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कल उठेंगे देव:25 नवंबर से 15 कल उठेंगे देव; 25 नवंबर से 15 अक्टूबर तक शादियाें के सिर्फ 10 मुहुर्ततक शादियाें के सिर्फ 10 मुहुर्त

 


25, 27, 30 नवंबर अाैर 1,6, 7,9, 10, 11, 15 दिसम्बर काे शादियाें के शुभ मुहुर्त, फिर शुरू हाेगा खरमासमास         



 कार्तिक  मास के                             शुक्लपक्ष में पड़ने वाली एकादशी काे देवउठानी एकादशी मनाई जाती है। 25 नवंबर काे यह एकादशी पड़ रही है।  पंडित Narendra कुमार  ने बताया कि इसे देवाेत्थान एकादशी भी कहा जाता है। यह एकादशी तुलसी विवाह व भीष्म पंचक एकादशी के रूप में मनाई जाती है।

इसलिए इस दिन भगवान विष्णु व तुलसी माता की पूजा का बहुत महत्व है। उन्हाेंने बताया कि इस दिन अनार, केला, आंवला, सिंघाड़ा भगवान विष्णु काे अर्पित करना चाहिए। इस दिन से विवाह कार्य भी शुरू हाे जाते हैं। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि 25 नवंबर से देवउठानी एकादशी के साथ ही शादियाें के शुभ मुहुर्त शुरू हाे जाएंगे।

25, 27, 30 नवंबर और 1,6, 7,9, 10, 11, 15 दिसम्बर काे शादियाें के शुभ मुहुर्त हैं। उसके बाद खरमास शुरू हाे जाएगा। जनवरी से मार्च तक गुरु व शुक्र ग्रह अस्त रहेंगे। 17 जनवरी से 15 फरवरी तक गुरु व 14 फरवरी से 18 अप्रैल तक शुक्र ग्रह अस्त रहेंगे। उसके बाद शादियाें के मुहुर्त शुरू हाेंगे। 16 फरवरी काे बसंत पंचमी के दिन अभुझ मुहुर्त बन रहा है जिसमें विवाह किया जा सकता है।

हरिप्रबोधिनी एकादशी 25 नवंबर काे होगा तुलसी जी का शालिग्राम से विवाह
कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन तुलसी विवाह किया जाता है। ज्योतिषाचार्य कृष्ण नावां ने बताया कि इस वर्ष यह हरिप्रबोधिनी एकादशी तिथि 25 नवंबर को शुरू होकर 26 तारीख को समाप्त होगी। एकादशी तिथि का आरंभ 25 नवंबर, सुबह 2:43 बजे से होगा और 26 नवंबर, सुबह 5:11 बजे तक एकादशी तिथि का समापन होगा।

तुलसी विवाह का शुभ लग्न मुहूर्त शाम 4:46 से 6:42 मिनट तक करना शुभ होगा। द्वादशी तिथि 26 नवंबर, सुबह 5.12 मिनट पर होगी अाैर 27 नवंबर, सुबह 7.47 मिनट पर इसका समापन होगा। वैष्णव जन द्वादशी तिथि में विवाह एवं व्रत को करते हैं।

तुलसी विवाह का उत्सव 11वें चंद्र दिवस यानी प्रबोधिनी एकादशी से शुरू होता है और पूर्णिमा की रात या कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है। तुलसी विवाह 25 नवंबर को मनाया जाएगा। माता तुलसी का विवाह भगवान शालिग्राम के साथ किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार जिन लोगों के पास कन्या संतान न हो और वह इस दिन माता तुलसी का विवाह शालिग्राम के साथ करते हैं तो उन्हें कन्यादान जैसे महादान का फल प्राप्त होता है।

एकादशी पर करें ये उपाय

  • जिनकी कुंडली में मांगलिक दोष एवं राहु विवाहित जीवन के 7वें घर में हो या उसके जीवन में बार-बार अड़चन एवं समस्या आ रही हो उन्हें तुलसी और भगवान शालिग्राम की विधि पूर्वक पूजा करवानी चाहिए।
  • जिनके घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश अधिक हो। उन्हें अपने घर में तुलसी पूजा अवश्य करनी चाहिए।
  • जिन विवाहित महिलाओं की कुंडली में गुरू कमजोर हो उन्हें तुलसी विवाह के दिन 7 पत्ते तुलसी के ऊपर हल्दी एवं केसर लगाकर मौली से बांधकर भगवान विष्णु के पास रखकर ऊं नमो भगवते वासुदेवाय का मंत्र जाप करें और अगले दिन द्वादशी में पर उन्हें अपने पास रख लें।
  • सुहागन स्त्री को तुलसी विवाह जरूर करना चाहिए। इससे अंखड सौभाग्य व सुख-समृद्धि मिलती है।

नहीं ताेड़नी चाहिए तुलसी

इस दिन तुलसी के पत्ताें काे नहीं ताेड़ना चाहिए। कभी भी सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्ते नहीं ताेड़ने चाहिए। एकादशी, चतुर्दशी अमावस्या, रविवार और सूर्य या चंद्र ग्रहण के समय तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। इसके अलावा बिना स्नान किए कभी भी तुलसी के पत्ताें काे छूना नहीं चाहिए। यदि वर्जित की गई तिथियों में से किसी दिन तुलसी के पत्तों की आवश्यकता हो तो उस दिन से एक दिन पहले ही पत्ते तोड़कर रख लें।



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