Skip to main content

देवबंद में अमित शाह को रोकना पड़ा अपना डोर टू डोर कैंपेन, सामने आई ये वजह

 


शनिवार को अमित शाह देवबंद में कैंपेनिंग कर रहे थे. लेकिन इस बीच अमित शाह को देखने वालों की भीड़ बहुत ज्यादा उमड़ गई, इस वजह से उन्हें अपना दौरा बीच में ही रोकना पड़ा.


नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियां जोरों पर हैं. ऐसे में शनिवार को अमित शाह देवबंद में कैंपेनिंग कर रहे थे. लेकिन इस बीच अमित शाह को देखने वालों की भीड़ बहुत ज्यादा उमड़ गई, इस वजह से उन्हें अपना दौरा बीच में ही रोकना पड़ा. उन्होंने अपना कार्यक्रम शुरू तो कर दिया था, लेकिन लोगों की भीड़ को देखते हुए और कोरोना गाइडलाइन्स का उल्लंघन होते देख उन्होंने अपने दौरे को बीच में ही रोकना का फैसला किया.

डोर टू डोर कैंपेन

बता दें इन दिनों गृह मंत्री अमित शाह डोर टू डोर कैंपेन कर रहे हैं. वे यूपी के कई जिलों में अब तक घूम चुके हैं और यहां भी उसी प्रकार का कैंपेन करने आए थे. चुनाव आयोग की तरफ से जारी गाइडलाइंस के मुताबिक नेता बड़ी जनसभा को संबोधित नहीं कर सकते इसलिए भाजपा के लोगों ने डोर टू डोर कैंपेन की शुरुआत की है. इसमें वे लोगों के घर- घर जाकर भाजपा को वोट डालने की अपील करते हैं.

मुजफ्फरनगर में भी किया दौरा

देवबंद से पहले गृहमंत्री अमित शाह ने यूपी के मुजफ्फरनगर में प्रभावी मतदाता संवाद कार्यक्रम को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि 2017 में यहां योगी आदित्यनाथ जी की सरकार बनने के बाद सारे गुंडे उत्तर प्रदेश की सीमा से बाहर चले गए है. उन्होंने कहा कि यही मुजफ्फरनगर है जिसने 2014, 2017 और 2019 में भाजपा की उत्तर प्रदेश में प्रचंड जीत की नींव डालने का काम किया है. यहीं से लहर उठती है जो काशी तक जाती है और हमारे विरोधियों का सूपड़ा साफ कर देती है.



Comments

Vyas Media Network

Vyas Media Network

Popular posts from this blog

पूर्व सीएम के PA ने रेवाड़ी CMO को बताया अनुभवहीन:CM सैनी से की शिकायत; बोले- स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल पर ध्यान नहीं दे रहीं

     सीएम नायब सैनी काे ज्ञापन सौंपते हुए पूर्व CM के पीएम अभिमन्यू यादव हरियाणा के रेवाड़ी का सरकारी अस्पताल सुर्खियों में आ गया है। पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के PA अभिमन्यु यादव ने स्वास्थ्य मंत्री पर आरोप लगाया कि वो गृह जिले की सुविधाओं का ध्यान नहीं कर रही है। जिसके चलते यहां व्यवस्था बदहाल हो गई है। रेवाड़ी अस्पताल को लेकर अभिमन्यु यादव ने सीएम नायब सैनी को शिकायती पत्र में कहा कि रेवाड़ी का CMO अनुभवहीन है। सीएमओ को पॉलीक्लिनिक चलाने का ही अनुभव है। अनुभवहीन सीएमओ के कारण यहां की व्यवस्था बिगड़ रही है। जिससे पूरे अस्पताल के प्रबंधन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। अभिमन्यु यादव के पत्र के अहम प्वाइंट 1. रेडियोलॉजिस्ट की कमी: रेवाड़ी अस्पताल में नियुक्त रेडियोलॉजिस्ट को प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया है। जिससे यहां कोई नियमित रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है। अल्ट्रासाउंड की तारीख 3 महीने बाद की दी जाती है। कभी-कभी केस की तारीख के कारण यह तारीख 3 महीने और आगे बढ़ जाती है। 2. त्वचा रोग विभाग पूर्णत निष्क्रिय: डर्मेटोलॉजी विभाग में कोई स्किन स्पेशलिस्ट नहीं कार्यरत है। जिससे मरीजों ...

रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी, BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए, जहां राव का इशारा होता है, वहां समीकरण बदल जाते हैं

    रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी! रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव को लेकर भाजपा इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि राव इंद्रजीत सिंह अगर नाराज़ हुए, तो पूरा खेल बिगड़ सकता है। दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव साहब अपनी रणनीति, संगठन क्षमता और पसंदीदा उम्मीदवार को जिताने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण मानेसर निगम चुनाव रहा, जहां भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन अपनी पसंद के प्रत्याशी सुंदरलाल को जीत नहीं दिला सकी। कारण साफ था—राव साहब ने अपनी समर्थक डॉ. इंद्रजीत यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया और जीत भी दिलवा दी। वहीं, पिछले रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भी राव साहब का दबदबा साफ नजर आया। उन्होंने अपनी समर्थक पूनम यादव को टिकट दिलवाकर मैदान में उतारा। संगठन के कुछ नेताओं ने अंदरखाने विरोध और बगावत की, लेकिन भीतरघात के बावजूद राव समर्थक पूनम यादव अध्यक्ष बनने में सफल रहीं। अब आगामी चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए। क्य...

नगर निकाय चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के फिर दबाव में आएगी भाजपा...?

      राव समर्थक या संगठन का होगा चेहरा   रेवाड़ी नगर परिषद चेयरपर्सन पद के चेहरे को लेकर भाजपा में लगातार मंथन का दौर जारी है। आम लोगों में चर्चा है कि क्या गत विधानसभा चुनाव की तरह नगर निकाय चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह  को तरजीह मिलेगी या फिर पार्टी संगठन अपनी चला पाएगा। टिकट लेने की लाइन में एक तरफ तो वह चेहरे है जो वर्षों से पार्टी में रहकर संगठन को मजबूत कर रहे हैं। वहीं दूसरी और केंद्रीय मंत्री राव इंदरजीत सिंह के खास समर्थक है जो राव के आशीर्वाद से टिकट प्राप्त करना चाहते हैं। । गत विधानसभा चुनाव की बात करें तो केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को पार्टी ने फ्री हैंड दिया था। जिस तरह से पार्टी ने उन पर विश्वास जताया था उसका परिणाम भी सामने आया था। दक्षिणी हरियाणा की 11 विधानसभा सीटों में से  10 विधानसभा सीट जीत कर भाजपा की झोली में डाली थी। भाजपा जानती है कि केंद्रीय मंत्री  राव इंदरजीत सिंह का इस क्षेत्र में काफी प्रभाव है। पार्टी राव की नाराजगी मोल लेकर  अपने दम पर चुनाव में चेहरा उतारने का दम नहीं दिखा पा रही। चर्चा यह...