Skip to main content

REWARI BJP रेवाड़ी भाजपा में एक साल पुरानी खींचतान फिर उभरी:विधायक लक्ष्मण को नहीं मिला निमंत्रण;हलके में पत्थरों से विधायक गायब,4 धड़ों में बटी रेवाड़ी भाजपा

 


रेवाड़ी जिले के बावल में रैली से पहले पिछले साल 15 अगस्त को ऐसी ही पटकथा लिखी गई थी। राव तुलाराम स्टेडियम में 15 जून को रेवाड़ी विधानसभा की रैली हुई थी। जिसमें राव इंद्रजीत सिंह पहुंचे थे, परंतु उनके समर्थक पार्टी पदाधिकारियों और सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे समर्थक नजर नहीं आए थे। पार्टी ने तब इस पर संज्ञान नहीं लिया, परंतु विधायक को यह बात याद थी।


हालांकि आईटी सेल की ओर से डाले गए इस मैसेज को देखने के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष वंदना पोपली ने तुरंत संज्ञान लिया और प्रभारी व विधायक सहित अन्य लोगों के नाम आमंत्रण पत्र में जुड़वाए गए।







30 जून को बावल रैली में सांसद- विधायकों के साथ संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों ने दूरी बनाई तो सुर्खियां बन गई।


6 जुलाई को विधायक ने अपनी पिछले साल 15 जून की रैली के साथ बावल में सीएम के कार्यक्रम के बहिष्कार का न्यौता एक ही बार में डबल करके लौटा दिया। सोमवार को धारूहेड़ा पहुंचें राव इंद्रजीत सिंह ने जिस प्रकार से निमंत्रण नहीं मिलने की बात कहकर अपनी और बावल विधायक की अनुपस्थिति का जायज ठहराया।



विधायक ने कहा कि एक तो उन्हें संगठन और प्रशासन की तरफ से शपथ ग्रहण कार्यक्रम का विधिवत न्यौता नहीं मिला था

हलके में पत्थरों से विधायक गायब



रेवाड़ी विधानसभा के गांवों में एक जुलाई को जिला परिषद के कई विकास कार्यों का उद्घाटन एवं शिलान्यास हुआ। जिसके लिए तैयार किए गए शिलान्यास और उद्घाटन पत्थरों में स्थानीय सांसद और महेंद्रगढ़ की अटेली की विधायक आरती राव का नाम मोटे अक्षरों में अंकित दिखा। सरकारी ग्रांट से हुए कार्यों के पत्थरों से स्थानीय विधायक लक्ष्मण सिंह का नाम गायब दिखा।


गांव ततारपुर इस्तमुरार में लगे पत्थर पर राव इंद्रजीत सिंह और आरती राव के साथ जिला प्रमुख मनोज यादव, उपप्रमुख नीलम अनिल रायपुर, पार्षद सुनीता रणधीर सिंह, बीडीपीओ सुरजीत सिंह, ग्राम सचिव श्रीभगवान यादव और सरपंच सूबेदार रामचंद्र का नाम लिखा हुआ है, परंतु स्थानीय विधायक को जगह नहीं मिल पाई। जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवालों के घेरे में है।


4 धड़ों में बटी रेवाड़ी भाजपा


रेवाड़ी विशेषकर अहीरवाल में शुरू से ही रामपुरा और बूढ़पुर हाउस में राजनीतिक तनातनी बनी रही है। राव बीरेंद्र सिंह और राव मोहर सिंह के समय से चली आ रही राजनीतिक लड़ाई का नेतृत्व पिछले करीब 4 दशक से राव इंद्रजीत सिंह और राव नरबीर सिंह कर रहे हैं। 2014 से दोनों भाजपा में होते हुए भी मौका मिलने पर एक दूसरे के खिलाफ बोलने का कोई मौका नहीं चूकते।


2014 के बाद से धीरे-धीरे रामपुरा हाउस में पार्टी का पॉवर सेंटर शिफ्ट होने लगा। दो दिग्गजों की लड़ाई में अपनी अनदेखी से आहत संगठन से जुड़े पुराने कार्यकर्ता अपनी अनदेखी से आहत होकर घर बैठने लगे। जिससे पार्टी तीन धड़ों में बंट गई। धारूहेड़ा में शपथ ग्रहण के बाद विधायक की मंच से दूरी ने पार्टी में अब एक और नया मोर्चा खोल दिया।

Comments

Vyas Media Network

Vyas Media Network

Popular posts from this blog

रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है...? भरोसा किस पर किया जाए...? रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं 12 वाले सर्वेसर्वा बन गये, 19 लुप्त हो गये आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया

  रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है।* *जनता के बीच वे सब जवाब देह हैं।* *भरोसा किस पर किया जाए?*  *रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं सवाल यह है भी है कि  लोकतंत्र क्या केवल भाषणों में सुनने और कागजों में ही पढ़ने तक ही सीमित है? क्या उसका कोई व्यवहारिक पहलू नहीं है? आज भी आप के लिए यह थोड़े ठण्डे मन से सोचने की दरकार है। विकास की दलील भी बिल्कुल बेतुकी तार्किक है। कम बजट में भी आप ईमानदारी से, बिना किसी भ्रष्टाचार के, जनता की असली समस्याओं को केन्द्रित कर, जनता की कमेटियां बना कर, जनता की निगरानी में कराते तो हरियाणा की नगर पालिका के इतिहास में एक बड़ी लकीर खींच सकते थे। आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया। *पूरे रेवाड़ी शहर की सरकार, इसका बजट, विकास कार्यों के निर्णय लेने का अधिकार सब कुछ तो आपकी मुट्ठी में आ गया था। ना जाने क्यूं आपने अपनी मुट्ठी इतनी सहज ढंग से उन्हीं की झोली में खोल दी जिनके खिलाफ आप चुन कर आए थे।* नगर परिषद का चेयर...

रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी, BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए, जहां राव का इशारा होता है, वहां समीकरण बदल जाते हैं

    रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी! रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव को लेकर भाजपा इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि राव इंद्रजीत सिंह अगर नाराज़ हुए, तो पूरा खेल बिगड़ सकता है। दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव साहब अपनी रणनीति, संगठन क्षमता और पसंदीदा उम्मीदवार को जिताने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण मानेसर निगम चुनाव रहा, जहां भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन अपनी पसंद के प्रत्याशी सुंदरलाल को जीत नहीं दिला सकी। कारण साफ था—राव साहब ने अपनी समर्थक डॉ. इंद्रजीत यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया और जीत भी दिलवा दी। वहीं, पिछले रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भी राव साहब का दबदबा साफ नजर आया। उन्होंने अपनी समर्थक पूनम यादव को टिकट दिलवाकर मैदान में उतारा। संगठन के कुछ नेताओं ने अंदरखाने विरोध और बगावत की, लेकिन भीतरघात के बावजूद राव समर्थक पूनम यादव अध्यक्ष बनने में सफल रहीं। अब आगामी चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए। क्य...

नगर निकाय चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के फिर दबाव में आएगी भाजपा...?

      राव समर्थक या संगठन का होगा चेहरा   रेवाड़ी नगर परिषद चेयरपर्सन पद के चेहरे को लेकर भाजपा में लगातार मंथन का दौर जारी है। आम लोगों में चर्चा है कि क्या गत विधानसभा चुनाव की तरह नगर निकाय चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह  को तरजीह मिलेगी या फिर पार्टी संगठन अपनी चला पाएगा। टिकट लेने की लाइन में एक तरफ तो वह चेहरे है जो वर्षों से पार्टी में रहकर संगठन को मजबूत कर रहे हैं। वहीं दूसरी और केंद्रीय मंत्री राव इंदरजीत सिंह के खास समर्थक है जो राव के आशीर्वाद से टिकट प्राप्त करना चाहते हैं। । गत विधानसभा चुनाव की बात करें तो केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को पार्टी ने फ्री हैंड दिया था। जिस तरह से पार्टी ने उन पर विश्वास जताया था उसका परिणाम भी सामने आया था। दक्षिणी हरियाणा की 11 विधानसभा सीटों में से  10 विधानसभा सीट जीत कर भाजपा की झोली में डाली थी। भाजपा जानती है कि केंद्रीय मंत्री  राव इंदरजीत सिंह का इस क्षेत्र में काफी प्रभाव है। पार्टी राव की नाराजगी मोल लेकर  अपने दम पर चुनाव में चेहरा उतारने का दम नहीं दिखा पा रही। चर्चा यह...