा , 12 पार्षद भाजपा से, 19 निर्दलीय और 1 कांग्रेस से जीता।*
*12 वाले सर्वेसर्वा बन गये, 19 लुप्त हो गये और एक ....*
*लोकतंत्र के दो पहिए हैं - एक सता पक्ष और दूसरा विपक्ष।*
*सता पक्ष अगर अपनी शक्तियों का किसी भी तरह का दुरुपयोग करे तो विपक्ष की जिम्मेदारी उस पर अंकुश लगाने की होती है।*
*लोकतांत्रिक मान्यताओं का तो यह भी तकाजा होता है कि यदि कोई उम्मीदवार हार जाए तो वह भी अपने वार्ड के मतदाताओं के सुख-दुख का साथी बना रहे।*
पूरे रेवाड़ी शहर की सरकार, इसका बजट, विकास कार्यों के निर्णय लेने का अधिकार सब कुछ तो आपकी मुट्ठी में आ गया था। ना जाने क्यूं आपने अपनी मुट्ठी इतनी सहज ढंग से उन्हीं की झोली में खोल दी जिनके खिलाफ आप चुन कर आए थे।*

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