Skip to main content

हरियाणा की 3 सीटों पर कांग्रेस में बगावत:किरण चौधरी ने घोटाला तो बृजेंद्र ने टिकट कटाने के आरोप लगाए; दलाल ने समर्थक बुलाए

 


कांग्रेस के टिकट काटने पर पूर्व मंत्री बीरेंद्र सिंह, उनके बेटे बृजेंद्र सिंह, विधायक किरण चौधरी और पूर्व मंत्री करण दलाल इस तरह मायूस नजर आए। - Dainik Bhaskar
कांग्रेस के टिकट काटने पर पूर्व मंत्री बीरेंद्र सिंह, उनके बेटे बृजेंद्र सिंह, विधायक किरण चौधरी और पूर्व मंत्री करण दलाल इस तरह मायूस नजर आए।

हरियाणा में कांग्रेस के भीतर 3 सीटों पर अंदरूनी जंग शुरू हो गई है। टिकट कटने को लेकर नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। ये नेता भले ही बाहरी तौर पर कांग्रेस की मदद की बात कर रहे हों लेकिन उनके बयान सीधे तौर पर बगावत का इशारा कर रहे हैं।

यह सीटें भिवानी-महेंद्रगढ़, फरीदाबाद और हिसार है। भिवानी-महेंद्रगढ़ में किरण चौधरी, हिसार में बीरेंद्र सिंह और फरीदाबाद में पूर्व मंत्री करण दलाल टिकट बंटवारे से नाराज हैं। जिसके बाद इन तीनों सीटों पर कांग्रेस के लिए चुनौती बढ़ गई है।

टिकट कटने के बाद बागी तेवर दिखाते नेताओं ने क्या कहा....

किरण चौधरी बोलीं- किसका बेटा भगौड़ा, जितनी हमारी मदद की, उससे ज्यादा करेंगे
कांग्रेस ने भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से श्रुति चौधरी की टिकट काट दी। श्रुति भिवानी के तोशाम से विधायक किरण चौधरी की बेटी हैं। यह पूर्व सीएम बंसीलाल का परिवार है। टिकट कटने के बाद किरण चौधरी ने शक्ति प्रदर्शन किया। उन्होंने सीधे तौर पर तो विरोध नहीं किया लेकिन बिना नाम लिए कांग्रेस के उम्मीदवार बनाए राव दान सिंह को जमकर कोसा।

किरण चौधरी ने कहा- राव दान सिंह ने पिछले चुनावों में हमारी जितनी मदद की, उससे ज्यादा हम करेंगे। सियासी माहिर इसका अनुमान यह निकालते हैं कि राव दान सिंह पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्‌डा गुट के हैं। ऐसे में श्रुति के चुनाव में राव दान सिंह से ज्यादा मदद नहीं मिली। इसी वजह से किरण चौधरी इशारों में उन्हें अपना रुख बता रही हैं।

दूसरा बयान सीधे दान सिंह परिवार पर दिया। किरण चौधरी ने पूछा कि 'जो ईमानदार राजनीति का दावा करते हैं, वे इनडायरेक्ट रूप से लाखों-करोड़ों रुपए के घोटाले में लिप्त रहे हैं। आखिर कौन है वो भगोड़ा? उसके किससे संबंध हैं?'। सियासी माहिर किरण चौधरी के बिना नाम लिए दिए इस बयान को आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी घोटाले से जोड़ रहे हैं, जिसमें राव दान सिंह के बेटे अक्षत राव जांच के दायरे में आ चुके हैं। हालांकि, इस मामले में राव दान सिंह का कहना है कि अब केस निपट चुका है।

बीरेंद्र सिंह ने कहा- कांग्रेस के लिए वोट मांगूंगा, बृजेंद्र बोले- हरियाणा के नेताओं ने टिकट कटाई

भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल होने वाले सर छोटूराम के परिवार ने हिसार सीट पर दावा ठोका था। कांग्रेस ने वहां से उन्हें टिकट नहीं दी। उनकी जगह पूर्व मंत्री जयप्रकाश जेपी को उम्मीदवार बना दिया गया।

इसके बाद पूर्व मंत्री बीरेंद्र सिंह और उनके बेटे बृजेंद्र सिंह का दर्द सामने आया। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस कहे या कैंडिडेट मदद मांगे तो मैं प्रचार करूंगा लेकिन कांग्रेस के लिए वोट मांगूंगा।

बृजेंद्र सिंह ने कहा कि मुझे पूरी उम्मीद थी कि टिकट मिलेगी। मैं हिसार से सिटिंग MP था। किन्हीं कारणों से टिकट नहीं मिली। वह कारण दिल्ली के नहीं बल्कि प्रदेश की राजनीति की हैं। बृजेंद्र ने कहा कि हरियाणा की राजनीति में बहुत बड़ा बदलाव होने वाला है। समय के साथ सबको पता चल जाएगा।

दुनिया उतनी सीधी नहीं है, जितना मैं सोचता हूं। मैं पहले दुनिया को ब्लैक एंड व्हाइट समझता था।दुनिया ग्रे भी है, अब पता चला।

जींद में टिकट कटने के बारे में बताते बृजेंद्र सिंह। उनके साथ मायूस नजर आ रहे पिता बीरेंद्र सिंह और मां प्रेम लता।
जींद में टिकट कटने के बारे में बताते बृजेंद्र सिंह। उनके साथ मायूस नजर आ रहे पिता बीरेंद्र सिंह और मां प्रेम लता।

पूर्व CM भूपेंद्र हुड्‌डा के समधी ने राजनीति छोड़ने तक की धमकी दे डाली

हरियाणा के फरीदाबाद लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने पूर्व मंत्री महेंद्र प्रताप को टिकट दिया है। जिसके बाद टिकट मिलने की उम्मीद लगा लोकसभा क्षेत्र में मेहनत कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा के समधी करण सिंह दलाल नाराज हो गए।

अब करण सिंह दलाल ने सोमवार को बल्लभगढ़ के झाड़सैंतली गांव में पंचायत बुलाई है। यहां उनका बड़ा फैसला लेने की चर्चा है। दलाल ने यह भी कहा कि वे कांग्रेस में हैं और रहेंगे। यदि टिकट के लिए लोगों का दबाव पड़ा तो वे राजनीति करना छोड़ देंगे। उन्होंने कभी टिकट के लिए किसी राजनैतिक दल पर कोई दबाव नहीं बनाया। केवल उनकी छवि व राजनीतिक कद को देखकर पार्टियों ने उन्हें टिकट दिया।

Comments

Vyas Media Network

Vyas Media Network

Popular posts from this blog

रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है...? भरोसा किस पर किया जाए...? रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं 12 वाले सर्वेसर्वा बन गये, 19 लुप्त हो गये आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया

  रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है।* *जनता के बीच वे सब जवाब देह हैं।* *भरोसा किस पर किया जाए?*  *रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं सवाल यह है भी है कि  लोकतंत्र क्या केवल भाषणों में सुनने और कागजों में ही पढ़ने तक ही सीमित है? क्या उसका कोई व्यवहारिक पहलू नहीं है? आज भी आप के लिए यह थोड़े ठण्डे मन से सोचने की दरकार है। विकास की दलील भी बिल्कुल बेतुकी तार्किक है। कम बजट में भी आप ईमानदारी से, बिना किसी भ्रष्टाचार के, जनता की असली समस्याओं को केन्द्रित कर, जनता की कमेटियां बना कर, जनता की निगरानी में कराते तो हरियाणा की नगर पालिका के इतिहास में एक बड़ी लकीर खींच सकते थे। आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया। *पूरे रेवाड़ी शहर की सरकार, इसका बजट, विकास कार्यों के निर्णय लेने का अधिकार सब कुछ तो आपकी मुट्ठी में आ गया था। ना जाने क्यूं आपने अपनी मुट्ठी इतनी सहज ढंग से उन्हीं की झोली में खोल दी जिनके खिलाफ आप चुन कर आए थे।* नगर परिषद का चेयर...

रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी, BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए, जहां राव का इशारा होता है, वहां समीकरण बदल जाते हैं

    रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी! रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव को लेकर भाजपा इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि राव इंद्रजीत सिंह अगर नाराज़ हुए, तो पूरा खेल बिगड़ सकता है। दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव साहब अपनी रणनीति, संगठन क्षमता और पसंदीदा उम्मीदवार को जिताने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण मानेसर निगम चुनाव रहा, जहां भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन अपनी पसंद के प्रत्याशी सुंदरलाल को जीत नहीं दिला सकी। कारण साफ था—राव साहब ने अपनी समर्थक डॉ. इंद्रजीत यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया और जीत भी दिलवा दी। वहीं, पिछले रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भी राव साहब का दबदबा साफ नजर आया। उन्होंने अपनी समर्थक पूनम यादव को टिकट दिलवाकर मैदान में उतारा। संगठन के कुछ नेताओं ने अंदरखाने विरोध और बगावत की, लेकिन भीतरघात के बावजूद राव समर्थक पूनम यादव अध्यक्ष बनने में सफल रहीं। अब आगामी चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए। क्य...

नगर निकाय चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के फिर दबाव में आएगी भाजपा...?

      राव समर्थक या संगठन का होगा चेहरा   रेवाड़ी नगर परिषद चेयरपर्सन पद के चेहरे को लेकर भाजपा में लगातार मंथन का दौर जारी है। आम लोगों में चर्चा है कि क्या गत विधानसभा चुनाव की तरह नगर निकाय चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह  को तरजीह मिलेगी या फिर पार्टी संगठन अपनी चला पाएगा। टिकट लेने की लाइन में एक तरफ तो वह चेहरे है जो वर्षों से पार्टी में रहकर संगठन को मजबूत कर रहे हैं। वहीं दूसरी और केंद्रीय मंत्री राव इंदरजीत सिंह के खास समर्थक है जो राव के आशीर्वाद से टिकट प्राप्त करना चाहते हैं। । गत विधानसभा चुनाव की बात करें तो केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को पार्टी ने फ्री हैंड दिया था। जिस तरह से पार्टी ने उन पर विश्वास जताया था उसका परिणाम भी सामने आया था। दक्षिणी हरियाणा की 11 विधानसभा सीटों में से  10 विधानसभा सीट जीत कर भाजपा की झोली में डाली थी। भाजपा जानती है कि केंद्रीय मंत्री  राव इंदरजीत सिंह का इस क्षेत्र में काफी प्रभाव है। पार्टी राव की नाराजगी मोल लेकर  अपने दम पर चुनाव में चेहरा उतारने का दम नहीं दिखा पा रही। चर्चा यह...