Skip to main content

हरियाणा में फरीदाबाद व गुरुग्राम सहित शहरों को लाल डोरा से मुक्‍त करने की तैयारी, सीएम ने बुलाई कैबिनेट की बैठक

 


हरियाणा की मनोहरलाल सरकार गांवों के बाद अब गुरुग्राम और फरीदबाद सहित राज्‍य के शहरों की जमीन को लाल डोरा मुक्‍त करने की तैयारी में है। राज्‍य सरकार इस संबंध में अध्‍यादेश ला सकती है और बाद में इसे हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में पारित करा सकती है। इस बारे में कैबिनेट की बैठक में प्रस्‍ताव लाया जा सकता है। मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल ने पांच अगस्‍त को कैबिनेट की बैठक बुलाई है।

हरियाणा कैबिनेट की बैठक पांच अगस्‍त को , विधानसभा के मानसून सत्र पर हाेगा फैसला

हरियाणा में अगले महीने विधानसभा के मानसून सत्र की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पांच अगस्त को मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई है। इसमें कई अहम मुद्दों पर निर्णय के साथ ही मानसून सत्र की तिथि को लेकर निर्णय लिया जा सकता है।

शहरों को लाल डोरा मुक्‍त करने के बारे में अध्‍यादेश जारी कर सकती है मनोहरलाल सरकार

मुख्यमंत्री की अगुवाई में अगले बृहस्पतिवार को सुबह 11 बजे होने वाली कैबिनेट बैठक में शहरों में जमीन को लाल डोरे से मुक्त करने का प्रस्ताव लाया जा सकता है। इस पर सहमति बनी तो सरकार इस संबंध मेें अध्यादेश लाएगी जिस पर विधानसभा के मानसून सत्र में मुहर लगवाई जाएगी। कोरोना संक्रमण में कमी के चलते प्रदेश सरकार की कोशिश है कि मानसून सत्र अगस्त के दूसरे पखवाड़े में करा लिया जाए।

 मानसून सत्र को लेकर विधानसभा सचिवालय भी इसकी तैयारी मेें जुटा है। पिछले साल विधानसभा का मानसून सत्र 26 अगस्त को बुलाया गया था, लेकिन तब मुख्यमंत्री मनोहर लाल और विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता सहित कई मंत्रियों और डेढ़ दर्जन से अधिक विधायकों के कोरोना पाजिटिव होने के चलते विधानसभा की कार्यवाही एक दिन के बाद ही स्थगित कर दी गई थी। बाद में नवंबर में मानसून सत्र दोबारा बुलाना पड़ा था।

सरकारी प्रयोगशालाओं को एनएबीएल से दिलाएंगे मान्यता

हरियाणा की सभी सरकारी प्रयोगशालाओं को नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड फार टेस्टिंग एंड कैलीब्रेशन लेबोरेट्रीज (एनएबीएल) से मान्यता दिलाने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ शुक्रवार को अंबाला छावनी के नागरिक अस्पताल में टर्शरी कैंसर केयर सेंटर की स्थापना की समीक्षा बैठक में विज ने अधिकारियों की एक टीम को राज्य की विभिन्न प्रयोगशालाओं में निरीक्षण व मूल्यांकन के लिए भेजने को कहा।

ये अफसर एनएबीएल मापदंडों के तहत वहां आ रही कमियों को दूर करने के लिए अपनी रिपोर्ट मुख्यालय में सौंपेंगे ताकि उन कमियों को दूर किया जा सके। बैठक में विज ने कहा कि कोविड संक्रमण को रोकने के लिए सैंपलिंग की रफ्तार को बढ़ाया जाए। लोगों के कार्य के अनुसार उन्हें श्रेणीबद्ध कर सैंपलिंग को प्राथमिकता दी जाए। भीड़भाड़ वाले इलाकों में रैंडम सैंपलिंग की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जल्द से जल्द से आक्सीजन के प्लांटों को लगाने के कार्य में तेजी लाएं।



Comments

Vyas Media Network

Vyas Media Network

Popular posts from this blog

पूर्व सीएम के PA ने रेवाड़ी CMO को बताया अनुभवहीन:CM सैनी से की शिकायत; बोले- स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल पर ध्यान नहीं दे रहीं

     सीएम नायब सैनी काे ज्ञापन सौंपते हुए पूर्व CM के पीएम अभिमन्यू यादव हरियाणा के रेवाड़ी का सरकारी अस्पताल सुर्खियों में आ गया है। पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के PA अभिमन्यु यादव ने स्वास्थ्य मंत्री पर आरोप लगाया कि वो गृह जिले की सुविधाओं का ध्यान नहीं कर रही है। जिसके चलते यहां व्यवस्था बदहाल हो गई है। रेवाड़ी अस्पताल को लेकर अभिमन्यु यादव ने सीएम नायब सैनी को शिकायती पत्र में कहा कि रेवाड़ी का CMO अनुभवहीन है। सीएमओ को पॉलीक्लिनिक चलाने का ही अनुभव है। अनुभवहीन सीएमओ के कारण यहां की व्यवस्था बिगड़ रही है। जिससे पूरे अस्पताल के प्रबंधन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। अभिमन्यु यादव के पत्र के अहम प्वाइंट 1. रेडियोलॉजिस्ट की कमी: रेवाड़ी अस्पताल में नियुक्त रेडियोलॉजिस्ट को प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया है। जिससे यहां कोई नियमित रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है। अल्ट्रासाउंड की तारीख 3 महीने बाद की दी जाती है। कभी-कभी केस की तारीख के कारण यह तारीख 3 महीने और आगे बढ़ जाती है। 2. त्वचा रोग विभाग पूर्णत निष्क्रिय: डर्मेटोलॉजी विभाग में कोई स्किन स्पेशलिस्ट नहीं कार्यरत है। जिससे मरीजों ...

रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है...? भरोसा किस पर किया जाए...? रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं 12 वाले सर्वेसर्वा बन गये, 19 लुप्त हो गये आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया

  रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है।* *जनता के बीच वे सब जवाब देह हैं।* *भरोसा किस पर किया जाए?*  *रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं सवाल यह है भी है कि  लोकतंत्र क्या केवल भाषणों में सुनने और कागजों में ही पढ़ने तक ही सीमित है? क्या उसका कोई व्यवहारिक पहलू नहीं है? आज भी आप के लिए यह थोड़े ठण्डे मन से सोचने की दरकार है। विकास की दलील भी बिल्कुल बेतुकी तार्किक है। कम बजट में भी आप ईमानदारी से, बिना किसी भ्रष्टाचार के, जनता की असली समस्याओं को केन्द्रित कर, जनता की कमेटियां बना कर, जनता की निगरानी में कराते तो हरियाणा की नगर पालिका के इतिहास में एक बड़ी लकीर खींच सकते थे। आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया। *पूरे रेवाड़ी शहर की सरकार, इसका बजट, विकास कार्यों के निर्णय लेने का अधिकार सब कुछ तो आपकी मुट्ठी में आ गया था। ना जाने क्यूं आपने अपनी मुट्ठी इतनी सहज ढंग से उन्हीं की झोली में खोल दी जिनके खिलाफ आप चुन कर आए थे।* नगर परिषद का चेयर...

रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी, BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए, जहां राव का इशारा होता है, वहां समीकरण बदल जाते हैं

    रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी! रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव को लेकर भाजपा इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि राव इंद्रजीत सिंह अगर नाराज़ हुए, तो पूरा खेल बिगड़ सकता है। दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव साहब अपनी रणनीति, संगठन क्षमता और पसंदीदा उम्मीदवार को जिताने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण मानेसर निगम चुनाव रहा, जहां भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन अपनी पसंद के प्रत्याशी सुंदरलाल को जीत नहीं दिला सकी। कारण साफ था—राव साहब ने अपनी समर्थक डॉ. इंद्रजीत यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया और जीत भी दिलवा दी। वहीं, पिछले रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भी राव साहब का दबदबा साफ नजर आया। उन्होंने अपनी समर्थक पूनम यादव को टिकट दिलवाकर मैदान में उतारा। संगठन के कुछ नेताओं ने अंदरखाने विरोध और बगावत की, लेकिन भीतरघात के बावजूद राव समर्थक पूनम यादव अध्यक्ष बनने में सफल रहीं। अब आगामी चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए। क्य...