Skip to main content

हरियाणा में निशाने पर भर्ती माफिया, एचसीएस अफसर नागर समेत चार आरोपितों से सवा चार करोड़ बरामद

 


चंडीगढ़। Haryana Recruitment Scam: हरियाणा में भर्ती माफिया निशाने पर है और सरकारी नियुक्तियों में गड़बड़ी करने वालों पर शिकंजा कसा जा रहा है। राज्‍य में डेंटल सर्जन भर्ती की लिखित परीक्षा के अभ्यर्थियों के अंकों में हेराफेरी करने के मामले में पकड़े गए निलंबित एचसीएस अधिकारी अनिल नागर समेत तीनों आरोपितों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इन सभी आरोपितों से पूछताछ के दौरान अलग-अलग स्थानों से चार करोड़ 22 लाख 97 हजार रुपये की राशि बरामद हुई है। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपितों ने पुलिस को जो जानकारी दी, उसके आधार पर अन्य सबूत जुटाने और दोषियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के लिए सरकार ने किसी तरह की रियायत न बरतने के आदेश अधिकारियों को दिए हैं।

पुलिस रिमांड के दौरान अनिल नागर सहित आरोपितों ने उगले कई सच

मुख्यमंत्री मनोहर लाल स्वयं इस पूरे मामले पर निगाह रखे हुए हैं तथा सीआइडी प्रमुख आलोक कुमार मित्तल व विजिलेंस प्रमुख शत्रुजीत कपूर से नियमित रूप से जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। विजिलेंस प्रमुख कपूर ने मुख्यमंत्री को भरोसे में लेने के बाद इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस दौरान विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए भाजपा सरकार और संगठन के पदाधिकारी पूरी तरह से सक्रिय हो गए हैं। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार अमित आर्य ने प्रदेश सरकार का पक्ष रखते हुए तमाम जानकारियां उपलब्ध कराई। साथ ही कहा है कि किसी भी आरोपित को बख्शा नहीं जाएगा और प्रदेश सरकार नौकरियों की शुचिता तथा पारदर्शिता के अपने दावे को बड़े विश्वास के साथ आगे बढ़ाकर अभ्यर्थियों का भरोसा बरकरार रखेगी।

सबूत जुटाने और दोषियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की प्रक्रिया में आगे बढ़ी पुलिस

हरियाणा लोकसेवा आयोग द्वारा डेंटल सर्जन की भर्ती के लिए 26 सितंबर को आयोजित लिखित परीक्षा में अंकों में हेराफेरी की शिकायत प्राप्त होने पर स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने 17 नवंबर को एक मामला दर्ज कर छापेमारी की थी। इसमें भिवानी निवासी नवीन कुमार को पंचकूला के सेक्टर-पांच में एक सार्वजनिक पार्किंग से 20 लाख रुपये नकद लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया था। नवीन की स्वीकारोक्ति और जांच के दौरान प्राप्त अन्य सबूतों के आधार पर विजिलेंस ब्यूरो ने झज्जर जिले के अश्विनी शर्मा को गिरफ्तार किया तथा उसके घर की तलाशी के दौरान एक करोड़ सात लाख 97 हजार रुपये की नकद राशि जब्त की।

विजिलेंस के डीजी शत्रुजीत कपूर के अनुसार पूछताछ करने पर आरोपित अश्विनी शर्मा ने स्वीकार किया कि उसके घर से बरामद पैसा हरियाणा लोक सेवा आयोग में उप सचिव के पद पर तैनात एचसीएस अधिकारी अनिल नागर को भुगतान किया जाना था।

इस तथ्य को सत्यापित करने के लिए अश्रिनी को हिरासत में रखते हुए अनिल नागर से संपर्क करने के लिए कहा गया। तब नागर ने अश्विनी को अपने कार्यालय में पैसे सौंपने के लिए बुलाया, जहां जांच दल ने अनिल नागर को अश्विनी शर्मा से एक करोड़ सात लाख 97 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। सीआइडी प्रमुख आलोक कुमार मित्तल के अनुसार वास्तव में यह राशि मूल रूप से जिला झज्जर के जमालपुर गांव में आरोपितच अश्विनी शर्मा के घर से बरामद की गई थी। अमित आर्य ने बताया कि इस मामले में वसूली के संबंध में कुछ राजनीतिक लोगों द्वारा उठाए जा रहे संदेह का कोई आधार नहीं है।

आगे से आगे जुड़ती चली गई कड़ियां

सीआइडी चीफ के अनुसार अपराधियों पर मुकदमा चलाने की दृष्टि से कानून के अनुसार निष्पक्ष तरीके से जांच आगे बढ़ रही है। आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद उन्हें कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया। अनिल नागर के खुलासे पर उसके एक सहयोगी सतीश गर्ग के आवास पर तलाशी ली गई और 66 लाख रुपये की नकद राशि बरामद की गई। साथ ही, उसके कहने पर अगले दिन एक करोड़ 44 लाख रुपये की बरामदगी की गई। सतीश ने नागर की ओर से रिश्वत के पैसे अपने पास रखे थे।

रजिस्टर्ड भूमि के कागज भी मिले नागर के घर से

अनिल नागर की घर की तलाशी के दौरान 12 लाख रुपये नकद, 50 लाख रुपये की एक पंजीकृत भूमि विलेख, लेपटाप और डिजिटल मीडिया उपकरण जब्त किए गए हैं। आरोपित नवीन पांच दिनों तक पुलिस हिरासत में रहा और आरोपित अश्विनी व अनिल नागर चार-चार दिन के पुलिस रिमांड पर रहे। कोर्ट ने तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। बाकी सबूत जुटाने और दोषियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के लिए मामले में आगे की जांच जारी है। सभी दोषियों को सजा दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।



Comments

Vyas Media Network

Vyas Media Network

Popular posts from this blog

रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है...? भरोसा किस पर किया जाए...? रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं 12 वाले सर्वेसर्वा बन गये, 19 लुप्त हो गये आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया

  रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है।* *जनता के बीच वे सब जवाब देह हैं।* *भरोसा किस पर किया जाए?*  *रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं सवाल यह है भी है कि  लोकतंत्र क्या केवल भाषणों में सुनने और कागजों में ही पढ़ने तक ही सीमित है? क्या उसका कोई व्यवहारिक पहलू नहीं है? आज भी आप के लिए यह थोड़े ठण्डे मन से सोचने की दरकार है। विकास की दलील भी बिल्कुल बेतुकी तार्किक है। कम बजट में भी आप ईमानदारी से, बिना किसी भ्रष्टाचार के, जनता की असली समस्याओं को केन्द्रित कर, जनता की कमेटियां बना कर, जनता की निगरानी में कराते तो हरियाणा की नगर पालिका के इतिहास में एक बड़ी लकीर खींच सकते थे। आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया। *पूरे रेवाड़ी शहर की सरकार, इसका बजट, विकास कार्यों के निर्णय लेने का अधिकार सब कुछ तो आपकी मुट्ठी में आ गया था। ना जाने क्यूं आपने अपनी मुट्ठी इतनी सहज ढंग से उन्हीं की झोली में खोल दी जिनके खिलाफ आप चुन कर आए थे।* नगर परिषद का चेयर...

रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी, BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए, जहां राव का इशारा होता है, वहां समीकरण बदल जाते हैं

    रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी! रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव को लेकर भाजपा इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि राव इंद्रजीत सिंह अगर नाराज़ हुए, तो पूरा खेल बिगड़ सकता है। दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव साहब अपनी रणनीति, संगठन क्षमता और पसंदीदा उम्मीदवार को जिताने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण मानेसर निगम चुनाव रहा, जहां भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन अपनी पसंद के प्रत्याशी सुंदरलाल को जीत नहीं दिला सकी। कारण साफ था—राव साहब ने अपनी समर्थक डॉ. इंद्रजीत यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया और जीत भी दिलवा दी। वहीं, पिछले रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भी राव साहब का दबदबा साफ नजर आया। उन्होंने अपनी समर्थक पूनम यादव को टिकट दिलवाकर मैदान में उतारा। संगठन के कुछ नेताओं ने अंदरखाने विरोध और बगावत की, लेकिन भीतरघात के बावजूद राव समर्थक पूनम यादव अध्यक्ष बनने में सफल रहीं। अब आगामी चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए। क्य...

नगर निकाय चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के फिर दबाव में आएगी भाजपा...?

      राव समर्थक या संगठन का होगा चेहरा   रेवाड़ी नगर परिषद चेयरपर्सन पद के चेहरे को लेकर भाजपा में लगातार मंथन का दौर जारी है। आम लोगों में चर्चा है कि क्या गत विधानसभा चुनाव की तरह नगर निकाय चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह  को तरजीह मिलेगी या फिर पार्टी संगठन अपनी चला पाएगा। टिकट लेने की लाइन में एक तरफ तो वह चेहरे है जो वर्षों से पार्टी में रहकर संगठन को मजबूत कर रहे हैं। वहीं दूसरी और केंद्रीय मंत्री राव इंदरजीत सिंह के खास समर्थक है जो राव के आशीर्वाद से टिकट प्राप्त करना चाहते हैं। । गत विधानसभा चुनाव की बात करें तो केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को पार्टी ने फ्री हैंड दिया था। जिस तरह से पार्टी ने उन पर विश्वास जताया था उसका परिणाम भी सामने आया था। दक्षिणी हरियाणा की 11 विधानसभा सीटों में से  10 विधानसभा सीट जीत कर भाजपा की झोली में डाली थी। भाजपा जानती है कि केंद्रीय मंत्री  राव इंदरजीत सिंह का इस क्षेत्र में काफी प्रभाव है। पार्टी राव की नाराजगी मोल लेकर  अपने दम पर चुनाव में चेहरा उतारने का दम नहीं दिखा पा रही। चर्चा यह...