Skip to main content

हरियाणा: लोकल चुनावों पर किसान आंदोलन का असर! अपने ही गढ़ में हारी BJP की सहयोगी

 


अंबाला, पंचकूला, सोनीपत, रेवारी के धरुहेरा, रोहतक के सांपला और हिसार के उकालना में बीते रविवार को नगर निगम के चुनाव हुए थे. बुधवार को सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई थी. यहां बीजेपी-जेजेपी की हार के पीछे किसान आंदोलन को माना जा रहा है.

हरियाणा के स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी-जेजेपी गठबंधन को बड़ा झटका लगा है. नगर निगम के चुनावों में सत्तारूढ़ गठबंधन को सोनीपत और अंबाला की मेयर की सीट से हाथ धोना पड़ा है. उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी हिसार के उकालना और रेवारी के धरुहेरा में अपने घर के मैदान में चुनाव हार गई है.  यह बड़ा झटका गठबंधन को राज्य के चुनावों के अगले साल ही सहना पड़ रहा है.

बता दें कि अंबाला, पंचकूला, सोनीपत, रेवारी के धरुहेरा, रोहतक के सांपला और हिसार के उकालना में बीते रविवार को नगर निगम के चुनाव हुए थे. बुधवार को सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई थी.

कांग्रेस की सोनीपत में 14,000 वोटों से जीत हुई है. निखिल मदान सोनीपत के पहले मेयर बनेंगे. कांग्रेस का दावा है कि कृषि कानूनों के खिलाफ गुस्से के चलते बीजेपी को हारना पड़ा है. कांग्रेस नेता श्रीवत्स ने ट्वीट कर कहा, 'कांग्रेस बड़े अंतर से सोनीपत के मेयर का चुनाव जीत गई है. कांग्रेस: 72,111, BJP: 58,300. ध्यान दें कि सोनीपत सिंघू बॉर्डर के ठीक बगल में है और हरियाणा के किसान आंदोलन का केंद्र है.'

अंबाला में हरियाणा जनचेतना पार्टी की शक्ति रानी शर्मा मेयर बनने वाली हैं. उनकी 8,000 वोटों के अंतर से जीत हुई है. वो HJP के अध्यक्ष विनोद शर्मा (पूर्व कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री) की पत्नी हैं. उनका बेटा ही मनु शर्मा है, जिसे जेसिका लाल मर्डर केस में दोषी घोषित किया गया था.

बीजेपी पंचकूला में आगे चल रही थी. हालांकि, उसकी गठबंधन पार्टी JJP रेवारी और हिसार की अपनी सीटों से हाथ धो चुकी है. किसान आंदोलन ने जेजेपी को तब धर्मसंकट में डाल दिया था, जब पार्टी की पूर्व सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने हाल ही में बीजेपी-नीत एनडीए से नाता तोड़ लिया था. अकाली दल ने कृषि कानूनों के विरोध में गठबंधन छोड़ा था. इसके बाद दुष्यंत चौटाला ने भी कहा था कि वो किसानों को मिनिमम सपोर्ट प्राइस सुनिश्चित न किए जाने की स्थिति में एनडीए छोड़ देंगे. 

पिछले हफ्ते उन्हें अपने ही विधानसभा क्षेत्र- जींद के ऊचां कलां- में गांव वालों का विरोध झेलना पड़ा था, जहां लोगों ने उनके लिए बनाए गए हैलीपैड को खोद दिया था. इसी तरह हरियाणा के कई गांवों ने गठबंधन के नेताओं की एंट्री को बंद कर दिया था. 

पिछले महीने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सरकार की तब बहुत आलोचना हुई थी, जब यहां पर प्रदर्शनकारी किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के उनपर वॉटर कैनन और लाठियां चलवाई गई थीं



Comments

Vyas Media Network

Vyas Media Network

Popular posts from this blog

पूर्व सीएम के PA ने रेवाड़ी CMO को बताया अनुभवहीन:CM सैनी से की शिकायत; बोले- स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल पर ध्यान नहीं दे रहीं

     सीएम नायब सैनी काे ज्ञापन सौंपते हुए पूर्व CM के पीएम अभिमन्यू यादव हरियाणा के रेवाड़ी का सरकारी अस्पताल सुर्खियों में आ गया है। पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के PA अभिमन्यु यादव ने स्वास्थ्य मंत्री पर आरोप लगाया कि वो गृह जिले की सुविधाओं का ध्यान नहीं कर रही है। जिसके चलते यहां व्यवस्था बदहाल हो गई है। रेवाड़ी अस्पताल को लेकर अभिमन्यु यादव ने सीएम नायब सैनी को शिकायती पत्र में कहा कि रेवाड़ी का CMO अनुभवहीन है। सीएमओ को पॉलीक्लिनिक चलाने का ही अनुभव है। अनुभवहीन सीएमओ के कारण यहां की व्यवस्था बिगड़ रही है। जिससे पूरे अस्पताल के प्रबंधन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। अभिमन्यु यादव के पत्र के अहम प्वाइंट 1. रेडियोलॉजिस्ट की कमी: रेवाड़ी अस्पताल में नियुक्त रेडियोलॉजिस्ट को प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया है। जिससे यहां कोई नियमित रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है। अल्ट्रासाउंड की तारीख 3 महीने बाद की दी जाती है। कभी-कभी केस की तारीख के कारण यह तारीख 3 महीने और आगे बढ़ जाती है। 2. त्वचा रोग विभाग पूर्णत निष्क्रिय: डर्मेटोलॉजी विभाग में कोई स्किन स्पेशलिस्ट नहीं कार्यरत है। जिससे मरीजों ...

रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी, BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए, जहां राव का इशारा होता है, वहां समीकरण बदल जाते हैं

    रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी! रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव को लेकर भाजपा इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि राव इंद्रजीत सिंह अगर नाराज़ हुए, तो पूरा खेल बिगड़ सकता है। दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव साहब अपनी रणनीति, संगठन क्षमता और पसंदीदा उम्मीदवार को जिताने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण मानेसर निगम चुनाव रहा, जहां भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन अपनी पसंद के प्रत्याशी सुंदरलाल को जीत नहीं दिला सकी। कारण साफ था—राव साहब ने अपनी समर्थक डॉ. इंद्रजीत यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया और जीत भी दिलवा दी। वहीं, पिछले रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भी राव साहब का दबदबा साफ नजर आया। उन्होंने अपनी समर्थक पूनम यादव को टिकट दिलवाकर मैदान में उतारा। संगठन के कुछ नेताओं ने अंदरखाने विरोध और बगावत की, लेकिन भीतरघात के बावजूद राव समर्थक पूनम यादव अध्यक्ष बनने में सफल रहीं। अब आगामी चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए। क्य...

नगर निकाय चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के फिर दबाव में आएगी भाजपा...?

      राव समर्थक या संगठन का होगा चेहरा   रेवाड़ी नगर परिषद चेयरपर्सन पद के चेहरे को लेकर भाजपा में लगातार मंथन का दौर जारी है। आम लोगों में चर्चा है कि क्या गत विधानसभा चुनाव की तरह नगर निकाय चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह  को तरजीह मिलेगी या फिर पार्टी संगठन अपनी चला पाएगा। टिकट लेने की लाइन में एक तरफ तो वह चेहरे है जो वर्षों से पार्टी में रहकर संगठन को मजबूत कर रहे हैं। वहीं दूसरी और केंद्रीय मंत्री राव इंदरजीत सिंह के खास समर्थक है जो राव के आशीर्वाद से टिकट प्राप्त करना चाहते हैं। । गत विधानसभा चुनाव की बात करें तो केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को पार्टी ने फ्री हैंड दिया था। जिस तरह से पार्टी ने उन पर विश्वास जताया था उसका परिणाम भी सामने आया था। दक्षिणी हरियाणा की 11 विधानसभा सीटों में से  10 विधानसभा सीट जीत कर भाजपा की झोली में डाली थी। भाजपा जानती है कि केंद्रीय मंत्री  राव इंदरजीत सिंह का इस क्षेत्र में काफी प्रभाव है। पार्टी राव की नाराजगी मोल लेकर  अपने दम पर चुनाव में चेहरा उतारने का दम नहीं दिखा पा रही। चर्चा यह...