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एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में रहा—अटेली की विधायक और हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव मंच पर क्यों नहीं थीं...? जब कोई नेता लगातार सक्रिय हो और अचानक किसी महत्वपूर्ण क्षेत्रीय कार्यक्रम के मंच पर दिखाई न दे, तो सवाल उठते हैं

 



आरती सिंह राव का मंच पर न दिखना बना चर्चा का विषय, सवाल यात्रा से ज्यादा कार्यक्रम की पटकथा पर

दक्षिणी हरियाणा की राजनीति में कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं, जिनमें जितना दिखाई देता है, उससे कहीं ज्यादा चर्चा उस बात की होती है जो दिखाई नहीं देती।

27 सितंबर को सेवा संकल्प यात्रा के हरियाणा प्रवेश के मौके पर नांगल चौधरी के गोदबलाहा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में स्वागत कार्यक्रम हुआ। यात्रा के स्वागत के लिए मंच सजा, नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही तथा स्थानीय स्तर पर विभिन्न मांगें भी मुख्यमंत्री के सामने रखी गईं। कार्यक्रम के बाद हालांकि पूरे महेंद्रगढ़ जिले में एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में रहा—अटेली की विधायक और हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव मंच पर क्यों नहीं थीं? 

कार्यक्रम बदला, सवाल भी बदल गए

दिलचस्प बात यह है कि कार्यक्रम का स्थान पहले अटेली प्रस्तावित बताया गया था, लेकिन बाद में इसे राजस्थान सीमा से सटे गोदबलाहा में कर दिया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार स्थान परिवर्तन मुख्यमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम और समय की कमी से जुड़ा था; स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने स्वयं कार्यक्रम स्थल में हुए बदलाव की जानकारी दी थी। 

यही वह बिंदु है जहां से राजनीतिक चर्चा शुरू होती है।

अटेली में कार्यक्रम प्रस्तावित था। स्थानीय स्तर पर तैयारियां भी शुरू हो चुकी थीं। फिर कार्यक्रम गोदबलाहा पहुंच गया। मुख्यमंत्री वहां पहुंचे और स्वागत कार्यक्रम हुआ।

लेकिन जिस क्षेत्र की विधायक स्वयं हरियाणा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री हैं, उनकी अनुपस्थिति स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बनना ही थी।

“आरती कोनी आई के?”—चौपाल का सवाल

कार्यक्रम के बाद आम लोगों के बीच सबसे ज्यादा सुनाई देने वाली बात यही रही—

“आरती कोनी आई के?”

इस सवाल का आधिकारिक जवाब अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।

यह कहना भी उचित नहीं होगा कि आरती सिंह राव कार्यक्रम स्थल परिवर्तन से नाराज थीं। ऐसी बात की कोई पुष्ट आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

लेकिन राजनीति में धारणा भी एक तथ्य बनकर चर्चा में आने लगती है।

और यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू है।

आरती की गैरमौजूदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण रही

आरती सिंह राव केवल अटेली की विधायक नहीं हैं। वह हरियाणा सरकार में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान तथा आयुष विभागों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। हाल में भी वह सरकारी कार्यक्रमों में सक्रिय दिखाई दी हैं—15 सितंबर को उन्होंने सेवा संकल्प अभियान को लेकर प्रेसवार्ता की और 17 सितंबर को माजरा स्थित एम्स में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। 

इसलिए गोदबलाहा जैसे कार्यक्रम में उनकी अनुपस्थिति को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ना स्वाभाविक था।

जब कोई नेता लगातार सक्रिय हो और अचानक किसी महत्वपूर्ण क्षेत्रीय कार्यक्रम के मंच पर दिखाई न दे, तो सवाल उठते हैं।

सवाल उठना और उसका कोई राजनीतिक कारण होना—ये दोनों अलग बातें हैं।

मंच पर मौजूदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण है क्षेत्र में भूमिका

आरती सिंह राव की राजनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि उनकी पहचान केवल अटेली विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में उनका विभाग पूरे प्रदेश से जुड़ा है और दक्षिणी हरियाणा में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर उनकी भूमिका पर स्वाभाविक रूप से नजर रहती है।

ऐसे में किसी एक कार्यक्रम में उनकी गैरमौजूदगी से उनकी राजनीतिक भूमिका का आकलन करना जल्दबाजी होगा।

लेकिन राजनीतिक संवाद के लिहाज से यह घटना जरूर महत्वपूर्ण है।

क्योंकि जनता अब केवल यह नहीं देखती कि कौन मंच पर बैठा है।

वह यह भी देखती है कि किसकी बात सुनी जा रही है, किसकी मांग पर फैसला हो रहा है और क्षेत्र के विकास की दिशा कौन तय कर रहा है।

कार्यक्रम नांगल चौधरी में था, चर्चा अटेली की क्यों हुई?

यही इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी राजनीतिक विडंबना है।

कार्यक्रम नांगल चौधरी के गोदबलाहा में हुआ।

मुख्यमंत्री पहुंचे।

स्थानीय नेताओं ने अपनी बातें रखीं।

मुख्यमंत्री ने कुछ घोषणाएं भी कीं—जिनमें बलाह कलां के जलघर को नहर की पाइपलाइन से जोड़ना, गोद में ई-लाइब्रेरी, बलाह खुर्द में राजस्थान सीमा तक रास्ता पक्का करना और व्यायामशाला जैसी घोषणाएं शामिल हैं। 

फिर भी कार्यक्रम के बाद सबसे ज्यादा चर्चा कार्यक्रम में मौजूद लोगों की नहीं, बल्कि अनुपस्थित आरती सिंह राव की रही।

यही बताता है कि अटेली की विधायक की क्षेत्रीय राजनीतिक उपस्थिति कितनी महत्वपूर्ण है।

अब गेंद किसके पाले में है?

अगर आरती सिंह राव की अनुपस्थिति केवल समय की कमी या किसी आवश्यक सरकारी दायित्व के कारण थी, तो मामला वहीं समाप्त हो जाना चाहिए।

अगर कोई अन्य प्रशासनिक या राजनीतिक कारण था, तो उसकी जानकारी संबंधित नेतृत्व ही दे सकता है।

इसलिए इस पूरे घटनाक्रम में अनुमान से ज्यादा जरूरी है स्पष्टता।

क्योंकि राजनीति में कभी-कभी एक छोटी-सी गैरमौजूदगी भी बड़ा सवाल बन जाती है।

और जब सवाल जनता की जुबान पर आ जाए तो उसका जवाब देना नेतृत्व की जिम्मेदारी बन जाता है।

दक्षिणी हरियाणा की राजनीति में संदेश साफ है

इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक कार्यक्रम में किसी नेता की अनुपस्थिति के रूप में देखना शायद अधूरा होगा।

यह घटना यह भी दिखाती है कि दक्षिणी हरियाणा में अब नेताओं की मौजूदगी, भूमिका और आपसी समन्वय को जनता बेहद बारीकी से देख रही है।

आरती सिंह राव के लिए भी यह एक ऐसा क्षण है जहां उनकी सबसे बड़ी ताकत यही हो सकती है कि वे अपनी राजनीतिक भूमिका को काम, संवाद और क्षेत्रीय मुद्दों के जरिए लगातार स्पष्ट रखती रहें।

क्योंकि अंततः राजनीति में मंच बदलते हैं, कार्यक्रम बदलते हैं, स्थान बदलते हैं—

लेकिन जनता के सवाल नहीं बदलते।

और इस बार गोदबलाहा के मंच से लौटते हुए महेंद्रगढ़ जिले की चौपालों में एक सवाल जरूर घूमता रहा—

“कार्यक्रम बदल गया, मंच बदल गया… लेकिन आरती सिंह राव क्यों नहीं दिखीं?”

इस सवाल का सबसे सटीक जवाब न अफवाह दे सकती है, न राजनीतिक अटकलें।

जवाब आरती सिंह राव स्वयं देंगी—और वही जवाब इस पूरी चर्चा की दिशा तय करेगा।

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