Skip to main content

Haryana:CM आवास के बाहर धरने पर बैठा BJP नेता:मुख्यमंत्री के PA पर लगाए अपमान करने के आरोप



हरियाणा के करनाल में CWC के चेयरमैन एवं भाजपा कार्यकर्ता उमेश चानना CM आवास के बाहर मुंह पर काला कपड़ा बांधकर धरने पर बैठ गए। उमेश चानना ने मुख्यमंत्री के PA अभिमन्यु पर अपमान करने व कार्यकर्ताओं की इज्जत न करने का आरोप लगाया। CM आवास के अंदर पहले PA और CWC के चेयरमैन के बीच बहस हुई। PA के रवैये से गुस्साए चेयरमैन सीएम आवास के बाहर ही धरने पर बैठ गए।

उमेश चानना ने बताया कि कार्यकर्ताओं की इज्जत ही नहीं है। मैं आज CM आवास में किसी काम के लिए गया था, लेकिन मुख्यमंत्री का PA अभिमन्यु यह कहता है कि मैं आपको जानता ही नहीं हूं कि आप BJP के कार्यकर्ता हो या नहीं। अभिमन्यु यह भी आरोप लगा रहा है कि मेरी रिपोर्ट ठीक नहीं है, लेकिन मुझे पता तो चले कि मेरी कौन सी रिपोर्ट ठीक नहीं है।

गुस्साए चेयरमैन ने आरोप लगाया कि माल खाने को ये बैठे हैं और डंडे खाने के लिए हम जैसे लोगों को बैठाया हुआ है।

किसी महिला की ट्रांसफर मामले को लेकर पहुंचे थे चेयरमैन
उन्होंने CM मनोहर लाल से अनुरोध किया है कि उनके सीएम आवास में यह क्या हो रहा है, इसकी जांच करें। मैं तब तक बैठा रहूंगा, जब तक अभिमन्यु अंदर बैठा है। उमेश ने बताया कि वह किसी महिला के ट्रांसफर मामले को लेकर आए थे, उस महिला को तीन महीने का समय हो चुका है। वह अब तक धक्के खा रही है।

उन्होंने बताया कि पहले से ही बीजेपी कार्यकर्ता नाराज चल रहे हैं कि उनकी कोई सुनवाई नहीं होती, लेकिन आज सबकुछ सामने है।

धरने से उठने के लिए मनाते भाजपा नेता।
धरने से उठने के लिए मनाते भाजपा नेता।

कार्यकर्ताओं के हकों की लड़ रहे लड़ाई
उन्होंने कहा कि वे आज से पहले भी कार्यकर्ताओं के हकों की लड़ाई लड़ रहे थे और आज भी कार्यकर्ताओं के हकों की लड़ाई लड़ रहे हैं। जिस महिला को ट्रांसफर के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं, वह भाजपा की ही कार्यकर्ता है। इलेक्शन के दिनों में अभिमन्यु जैसे लोग वोट मांगने नहीं जाते, बल्कि कार्यकर्ता ही जाते हैं।

काफी देर तक बैठने के बाद PA अभिमन्यु और बीजेपी के नेता आवास से बाहर आए। जिसके बाद नाराज चेयरमैन को मनाकर धरने से उठाया।

धरने से उमेश चानना को उठाते मुख्यमंत्री के PA।
धरने से उमेश चानना को उठाते मुख्यमंत्री के PA।

बाद में PA ने मनाया
इस दौरान उमेश चानना करीब 1 घंटे तक सीएम आवास के बाहर काला कपड़ा बांधकर बैठे रहे। जब नेताओं ने उन्हें देखा तो मनाने का प्रयास किया। करीब 1 घंटे बाद CM के PA बाहर आए और उन्हें मनाकर अंदर अपने साथ लेकर गए।

Comments

Vyas Media Network

Vyas Media Network

Popular posts from this blog

पूर्व सीएम के PA ने रेवाड़ी CMO को बताया अनुभवहीन:CM सैनी से की शिकायत; बोले- स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल पर ध्यान नहीं दे रहीं

     सीएम नायब सैनी काे ज्ञापन सौंपते हुए पूर्व CM के पीएम अभिमन्यू यादव हरियाणा के रेवाड़ी का सरकारी अस्पताल सुर्खियों में आ गया है। पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के PA अभिमन्यु यादव ने स्वास्थ्य मंत्री पर आरोप लगाया कि वो गृह जिले की सुविधाओं का ध्यान नहीं कर रही है। जिसके चलते यहां व्यवस्था बदहाल हो गई है। रेवाड़ी अस्पताल को लेकर अभिमन्यु यादव ने सीएम नायब सैनी को शिकायती पत्र में कहा कि रेवाड़ी का CMO अनुभवहीन है। सीएमओ को पॉलीक्लिनिक चलाने का ही अनुभव है। अनुभवहीन सीएमओ के कारण यहां की व्यवस्था बिगड़ रही है। जिससे पूरे अस्पताल के प्रबंधन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। अभिमन्यु यादव के पत्र के अहम प्वाइंट 1. रेडियोलॉजिस्ट की कमी: रेवाड़ी अस्पताल में नियुक्त रेडियोलॉजिस्ट को प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया है। जिससे यहां कोई नियमित रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है। अल्ट्रासाउंड की तारीख 3 महीने बाद की दी जाती है। कभी-कभी केस की तारीख के कारण यह तारीख 3 महीने और आगे बढ़ जाती है। 2. त्वचा रोग विभाग पूर्णत निष्क्रिय: डर्मेटोलॉजी विभाग में कोई स्किन स्पेशलिस्ट नहीं कार्यरत है। जिससे मरीजों ...

रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है...? भरोसा किस पर किया जाए...? रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं 12 वाले सर्वेसर्वा बन गये, 19 लुप्त हो गये आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया

  रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है।* *जनता के बीच वे सब जवाब देह हैं।* *भरोसा किस पर किया जाए?*  *रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं सवाल यह है भी है कि  लोकतंत्र क्या केवल भाषणों में सुनने और कागजों में ही पढ़ने तक ही सीमित है? क्या उसका कोई व्यवहारिक पहलू नहीं है? आज भी आप के लिए यह थोड़े ठण्डे मन से सोचने की दरकार है। विकास की दलील भी बिल्कुल बेतुकी तार्किक है। कम बजट में भी आप ईमानदारी से, बिना किसी भ्रष्टाचार के, जनता की असली समस्याओं को केन्द्रित कर, जनता की कमेटियां बना कर, जनता की निगरानी में कराते तो हरियाणा की नगर पालिका के इतिहास में एक बड़ी लकीर खींच सकते थे। आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया। *पूरे रेवाड़ी शहर की सरकार, इसका बजट, विकास कार्यों के निर्णय लेने का अधिकार सब कुछ तो आपकी मुट्ठी में आ गया था। ना जाने क्यूं आपने अपनी मुट्ठी इतनी सहज ढंग से उन्हीं की झोली में खोल दी जिनके खिलाफ आप चुन कर आए थे।* नगर परिषद का चेयर...

रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी, BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए, जहां राव का इशारा होता है, वहां समीकरण बदल जाते हैं

    रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी! रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव को लेकर भाजपा इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि राव इंद्रजीत सिंह अगर नाराज़ हुए, तो पूरा खेल बिगड़ सकता है। दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव साहब अपनी रणनीति, संगठन क्षमता और पसंदीदा उम्मीदवार को जिताने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण मानेसर निगम चुनाव रहा, जहां भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन अपनी पसंद के प्रत्याशी सुंदरलाल को जीत नहीं दिला सकी। कारण साफ था—राव साहब ने अपनी समर्थक डॉ. इंद्रजीत यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया और जीत भी दिलवा दी। वहीं, पिछले रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भी राव साहब का दबदबा साफ नजर आया। उन्होंने अपनी समर्थक पूनम यादव को टिकट दिलवाकर मैदान में उतारा। संगठन के कुछ नेताओं ने अंदरखाने विरोध और बगावत की, लेकिन भीतरघात के बावजूद राव समर्थक पूनम यादव अध्यक्ष बनने में सफल रहीं। अब आगामी चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए। क्य...