Skip to main content

NEET 2022 : हरियाणा के इस शहर में 7 साल बाद ली जाएगी नीट परीक्षा, 2015 में यहां लीक हुआ पेपर, रद करना पड़ा था Exam

 


ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट की 3 मई 2015 को देशभर में परीक्षा आयोजित की गई थी। इसके लिए रोहतक में परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। लेकिन यहां पेपर लीक हो गया। जिसकी वजह परीक्षा रद कर दी गई। इसके बाद यहां परीक्षा केंद्र नहीं बनाए गए। इस कारण था पेपर लीक का आरोपित रोहतक से था, लेकिन अब 17 जुलाई 2022 को हो रही नीट परीक्षा ( neet Exam 2022 ) के लिए रोहतक में फिर से परीक्षा केंद्र बनाए जा सकते हैं। इसके लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इस समय परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यार्थी ऑनलाइन फार्म भर रहे हैं। परीक्षा केंद्र चयन के लिए अभ्यार्थियों को चार शहरों के विकल्प भरने हैं। उनमें इस बार रोहतक भी परीक्षा केंद्र की सूची में शामिल है। परीक्षा में शामिल होने के लिए पंजीकरण करने की अंतिम तारीख 6 मई है। बीती 7 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन हो रहा है। रोहतक में इस बार परीक्षा केंद्र बनेंगे या नहीं, यह निर्णय केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानि सीबीएसई द्वारा किया जाना है। लेकिन अभ्यार्थियों को परीक्षा केंद्र की सूची में रोहतक का नाम वर्ष 2015 के अब मिला है। रोहतक में परीक्षा केंद्र बनेंगे या नहीं। इसका निर्णय पुलिस प्रशासन से फीडबैक लेने के बाद ही केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा लिया जाएगा।


यह था मामला वर्ष 2015 में तीन मई को परीक्षा होने के बाद रोहतक पुलिस ने खुलासा किया कि यहां पेपर लीक हुआ है। पुलिस ने पेपर लीक करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया। इसमें दो डेंटल डाक्टर्स व एक एमबीबीएस छात्र भी शामिल था। गिरोह के सदस्यों ने आंतरिक वस्त्रों में चिप फिट कर पेपर के दौरान करने की योजना बनाई थी। इसके लिए कपड़ों में मोबाइल चिप लगाने की जगह भी बनाई गई। साथ ही माइक्रो ईयर फोन और डिजिटल घड़ी नकल के लिए इस्तेमाल की गई। पुलिस ने तब कहा था कि गिरोह ने प्रति परीक्षार्थी से 20 लाख रुपए लिए। गिरोह सदस्यों के मोबाइल से पुलिस ने पेपर की आंसर की बरामद की थी। इस की को व्हाट्सएप से परीक्षार्थियों के पास गया। पेपर लीक में शामिल लोगों ने मोबाइल से आंसर की इधर-उधर भेजी। इसके ठोस सबूत पुलिस को मिले।

रोहतक पुलिस ने किया था भंडाफोड़ पुलिस पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपी मदीना गांव के रूप सिंह दांगी को बनाया। उस समय पुलिस ने था कि गिरोह ने 30 अप्रैल 2021 को पानीपत में पेपर लीक करने का प्लॉन बनाया और इसको अंजाम तक पहुुंचा दिया। पेपर लीक होने के काफी समय तक रूप सिंह दांगी को जब पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई तो उस पर एक लाख रुपये का ईनाम घोषित किया गया। चूंकि रोहतक पुलिस ने मामले का भंडाफोड़ किया था। इसलिए पुलिस परीक्षा को रद करवाने के लिए सर्वाेच्च न्यायालय पहुंची। न्यायालय ने पुलिस की दलीलें सुनकर परीक्षा को केंसिल कर दिया। बताया जा रहा है कि इसके बाद पुलिस ने कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए देश के विभिन्न हिस्सों से परीक्षा लीक करवाने में शामिल कई लोगों को गिरफ्तार किया।



Comments

Vyas Media Network

Vyas Media Network

Popular posts from this blog

पूर्व सीएम के PA ने रेवाड़ी CMO को बताया अनुभवहीन:CM सैनी से की शिकायत; बोले- स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल पर ध्यान नहीं दे रहीं

     सीएम नायब सैनी काे ज्ञापन सौंपते हुए पूर्व CM के पीएम अभिमन्यू यादव हरियाणा के रेवाड़ी का सरकारी अस्पताल सुर्खियों में आ गया है। पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के PA अभिमन्यु यादव ने स्वास्थ्य मंत्री पर आरोप लगाया कि वो गृह जिले की सुविधाओं का ध्यान नहीं कर रही है। जिसके चलते यहां व्यवस्था बदहाल हो गई है। रेवाड़ी अस्पताल को लेकर अभिमन्यु यादव ने सीएम नायब सैनी को शिकायती पत्र में कहा कि रेवाड़ी का CMO अनुभवहीन है। सीएमओ को पॉलीक्लिनिक चलाने का ही अनुभव है। अनुभवहीन सीएमओ के कारण यहां की व्यवस्था बिगड़ रही है। जिससे पूरे अस्पताल के प्रबंधन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। अभिमन्यु यादव के पत्र के अहम प्वाइंट 1. रेडियोलॉजिस्ट की कमी: रेवाड़ी अस्पताल में नियुक्त रेडियोलॉजिस्ट को प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया है। जिससे यहां कोई नियमित रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है। अल्ट्रासाउंड की तारीख 3 महीने बाद की दी जाती है। कभी-कभी केस की तारीख के कारण यह तारीख 3 महीने और आगे बढ़ जाती है। 2. त्वचा रोग विभाग पूर्णत निष्क्रिय: डर्मेटोलॉजी विभाग में कोई स्किन स्पेशलिस्ट नहीं कार्यरत है। जिससे मरीजों ...

रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है...? भरोसा किस पर किया जाए...? रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं 12 वाले सर्वेसर्वा बन गये, 19 लुप्त हो गये आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया

  रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है।* *जनता के बीच वे सब जवाब देह हैं।* *भरोसा किस पर किया जाए?*  *रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं सवाल यह है भी है कि  लोकतंत्र क्या केवल भाषणों में सुनने और कागजों में ही पढ़ने तक ही सीमित है? क्या उसका कोई व्यवहारिक पहलू नहीं है? आज भी आप के लिए यह थोड़े ठण्डे मन से सोचने की दरकार है। विकास की दलील भी बिल्कुल बेतुकी तार्किक है। कम बजट में भी आप ईमानदारी से, बिना किसी भ्रष्टाचार के, जनता की असली समस्याओं को केन्द्रित कर, जनता की कमेटियां बना कर, जनता की निगरानी में कराते तो हरियाणा की नगर पालिका के इतिहास में एक बड़ी लकीर खींच सकते थे। आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया। *पूरे रेवाड़ी शहर की सरकार, इसका बजट, विकास कार्यों के निर्णय लेने का अधिकार सब कुछ तो आपकी मुट्ठी में आ गया था। ना जाने क्यूं आपने अपनी मुट्ठी इतनी सहज ढंग से उन्हीं की झोली में खोल दी जिनके खिलाफ आप चुन कर आए थे।* नगर परिषद का चेयर...

रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी, BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए, जहां राव का इशारा होता है, वहां समीकरण बदल जाते हैं

    रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी! रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव को लेकर भाजपा इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि राव इंद्रजीत सिंह अगर नाराज़ हुए, तो पूरा खेल बिगड़ सकता है। दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव साहब अपनी रणनीति, संगठन क्षमता और पसंदीदा उम्मीदवार को जिताने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण मानेसर निगम चुनाव रहा, जहां भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन अपनी पसंद के प्रत्याशी सुंदरलाल को जीत नहीं दिला सकी। कारण साफ था—राव साहब ने अपनी समर्थक डॉ. इंद्रजीत यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया और जीत भी दिलवा दी। वहीं, पिछले रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भी राव साहब का दबदबा साफ नजर आया। उन्होंने अपनी समर्थक पूनम यादव को टिकट दिलवाकर मैदान में उतारा। संगठन के कुछ नेताओं ने अंदरखाने विरोध और बगावत की, लेकिन भीतरघात के बावजूद राव समर्थक पूनम यादव अध्यक्ष बनने में सफल रहीं। अब आगामी चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए। क्य...