Skip to main content

हरियाणा बोर्ड की 12वीं का रिजल्‍ट 25 जुलाई तक, 10वीं से अलग मानक किए तय

 


हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड 10वीके बाद अब 12वीं की रिजल्‍ट घोषित करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए बाेर्ड ने मानक तय कर लिए हैं और ये मानक 10वीं से अलग हाेंगे। बोर्ड 12वीं का परीक्षा परिणाम 25 जुलाई तक तय करेगा। बोर्ड 10वीं के बाद अब 12वीं का परिणाम भी परीक्षा लिए बिना घोषित करने की तैयारी की है। इसके लिए बाकायदा प्लान तैयार किया गया है।

दसवीं के 30 फीसद, 11वीं के 10 तो 12वीं के 60 फीसद अंक से तैयार करेगा 12वीं का पूरा परिणाम

12वीं में 10वीं की तरह आंतरिक मूल्यांकन मानक नहीं होंगे बल्कि 10वीं के 30 फीसदी, 11वीं के 10 फीसदी और 12वीं के 60 फीसदी अंक जोड़ कर परीक्षा परिणाम घोषित किया जाएगा। इसके लिए शिक्षा बोर्ड चेयरमैन ने वीडियो भी वायरल किया है।

मूल्यांकन को बनाया प्लान, 28 जून से 6 जुलाई तक स्कूलों के लिए खोला पोर्टल

12वीें के 60 फीसदी अंक तय करने के लिए बोर्ड अधिकारियों की बैठक बुधवार तक बुलाई गई है। उसमें तय होगा की 12वीं के 60 फीसदी अंक लेने के लिए कौन से मानक अपनाए जाएंगे। सर्वोच्च न्यायालय से 12वीं का परीक्षा परिणाम घोषित करने के लिए हरी झंडी मिलने के बाद परिणाम 25 जुलाई तक घोषित करने का निर्णय लिया गया है।

स्कूलों को 28 जून से 6 जुलाई तक अपलोड करने होंगे अंक 

12वीं का परीक्षा परिणाम घोषित करने से पहले हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने स्कूलों से 10वीं और 11वीं मेंं विद्यार्थियों के प्राप्त अंक मांगे गए हैं। विद्यालयों को ये अंक पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। इसके लिए तिथि निर्धारित कर दी गई है। 28 जून से 6 जुलाई तक पोर्टल खुला रहेगा। इस अवधि में स्कूलों को 10वीं और 11वीं के अंक अपलोड करने होंगे।

11वीं के 10 फीसदी अंक लेने का यह बताया कारण 

बोर्ड चेयरमैन ने बताया कि 11वीं के 10 फीसदी अंक लेने के को लेकर बोर्ड ओर दूसरे अधिकारियों की आनलाइन हुई बैठक मेंं मंथन किया गया था। पिछले साल 11वीं की परीक्षा ली गई थी और ये पूरी नहीं हाे पाई थी। बहुत से होशियार बच्चे 11वीं की परीक्षा पर ध्यान कम देते हैं ओर कंपीटीशन की तैयारी करते हैं। इसलिए 11वीं के 10 फीसदी अंक लेने का निर्णय लिया गया है।

प्रैक्टिकल बोर्ड के आब्जर्वर की देखरेख में ली गई थी 

बोर्ड चेयरमैन के अनुसार सरकारी और प्राइवेट स्कूलोंं में प्रैक्टिकल की परीक्षा बोर्ड के आब्जर्वर की देखरेख मेें हुई थी। प्रत्येक विद्यालय में 25-25 के ग्रुप में प्रैक्टीकल लेते हुए आब्जर्वर के साथ फोटो करके अपलोड की गई थी। आंतरिक मूल्यांकन भी बोर्ड आब्जर्वर की देखरेख में हुआ था। इसलिए किसी प्रकार की हेराफेरी की गुंजाइश नहीं बचती।

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने 12वीं की परीक्षा का परिणाम जारी करने के लिए यह फार्मूला मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को भेजा था। उन्होंने भी इस फार्मूले पर मुहर लगा दी है। अब स्कूलों से अंक मिलने और जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 25 जुलाई से पहले परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया जाएगा।



Comments

Vyas Media Network

Vyas Media Network

Popular posts from this blog

पूर्व सीएम के PA ने रेवाड़ी CMO को बताया अनुभवहीन:CM सैनी से की शिकायत; बोले- स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल पर ध्यान नहीं दे रहीं

     सीएम नायब सैनी काे ज्ञापन सौंपते हुए पूर्व CM के पीएम अभिमन्यू यादव हरियाणा के रेवाड़ी का सरकारी अस्पताल सुर्खियों में आ गया है। पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के PA अभिमन्यु यादव ने स्वास्थ्य मंत्री पर आरोप लगाया कि वो गृह जिले की सुविधाओं का ध्यान नहीं कर रही है। जिसके चलते यहां व्यवस्था बदहाल हो गई है। रेवाड़ी अस्पताल को लेकर अभिमन्यु यादव ने सीएम नायब सैनी को शिकायती पत्र में कहा कि रेवाड़ी का CMO अनुभवहीन है। सीएमओ को पॉलीक्लिनिक चलाने का ही अनुभव है। अनुभवहीन सीएमओ के कारण यहां की व्यवस्था बिगड़ रही है। जिससे पूरे अस्पताल के प्रबंधन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। अभिमन्यु यादव के पत्र के अहम प्वाइंट 1. रेडियोलॉजिस्ट की कमी: रेवाड़ी अस्पताल में नियुक्त रेडियोलॉजिस्ट को प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया है। जिससे यहां कोई नियमित रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है। अल्ट्रासाउंड की तारीख 3 महीने बाद की दी जाती है। कभी-कभी केस की तारीख के कारण यह तारीख 3 महीने और आगे बढ़ जाती है। 2. त्वचा रोग विभाग पूर्णत निष्क्रिय: डर्मेटोलॉजी विभाग में कोई स्किन स्पेशलिस्ट नहीं कार्यरत है। जिससे मरीजों ...

रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी, BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए, जहां राव का इशारा होता है, वहां समीकरण बदल जाते हैं

    रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी! रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव को लेकर भाजपा इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि राव इंद्रजीत सिंह अगर नाराज़ हुए, तो पूरा खेल बिगड़ सकता है। दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव साहब अपनी रणनीति, संगठन क्षमता और पसंदीदा उम्मीदवार को जिताने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण मानेसर निगम चुनाव रहा, जहां भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन अपनी पसंद के प्रत्याशी सुंदरलाल को जीत नहीं दिला सकी। कारण साफ था—राव साहब ने अपनी समर्थक डॉ. इंद्रजीत यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया और जीत भी दिलवा दी। वहीं, पिछले रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भी राव साहब का दबदबा साफ नजर आया। उन्होंने अपनी समर्थक पूनम यादव को टिकट दिलवाकर मैदान में उतारा। संगठन के कुछ नेताओं ने अंदरखाने विरोध और बगावत की, लेकिन भीतरघात के बावजूद राव समर्थक पूनम यादव अध्यक्ष बनने में सफल रहीं। अब आगामी चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए। क्य...

नगर निकाय चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के फिर दबाव में आएगी भाजपा...?

      राव समर्थक या संगठन का होगा चेहरा   रेवाड़ी नगर परिषद चेयरपर्सन पद के चेहरे को लेकर भाजपा में लगातार मंथन का दौर जारी है। आम लोगों में चर्चा है कि क्या गत विधानसभा चुनाव की तरह नगर निकाय चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह  को तरजीह मिलेगी या फिर पार्टी संगठन अपनी चला पाएगा। टिकट लेने की लाइन में एक तरफ तो वह चेहरे है जो वर्षों से पार्टी में रहकर संगठन को मजबूत कर रहे हैं। वहीं दूसरी और केंद्रीय मंत्री राव इंदरजीत सिंह के खास समर्थक है जो राव के आशीर्वाद से टिकट प्राप्त करना चाहते हैं। । गत विधानसभा चुनाव की बात करें तो केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को पार्टी ने फ्री हैंड दिया था। जिस तरह से पार्टी ने उन पर विश्वास जताया था उसका परिणाम भी सामने आया था। दक्षिणी हरियाणा की 11 विधानसभा सीटों में से  10 विधानसभा सीट जीत कर भाजपा की झोली में डाली थी। भाजपा जानती है कि केंद्रीय मंत्री  राव इंदरजीत सिंह का इस क्षेत्र में काफी प्रभाव है। पार्टी राव की नाराजगी मोल लेकर  अपने दम पर चुनाव में चेहरा उतारने का दम नहीं दिखा पा रही। चर्चा यह...