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Haryana:वाहन रजिस्ट्रेशन फीस में 2.30 करोड़ का गबन, डेढ़ साल की फीस जमा नहीं, चालान पर लगती रही फर्जी मोहर SDM ने ऐसे पकड़ा फर्जीवाड़ा


 प्रतीकात्मक तस्वीर फोटो सोशल मीडिया 

सिरसा। उपमंडल कार्यालय ऐलनाबाद में वाहनों की रजिस्ट्रेशन व अन्य फीस आवेदकों से तो ली जा रही थी पर खजाना कार्यालय में तो जमा ही नहीं हुई। कार्यालय में जो फीस जमा करवाने पर मुहर लगी वह अब फर्जी पाई गई है। बैंक ने मोहर को अपनी बताने से मना कर दिया है।

शुरुआती जांच में दो करोड़ 30 लाख रुपये के गबन की बात सामने आई है। गबन भी तब पकड़ा गया जब एसडीएम वेद बैनीवाल ने औचक निरीक्षण में फाइलें देखनी शुरू की तो बैंक में जमा राशि की वेरिफिकेशन नहीं पाई गई। इसके बाद जांच के आदेश हुए।

सूत्रों के अनुसार, ऐलनाबाद उपमंडल कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस क्लर्क व मोटर व्हीकल रजिस्ट्रेशन क्लर्क से संबंधित वाहनों की हर प्रकार की फीस वाहन चालक से ली जाती रही। रिकार्ड में बैंक में जमा हुई राशि की रसीद भी लगती रही, लेकिन बैंक में खजाना कार्यालय के खाते में यह राशि जमा ही नहीं हुई।

कर्मचारी राशि जमा कराने के बाद अगले दिन खजाना कार्यालय से वेरिफाइ भी करवाता है कि जमा करवाई गई राशि संबंधित खाते में पहुंच गई। ऐलनाबाद के मामले में ऐसी वेरिफिकेशन नहीं करवाई गई। जानकारी के अनुसार, प्रशासन इस मामले में शुरुआथी जांच कर चुका है और जांच की प्रति उपायुक्त कार्यालय सिरसा को भी दे दी गई है। बुधवार या वीरवार को इस मामले में प्रशासन पुलिस कार्रवाई के लिए एफआइआर दर्ज करवा सकता है।

बैंक से मांगा रिकार्ड तो मुहर बता दी फर्जी

एसडीएम वेद बैनीवाल ने आरंभिक जांच के लिए बिल क्लर्क व रीडर की जांच कमेटी बैंक पहुंची तो बैंक ने एसडीएम कार्यालय के रिकार्ड में जमा दिखाई गई राशि से पल्ला झाड़ लिया और जमा रसीद पर लगाई गई मुहर को फर्जी बता दिया। इसके बाद टीम जिला स्तर पर खजाना कार्यालय पहुंची ताकि रिकार्ड का मिलान किया जा सके।

कभी कभार जमा करा दी जाती थी राशि

यहां सीट पर तीन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी जिसमें से दो कर्मचारी ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी सीट पर थे जबकि एक कर्मचारी मोटर व्हीकल रजिस्ट्रेशन सीट पर था। जांच की गई तो सामने आया कि ज्यादातर राशि जमा नहीं है जबकि बीच में कुछ राशि जमा है। ऐसा इसलिए किया गया कि किसी को इस मामले में शक न हो और पकड़ में न आ पाए।

प्राइवेट आदमी कौन

इस बीच पता चला है कि तीनों कर्मचारी अपनी मदद के लिए एक प्राइवेट व्यक्ति को रख रहे थे और उसी को राशि जमा करवाने के लिए देते रहे। हालांकि इस बात की अभी अधिकारिक पुष्टि नहीं है कि प्राइवेट व्यक्ति था या नहीं लेकिन कर्मचारी बता रहे हैं कि एक अन्य व्यक्ति भी वहीं रहता था।

बैंक से मांगी गई सीसीटीवी फुटेज

प्राइवेट व्यक्ति का नाम सामने आने के बाद प्रशासन ने भी अपनी जांच तेज की और एसबीआइ से छह माह की सीसीटीवी फुटेज मांगी है ताकि बैंक में जाने वाले कर्मचारी या प्राइवेट व्यक्ति की सही जानकारी सामने आ सके।

एसडीएम डा. वेदप्रकाश बैनीवाल ने बताया कि यह मामला वाहन रजिस्ट्रेशन से संबंधित है। औचक निरीक्षण किया तो संदेह हुआ तो जांच करवाई गई थी। अब पूरे मामले की विस्तृत जांच करवा रहे हैं। इसके बाद आपको जानकारी दे दी जाएगी।

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