एक बात तय है, रेवाड़ी और धारूहेड़ा का यह चुनाव सिर्फ निकाय चुनाव नहीं… भाजपा में राव की जिद के आगे BJP बैकफुट पर! रेवाड़ी-धारूहेड़ा में टिकट नहीं, ताकत की लड़ाई चल रही है,भाजपा का चुनाव चिन्ह भले कमल हो लेकिन अहीरवाल में टिकट अब भी राव दरबार से ही तय होते हैं
राव की जिद के आगे बीजेपी बैकफुट पर! रेवाड़ी-धारूहेड़ा में टिकट नहीं, ताकत की लड़ाई चल रही है
हरियाणा के नगर निकाय चुनाव में भाजपा की हालत इस वक्त ऐसी दिख रही है मानो टिकट चयन नहीं, सियासी संकट से जूझ रही हो। रेवाड़ी और धारूहेड़ा नगर परिषद/नगर पालिका अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों की घोषणा को लेकर पार्टी लगातार “आज करेंगे, कल करेंगे” की रट लगाए बैठी है, लेकिन समय हाथ से निकलता जा रहा है। नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और भाजपा अब तक फैसला नहीं कर पाई।
सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है Rao Inderjit Singh की सख्त राजनीतिक पकड़। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक राव इंद्रजीत सिंह ने अपनी पूरी वीटो पावर लगा दी है और समर्थकों के लिए टिकट की मांग पर अड़े हुए हैं।
भाजपा संगठन का एक वर्ग चाहता था कि वर्षों से मेहनत कर रहे कार्यकर्ताओं को मौका मिले, लेकिन जमीन की हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। जैसे ही टिकट वितरण का वक्त आया, राव साहब अपने पुराने अंदाज में मैदान में उतर गए और साफ संदेश दे दिया—अहीरवाल में फैसला बिना उनकी सहमति के नहीं होगा।
यही वजह है कि भाजपा नेतृत्व बैकफुट पर दिखाई दे रहा है। दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक बैठकों का दौर चला, लेकिन नामों पर अंतिम मुहर अब तक नहीं लग पाई। पार्टी के भीतर बेचैनी बढ़ रही है, कार्यकर्ताओं में नाराजगी है और विरोधी मजे ले रहे हैं।
अब चर्चा तेज है कि भाजपा आज उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह लगभग तय माना जा रहा है कि रेवाड़ी और धारूहेड़ा दोनों जगह राव इंद्रजीत सिंह की पसंद का ही प्रत्याशी मैदान में उतरेगा।
अगर ऐसा होता है तो संदेश साफ होगा—भाजपा का चुनाव चिन्ह भले कमल हो, लेकिन अहीरवाल में टिकट अब भी राव दरबार से ही तय होते हैं।
सवाल बड़ा है—क्या भाजपा संगठन अपने दम पर निर्णय लेने की स्थिति में है, या फिर हर बार की तरह इस बार भी एक नेता के दबाव के आगे झुक गई?
एक बात तय है, रेवाड़ी और धारूहेड़ा का यह चुनाव सिर्फ निकाय चुनाव नहीं… भाजपा की राजनीतिक हैसियत की परीक्षा बन चुका है।

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