Skip to main content

हरियाणा और पंजाब से हजारों किसान बैरिकेड तोड़कर चंडीगढ़ में घुसे, डीसी को ज्ञापन देकर लौटे

 


कृषि कानून रद्द कराने की मांग के लिए शुरू हुए किसान आंदोलन को सात महीने पूरे हो गए हैं। सरकार से बातचीत बंद होने के बाद किसानों ने फैसला लिया कि वे राष्ट्रपति तक अपनी बात पहुंचाएंगे। इसी के तहत शनिवार को देश भर में किसान राजभवनों के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं।


कृषि कानून रद्द कराने की मांग के लिए शुरू हुए किसान आंदोलन को सात महीने पूरे हो गए हैं। शनिवार को चंडीगढ़ में 32 किसान संगठनों ने राजभवन की तरफ कूच किया। पंचकूला और मोहाली से हजारों किसानों ने बैरिकेड तोड़कर चंडीगढ़ में प्रवेश किया। चंडीगढ़ में घुसे किसानों को प्रेस लाइट प्वाइंट पर जबरन रोका गया। एसएसपी कुलदीप सिंह चाहल भी मौके पर पहुंचे।

किसानों को यहीं रुकने के लिए कहा गया लेकिन किसान आगे बढ़ने की जिद पर अड़े रहे। इसके बादा डीसी मंदीप सिंह बराड़ भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रेस लाइट प्वाइंट पर ही किसानों से ज्ञापन लिया है और उन्हें आश्वासन दिया कि वह इसे प्रशासक वीपी सिंह बदनौर तक पहुंचाएंगे। उन्होंने सभी से शांति की अपील की है। डीसी को ज्ञापन देने के बाद किसान लौट गए।

इससे पहले दोपहर करीब पौने एक बजे किसान पंचकूला के नाडा साहिब गुरुद्वारा से रवाना हुए। वहीं मोहाली से किसानों ने अंब साहिब से यादविंदर चौक की तरफ कूच किया। इस दौरान किसान नेता रुलदू सिंह ने कहा कि आज के दिन इंदिरा गांधी की तरफ से इमरजेंसी लगाई गई थी। उसे याद करते हुए यह मोर्चा निकाला जा रहा है।

यादविंदर चौक पर किसानों ने पुलिस के बैरिकेड तोड़ दिए। किसान नेता रणजीत सिंह ने कहा कि हमने 5000 तक के किसानों का टिकट सोचा था लेकिन अब तक 30 हजार से ज्यादा किसानों का टिकट हो चुका है। दोपहर करीब एक बजे किसान चंडीगढ़ की बॉर्डर पर पहुंचे। चंडीगढ़ पुलिस ने पूरी तरह बैरिकेडिंग कर रखी थी और पानी के टैंकर भी तैनात किए गए थे। किसानों ने बैरिकेड हटाए तो चंडीगढ़ पुलिस ने पानी की बौछार की। किसान बैरिकेड तोड़कर चंडीगढ़ में घुसे। वहीं पंचकूला से भी किसान बैरिकेड तोड़कर चंडीगढ़ घुस गए हैं।

पंजाब के किसान जीरकपुर और मुल्लांपुर बैरियर से चंडीगढ़ में घुसे। वहीं, हरियाणा के किसान हाउसिंग बोर्ड लाइट प्वॉइंट से चंडीगढ़ में आए। इन रास्तों पर पुलिस बल तैनात है। पंचकूला में पुलिस ने घग्गर नदी के पुल के पास हैवी बैरिकेडिंग की है। इसके अलावा किसानों को रोकने के लिए बैरिकेड के साथ सीमेंट की बीम भी लगाई गई है।



वहीं हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने कहा है कि किसान आठ माह से बॉर्डर पर बैठे हैं। वे निराश हैं। इसलिए आंदोलन को जिंदा रखने के लिए उनके नेता रोज एक नया कार्यक्रम बनाते हैं। आज राजभवन में ज्ञापन देने की बात कही जा रही है। ऐसा होता रहता है।कृषि कानून रद्द कराने की मांग के लिए पिछले सात महीने से किसान आंदोलन कर रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने शांतिपूर्ण तरीके से धरना-प्रदर्शन करने की बात कही है। संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों बलबीर सिंह राजेवाल, दर्शनपाल, जगजीत सिंह दल्लेवाल, गुरनाम सिंह चढूनी, योगेंद्र यादव, युद्धवीर सिंह ने कहा कि यह दिन आपातकाल के 46 साल पूरे होने के तौर पर भी मनाया जा रहा है। क्योंकि तब नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश लगा था और इस समय भी ऐसा ही अंकुश लगाया जा रहा है। सात महीने बात भी सरकार किसानों की बात नहीं सुन रही है। उनकी आवाज को दबाया जा रहा है। 



Comments

Vyas Media Network

Vyas Media Network

Popular posts from this blog

रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है...? भरोसा किस पर किया जाए...? रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं 12 वाले सर्वेसर्वा बन गये, 19 लुप्त हो गये आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया

  रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है।* *जनता के बीच वे सब जवाब देह हैं।* *भरोसा किस पर किया जाए?*  *रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं सवाल यह है भी है कि  लोकतंत्र क्या केवल भाषणों में सुनने और कागजों में ही पढ़ने तक ही सीमित है? क्या उसका कोई व्यवहारिक पहलू नहीं है? आज भी आप के लिए यह थोड़े ठण्डे मन से सोचने की दरकार है। विकास की दलील भी बिल्कुल बेतुकी तार्किक है। कम बजट में भी आप ईमानदारी से, बिना किसी भ्रष्टाचार के, जनता की असली समस्याओं को केन्द्रित कर, जनता की कमेटियां बना कर, जनता की निगरानी में कराते तो हरियाणा की नगर पालिका के इतिहास में एक बड़ी लकीर खींच सकते थे। आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया। *पूरे रेवाड़ी शहर की सरकार, इसका बजट, विकास कार्यों के निर्णय लेने का अधिकार सब कुछ तो आपकी मुट्ठी में आ गया था। ना जाने क्यूं आपने अपनी मुट्ठी इतनी सहज ढंग से उन्हीं की झोली में खोल दी जिनके खिलाफ आप चुन कर आए थे।* नगर परिषद का चेयर...

रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी, BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए, जहां राव का इशारा होता है, वहां समीकरण बदल जाते हैं

    रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी! रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव को लेकर भाजपा इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि राव इंद्रजीत सिंह अगर नाराज़ हुए, तो पूरा खेल बिगड़ सकता है। दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव साहब अपनी रणनीति, संगठन क्षमता और पसंदीदा उम्मीदवार को जिताने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण मानेसर निगम चुनाव रहा, जहां भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन अपनी पसंद के प्रत्याशी सुंदरलाल को जीत नहीं दिला सकी। कारण साफ था—राव साहब ने अपनी समर्थक डॉ. इंद्रजीत यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया और जीत भी दिलवा दी। वहीं, पिछले रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भी राव साहब का दबदबा साफ नजर आया। उन्होंने अपनी समर्थक पूनम यादव को टिकट दिलवाकर मैदान में उतारा। संगठन के कुछ नेताओं ने अंदरखाने विरोध और बगावत की, लेकिन भीतरघात के बावजूद राव समर्थक पूनम यादव अध्यक्ष बनने में सफल रहीं। अब आगामी चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए। क्य...

नगर निकाय चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के फिर दबाव में आएगी भाजपा...?

      राव समर्थक या संगठन का होगा चेहरा   रेवाड़ी नगर परिषद चेयरपर्सन पद के चेहरे को लेकर भाजपा में लगातार मंथन का दौर जारी है। आम लोगों में चर्चा है कि क्या गत विधानसभा चुनाव की तरह नगर निकाय चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह  को तरजीह मिलेगी या फिर पार्टी संगठन अपनी चला पाएगा। टिकट लेने की लाइन में एक तरफ तो वह चेहरे है जो वर्षों से पार्टी में रहकर संगठन को मजबूत कर रहे हैं। वहीं दूसरी और केंद्रीय मंत्री राव इंदरजीत सिंह के खास समर्थक है जो राव के आशीर्वाद से टिकट प्राप्त करना चाहते हैं। । गत विधानसभा चुनाव की बात करें तो केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को पार्टी ने फ्री हैंड दिया था। जिस तरह से पार्टी ने उन पर विश्वास जताया था उसका परिणाम भी सामने आया था। दक्षिणी हरियाणा की 11 विधानसभा सीटों में से  10 विधानसभा सीट जीत कर भाजपा की झोली में डाली थी। भाजपा जानती है कि केंद्रीय मंत्री  राव इंदरजीत सिंह का इस क्षेत्र में काफी प्रभाव है। पार्टी राव की नाराजगी मोल लेकर  अपने दम पर चुनाव में चेहरा उतारने का दम नहीं दिखा पा रही। चर्चा यह...