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हरियाणा में बेसहारा बुजुर्गों को घर पर ही मिलेगा सहारा, नहीं जाना पड़ेगा वृद्धाश्रम

 


एक केयर गिवर चार बुजुर्गों की देखभाल करेगा। ये बुजुर्ग किसी भी सेक्टर या कॉलोनी में आसपास ही रहने वाले होंगे। केयर गिवर का काम सुबह से शाम तक इनकी देखभाल, भोजन व्यवस्था व अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैया कराना होगा। इनके पहचान पत्र बने होंगे।


बुढ़ापे में अकेले गुजर-बसर कर रहे बेसहारा बुजुर्गों को जल्दी घर पर ही सहारा मिलेगा। उन्हें वृद्धाश्रम की दहलीज नहीं चढ़नी होगी। ऐसे बुजुर्ग जिनके बच्चे साथ नहीं रहते या विदेश में हैं, उनकी देखभाल के लिए केयर गिवर्स मुहैया कराए जाएंगे। प्रदेश सरकार में विशेष मुख्य सचिव रहे सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. सुनील गुलाटी और आपसी संस्था यह मुहिम शुरू करने जा रही है। इसकी पूरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाई गई है। 16 अगस्त से प्रदेश में इस योजना पर काम शुरू होगा। शुरुआत में बल्लभगढ़ व गुरुग्राम में 40 केयर गिवर्स तैयार किए जाएंगे। इसके बाद देशभर में बेसहारा बुजुर्गों को देखभालकर्ता मुहैया कराने पर काम किया जाएगा।


केंद्र सरकार में वर्षों तक सेवाएं दे चुके डॉ. सुनील गुलाटी केंद्रीय श्रम एवं रोजगार, ग्रामीण विकास मंत्रालयों के संपर्क में भी हैं। जिससे कि केयर गिवर्स बनने वाले बेरोजगार युवाओं को सरकारी स्तर पर मेहनताना दिलाने का प्रबंध किया जा सके। गुलाटी केंद्र सरकार को जल्दी प्रस्ताव सौंपने वाले हैं कि केयर गिवर्स के जॉब कार्ड बनाकर इनकी दिहाड़ी मनरेगा में लगाई जाए।


उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार उनका प्रस्ताव स्वीकार करे तो बेसहारा बुजुर्गों को सहारा मिलने के साथ ही बेरोजगारों की फौज को रोजगार मिल जाएगा। उन्होंने अपने इस प्रोजेक्ट का नाम इंडिया विल बी द केयर कैपिटल ऑफ वर्ल्ड रखा है।


एक केयर गिवर चार बुजुर्गों की करेगा देखभाल

सुनील गुलाटी ने बताया कि एक केयर गिवर चार बुजुर्गों की देखभाल करेगा। ये बुजुर्ग किसी भी सेक्टर या कॉलोनी में आसपास ही रहने वाले होंगे। केयर गिवर का काम सुबह से शाम तक इनकी देखभाल, भोजन व्यवस्था व अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैया कराना होगा। इनके पहचान पत्र बने होंगे। पुलिस सत्यापन कराकर ही इन्हें बुजुर्गों की देखभाल में लगाएंगे। इससे बुजुर्गों को घर छोड़कर वृद्धाश्रम नहीं जाना पड़ेगा।


प्रदेश सरकार से भी मांगेंगे सहयोग

पूर्व विशेष मुख्य सचिव ने बताया कि इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार से भी सहयोग मांगा जाएगा। वह मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर पूरे प्रोजेक्ट से अवगत कराएंगे। उन्हें लक्ष्य व उद्देश्यों को चिह्नित करते हुए पूरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट भेजी जाएगी। 





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