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REWARI क्या राव विरोधी दोहरा पाएंगे 2019 का इतिहास-केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने संगठन की कार्यकर्ताओं को तवज्जो न देकर अपने खास समर्थक को चुनावी मैदान में उतारा था, ऐसे में राव विरोधी पूरी तरह से सक्रिय हो गए और परिणाम हार से चुकाना पड़ा,करीब करीब वैसे ही स्थिति इस बार के नगर निकाय चुनाव में बनती हुई दिख रही है

 



 क्या राव विरोधी दोहरा पाएंगे 2019 का इतिहास-

 



रेवाड़ी में नगर परिषद और धारूहेड़ा नगर पालिका चुनावों को लेकर सियासी पारा तेजी से चढ़ रहा है। 28 अप्रैल को नामांकन वापसी और निर्दलीय उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित होने के बाद प्रचार अभियान पूरी तरह रफ्तार पकड़ने जा रहा है। इसी बीच भाजपा और कांग्रेस—दोनों ही दलों के भीतर की खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। इस बार सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा की हो रही है। भाजपा में इस समय स्थिति वर्ष 

2019 की विधानसभा चुनाव जैसी हो चली है। वर्ष 2019 के भी विधानसभा चुनाव में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने संगठन की कार्यकर्ताओं को तवज्जो न देकर अपने खास समर्थक को चुनावी मैदान में उतारा था। ऐसे में राव विरोधी पूरी तरह से सक्रिय हो गए और परिणाम 

सुनील मूसेपुर को हार से चुकाना पड़ा। करीब करीब वैसे ही स्थिति इस बार के  नगर निकाय चुनाव में बनती हुई दिख रही है। एक बार फिर से 

केंद्रीय मंत्री राव इंदरजीत सिंह भाजपा संगठन पर भारी पड़ते हुए नजर आए। दिल्ली में आयोजित कोर ग्रुप की बैठक में जिस तरह से राव तथा विधायक लक्ष्मण यादव के बीच टिकट देने को लेकर नाराजगी खुलकर सामने आई उससे यह बात साबित होती है कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं है। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह  हर चुनाव में पार्टी पर भारी पड़ते हुए नजर आते हैं।यही कारण है कि विरोधी भी एकजुट हो जाते हैं। रेवाड़ी नगर निकाय चुनाव में शहर की जनता की नाराजगी साफ देखने को मिल रही है। साथ  में भाजपा भी अब राव समर्थक बनाम बीजेपी समर्थक के बीच बट चुकी है। चर्चा है कि भाजपा कार्यकर्ताओं में आज अंदर ही अंदर सुलग रही है। राव की विरोधी पूरी तरह से एकजुट हो रहे हैं। सूत्रों की माने तो 

वर्ष  2019 में सक्रिय विरोधी एक बार फिर से एकजुट होकर ।‘एंटी राव’ खेमा इस बार खुलकर सामने आने की बजाय खामोशी से अपनी रणनीति पर काम करता दिखाई दे रहा है। यह खेमा लंबे समय से केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के विरोध के लिए जाना जाता है। हालांकि, इस बार विरोधी गुट सार्वजनिक रूप से अभी सक्रिय नजर नहीं आ रहा, लेकिन अंदरखाने पार्टी प्रत्याशी को नुकसान पहुंचने के लिए पूरी तरह से तैयार है। विरोधी अभी देखो और इंतजार करो की नीति पर काम कर रहा है। विरोधी खामोश होकर रणनीति तैयार कर रहा है। इस बार परिस्थितियों भी बदली बदली सी नजर आ रही है। पिछले 5 वर्षों में  जिस तरह से नगर परिषद में भ्रष्टाचार हुआ उसका कहीं ना कहीं असर भाजपा सहित राव की छवि पर भी पड़ता नजर आ रहा है। भाजपा प्रत्याशी विनीता पीपल पर विरोधी भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं। विरोधी आरोप लगा रहे हैं कि संगठन के कार्यकर्ताओं को छोड़कर राव ने भ्रष्टाचार के आरोपी को टिकट दिलवा दिया। इस बात को लेकर कार्यकर्ताओं में भी भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। विरोधियों के साथ-साथ भाजपा कार्यकर्ता भी  कुछ नया करने की मूड में दिखाई दे रहे हैं। नगर परिषद का चुनाव राव समर्थकों के सहारे ही एक तरह से लड़ा जा रहा है। कुल मिलाकर इस बार मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प होने की संभावना है। रेवाड़ी नगर परिषद का चुनाव इस बार सिर्फ स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह भाजपा की आंतरिक गुटबाजी और कांग्रेस की एकजुटता की परीक्षा भी बन गया है। एक ओर ‘खामोश’ विरोधी खेमा है, तो दूसरी ओर बागी उम्मीदवारों की चुनौती—ऐसे में आने वाले दिनों में चुनावी तस्वीर और भी स्पष्ट होगी।


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