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REWARI :चाचा से टूटा रिश्ता, हुड्डा से बढ़ी नज़दीकियां, सतीश यादव ने राव इंद्रजीत को दिया खुला राजनीतिक झटका,कभी ‘चाचा’ कहकर साथ घूमने वाले सतीश यादव अब कांग्रेस के मंच पर, निहारिका चौधरी को समर्थन देकर रेवाड़ी की राजनीति में मचा दी हलचल,रेवाड़ी की राजनीति में एक बार फिर पुराने रिश्तों की दरारें खुलकर सामने आ गई हैं,यह सिर्फ समर्थन नहीं… सीधा राजनीतिक संदेश है,सतीश यादव भले रेवाड़ी विधानसभा में खुद चुनावी समीकरण न बदलते हों, लेकिन उनकी मौजूदगी और संगठन क्षमता को हल्के में लेना बड़ी भूल होगी,सबसे बड़ा सवाल — निशाना कौन.....?

 


“चाचा से टूटा रिश्ता, हुड्डा से बढ़ी नज़दीकियां! सतीश यादव ने राव इंद्रजीत को दिया खुला राजनीतिक झटका”


कभी ‘चाचा’ कहकर साथ घूमने वाले सतीश यादव अब कांग्रेस के मंच पर, निहारिका चौधरी को समर्थन देकर रेवाड़ी की राजनीति में मचा दी हलचल

रेवाड़ी की राजनीति में एक बार फिर पुराने रिश्तों की दरारें खुलकर सामने आ गई हैं।

कभी राव इंद्रजीत सिंह के सबसे करीबी माने जाने वाले पूर्व जिला प्रमुख सतीश यादव ने अब खुलकर कांग्रेस का समर्थन कर दिया।

राजनीति में जिन रिश्तों को कभी “चाचा-भतीजा” की मिसाल माना जाता था, आज वही रिश्ते इतनी दूरियां तय कर चुके हैं कि दोनों दशकों से एक-दूसरे से नजरें तक नहीं मिला पा रहे।

रेवाड़ी में उस समय सियासी पारा अचानक चढ़ गया जब दीपेंद्र सिंह हुड्डा खुद सतीश यादव के प्रतिष्ठान पर पहुंचे और वहीं से ऐलान हुआ कि कांग्रेस प्रत्याशी निहारिका चौधरी को सतीश यादव का खुला समर्थन मिलेगा।

यह सिर्फ समर्थन नहीं… सीधा राजनीतिक संदेश है

सतीश यादव भले रेवाड़ी विधानसभा में खुद चुनावी समीकरण न बदलते हों, लेकिन उनकी मौजूदगी और संगठन क्षमता को हल्के में लेना बड़ी भूल होगी।

विधानसभा चुनावों में उनकी सक्रियता और जमीनी पकड़ हमेशा चर्चा में रही है।

पिछले निकाय चुनाव में उनकी धर्मपत्नी ने भाजपा प्रत्याशी को कड़ी टक्कर देकर यह साबित भी किया था कि सतीश यादव का अपना अलग जनाधार मौजूद है। मामूली अंतर से मिली हार आज भी रेवाड़ी की राजनीति में चर्चा का विषय है।

सबसे बड़ा सवाल — निशाना कौन?

सतीश यादव के इस कदम को सिर्फ कांग्रेस समर्थन के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे राव इंद्रजीत के खिलाफ खुली राजनीतिक बगावत माना जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सतीश यादव ने एक बार फिर यह संदेश देने की कोशिश की है कि —

“रेवाड़ी पर उम्मीदवार थोपने की राजनीति अब हर किसी को मंजूर नहीं।”

यानी लड़ाई सिर्फ भाजपा बनाम कांग्रेस की नहीं, बल्कि “स्थानीय बनाम थोपे गए नेतृत्व” की भी बनती जा रही है।

क्या निहारिका की नाव पार लगेगी?

यह तो आने वाला वक्त बताएगा कि सतीश यादव का समर्थन कांग्रेस प्रत्याशी निहारिका चौधरी को कितना फायदा पहुंचाता है, लेकिन इतना जरूर साफ हो गया है कि —

रेवाड़ी की राजनीति में

“सतीश और इंद्रजीत की राहें अब कभी एक नहीं हो सकतीं।”

और यही दूरी अब चुनावी मैदान में खुलकर दिखाई देने लगी है।


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