Skip to main content

मां लक्ष्मी को खुश करने के लिए तुलसी के जल से करें ये काम, नौकरी में मिलेगी सफलता

 


तुलसी के पत्ते डालकर बनाया गया पानी काफी पवित्र होता है. कहते हैं कि अगर तुलसी के पानी का इस्तेमाल किया जाए, तो माता लक्ष्मी (Lakshmi Mata) काफी खुश होती हैं और घर में खुशहाली बनी रहती है. तुलसी पानी का छिड़काव सुबह-शाम पूजा के बाद दफ्तर या ऑफिस (Office) में करें. इससे कारोबार में तरक्की के रास्ते खुलते हैं और नौकरी मिलना भी आसान हो जाता है.


हिंदू धर्म में तुलसी (Basil Plant) का बहुत अधिक महत्व होता है. मान्यता है कि तुलसी मां, लक्ष्मी माता (Maa Lakshmi) का ही स्वरूप हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर घर में तुलसी का पौधा लगाना चाहिए. तुलसी का पौधा पूजनीय होता है. कहते हैं कि नियमित रूप से तुलसी जी की पूजा करने और उसमें जल अर्पित करने से मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है. साथ ही परिवार में शांति का विस्तार होता है और समस्त दुखों का नाश होता है. कहते हैं कि तुलसी के पौधे से घर में पॉजिटिव एनर्जी (Positive Energy) बनी रहती है. नियमित रूप से तुलसी जी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है. लेकिन क्या आपको पता है कि तुलसी की तरह ही उसके पानी के भी कई फायदे होते हैं. तुलसी के पत्ते डालकर बनाया गया पानी काफी पवित्र होता है.

कहते हैं कि अगर तुलसी के पानी का इस्तेमाल किया जाए, तो माता लक्ष्मी काफी खुश होती हैं और घर में खुशहाली बनी रहती है. आइए जानते हैं तुलसी के पानी से जुड़े कुछ विशेष उपायों को बारे में जिन्हें अपनाने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. साथ ही, नौकरी और बिजनेस में भी तरक्की मिलती है.

श्रीकृष्ण को तुलसी के पानी से कराएं स्नान
मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी बहुत प्रिय है. इसलिए कहा जाता है कि कान्हा जी को तुलसी के पानी से स्नान करवाने से वह बहुत खुश होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते है. अगर आप भी भगवान श्री कृष्ण की कृपा पाना चाहते हैं, तो उन्हें तुलसी के पानी से स्नान जरूर करवाएं. अगहन मास में श्री कृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है, इसलिए इस माह में तुलसी के पानी से स्नान करवाना विशेष फलदायी माना जाता है.

घर में तुलसी का जल जरूर छिड़कें
तुलसी के पत्तों को पानी में डालकर रातभर के लिए छोड़ दें. इसके बाद सुबह-शाम पूजा के बाद घर में उस तुलसी के जल का छिड़काव करें. घर का कोई भी कोना तुलसी जल से छूटना नहीं चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से नकारात्मक शक्तियां घर से भाग जाती हैं और पॉजिटिव एनर्जी का प्रवेश होता है.

लंबी बीमारी से मिलेगी मुक्ति
मान्यता है कि अगर कोई परिवार का सदस्य लंबे समय से बीमार चल रहा है, तो उस पर तुलसी के पानी का छिड़काव जरूर करें. पूजा करने के बाद सुबह और शाम एक हफ्ते तक ऐसा लगातार करें. ऐसा करने से शरीर की बीमारी निस्तेज होने लगती है और व्यक्ति धीरे-धीरे ठीक होने लगता है.

नौकरी-बिजनेस में मिलेगी तरक्की
कहते हैं कि अगर लगातार मेहनत के बाद भी नौकरी या बिजनेस में तरक्की नहीं मिल रही है तो तुलसी के पत्तों को तीन दिन तक पानी में भिगोकर रखें. इसके बाद इस पानी का छिड़काव सुबह-शाम पूजा के बाद दफ्तर या ऑफिस में करें. इससे कारोबार में तरक्की के रास्ते खुलते हैं और नौकरी मिलना भी आसान हो जाता है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. . इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)



Comments

Vyas Media Network

Vyas Media Network

Popular posts from this blog

पूर्व सीएम के PA ने रेवाड़ी CMO को बताया अनुभवहीन:CM सैनी से की शिकायत; बोले- स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल पर ध्यान नहीं दे रहीं

     सीएम नायब सैनी काे ज्ञापन सौंपते हुए पूर्व CM के पीएम अभिमन्यू यादव हरियाणा के रेवाड़ी का सरकारी अस्पताल सुर्खियों में आ गया है। पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के PA अभिमन्यु यादव ने स्वास्थ्य मंत्री पर आरोप लगाया कि वो गृह जिले की सुविधाओं का ध्यान नहीं कर रही है। जिसके चलते यहां व्यवस्था बदहाल हो गई है। रेवाड़ी अस्पताल को लेकर अभिमन्यु यादव ने सीएम नायब सैनी को शिकायती पत्र में कहा कि रेवाड़ी का CMO अनुभवहीन है। सीएमओ को पॉलीक्लिनिक चलाने का ही अनुभव है। अनुभवहीन सीएमओ के कारण यहां की व्यवस्था बिगड़ रही है। जिससे पूरे अस्पताल के प्रबंधन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। अभिमन्यु यादव के पत्र के अहम प्वाइंट 1. रेडियोलॉजिस्ट की कमी: रेवाड़ी अस्पताल में नियुक्त रेडियोलॉजिस्ट को प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया है। जिससे यहां कोई नियमित रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है। अल्ट्रासाउंड की तारीख 3 महीने बाद की दी जाती है। कभी-कभी केस की तारीख के कारण यह तारीख 3 महीने और आगे बढ़ जाती है। 2. त्वचा रोग विभाग पूर्णत निष्क्रिय: डर्मेटोलॉजी विभाग में कोई स्किन स्पेशलिस्ट नहीं कार्यरत है। जिससे मरीजों ...

रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है...? भरोसा किस पर किया जाए...? रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं 12 वाले सर्वेसर्वा बन गये, 19 लुप्त हो गये आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया

  रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है।* *जनता के बीच वे सब जवाब देह हैं।* *भरोसा किस पर किया जाए?*  *रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं सवाल यह है भी है कि  लोकतंत्र क्या केवल भाषणों में सुनने और कागजों में ही पढ़ने तक ही सीमित है? क्या उसका कोई व्यवहारिक पहलू नहीं है? आज भी आप के लिए यह थोड़े ठण्डे मन से सोचने की दरकार है। विकास की दलील भी बिल्कुल बेतुकी तार्किक है। कम बजट में भी आप ईमानदारी से, बिना किसी भ्रष्टाचार के, जनता की असली समस्याओं को केन्द्रित कर, जनता की कमेटियां बना कर, जनता की निगरानी में कराते तो हरियाणा की नगर पालिका के इतिहास में एक बड़ी लकीर खींच सकते थे। आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया। *पूरे रेवाड़ी शहर की सरकार, इसका बजट, विकास कार्यों के निर्णय लेने का अधिकार सब कुछ तो आपकी मुट्ठी में आ गया था। ना जाने क्यूं आपने अपनी मुट्ठी इतनी सहज ढंग से उन्हीं की झोली में खोल दी जिनके खिलाफ आप चुन कर आए थे।* नगर परिषद का चेयर...

रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी, BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए, जहां राव का इशारा होता है, वहां समीकरण बदल जाते हैं

    रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी! रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव को लेकर भाजपा इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि राव इंद्रजीत सिंह अगर नाराज़ हुए, तो पूरा खेल बिगड़ सकता है। दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव साहब अपनी रणनीति, संगठन क्षमता और पसंदीदा उम्मीदवार को जिताने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण मानेसर निगम चुनाव रहा, जहां भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन अपनी पसंद के प्रत्याशी सुंदरलाल को जीत नहीं दिला सकी। कारण साफ था—राव साहब ने अपनी समर्थक डॉ. इंद्रजीत यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया और जीत भी दिलवा दी। वहीं, पिछले रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भी राव साहब का दबदबा साफ नजर आया। उन्होंने अपनी समर्थक पूनम यादव को टिकट दिलवाकर मैदान में उतारा। संगठन के कुछ नेताओं ने अंदरखाने विरोध और बगावत की, लेकिन भीतरघात के बावजूद राव समर्थक पूनम यादव अध्यक्ष बनने में सफल रहीं। अब आगामी चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए। क्य...