हरियाणा में किताब खरीद में गड़बड़ी, 8 पब्लिशर्स ब्लैकलिस्ट:CAG रिपोर्ट के बाद कार्रवाई, सरकारी कॉलेजों में नहीं खरीदी जा सकेंगी इनकी बुक्स
हरियाणा के सरकारी कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में किताबों की खरीद में हुई बड़ी गड़बड़ी पर सरकार ने कड़ा एक्शन लिया है। उच्चतर शिक्षा विभाग (DGHE) के महानिदेशक एस. नारायणन (IFS) ने आदेश जारी कर देश के 8 बड़े बुक पब्लिशर्स को तुरंत प्रभाव से ब्लैकलिस्ट कर दिया है। अब सूबे का कोई भी सरकारी कॉलेज इन पब्लिशर्स से किसी भी तरह की किताब नहीं खरीद सकेगा।
दरअसल, प्रदेश के 149 सरकारी कॉलेजों की लाइब्रेरी के लिए की गई किताबों की खरीद में कैग (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट में करोड़ों रुपए के घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं का मामला निकला था।
जांच में सामने आया कि विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर बिना कॉलेजों में किताबें पहुंचे ही पब्लिशर्स को एडवांस में करोड़ों का भुगतान कर दिया था। कई कॉलेजों में किताबें आज तक पहुंची ही नहीं। इस पूरी खरीद प्रक्रिया में पब्लिशर्स और अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई गई।
ये रही ब्लैकलिस्ट के पीछे वजह
- प्राइस टैगिंग में हेरफेर: पब्लिशर्स ने किताबों की मूल कीमत (Original Price) से कई गुना अधिक दाम वसूल किए।
- डिस्काउंट का नुकसान: बाजार में थोक खरीद पर मिलने वाले 30-35% डिस्काउंट की जगह सिर्फ 10% डिस्काउंट दिखाकर सरकार को चूना लगाया गया।
- कागजों में सप्लाई: कई कॉलेजों की लाइब्रेरी में भौतिक जांच (Physical Verification) के दौरान संबंधित पब्लिशर्स की किताबें गायब मिली।



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