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सरकारी सड़क पर कब्जा कराने के नाम पर ही 20 से 25 हजार रुपये का किराया वसूला जा रहा है।

 


दिनभर बस जाम ही जाम लगा रहता है। आपके आदेशों के बावजूद चौपहिया वाहनों का प्रवेश नहीं रुक रहा। इतना ही नहीं अतिक्रमणकारियों के आगे पूरा सिस्टम ही नतमस्तक नजर आ रहा है। भयंकर जाम के कारण लोग वाहनों पर तो क्या पैदल भी बाजारों में से निकल नहीं पा रहे हैं। बाजार आना एक तरह से सजा बन गया है। शहरवासी प्रशासनिक अधिकारियों से कुछ इसी अंदाज में बाजारों को जाम से मुक्ति दिलाने की गुहार लगा रहे हैं। जाम के कारण हाल-बेहाल शहर के बाजारों में स्थिति बेहद विकट हो गई है। बाजारों में आपका निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है। महज पांच मिनट की दूरी तय करने में आधे से एक घंटे का समय लग रहा है। दीपावली से पूर्व ही बाजारों में इस तरह के हालात बन गए थे, जिसके चलते उपायुक्त यशेंद्र सिंह ने बाजारों में भारी व चौपहिया वाहनों के प्रवेश पर सुबह 10 से शाम 6 बजे तक के लिए रोक लगा दी थी। उपायुक्त की रोक के बाद एक दो दिन तो स्थिति काबू में रही थी तथा पुलिस ने अवरोध लगाकर चौपहिया वाहनों को रोकना शुरू किया था लेकिन अब फिर से हालात बिगड़ गए हैं। पुलिसकर्मी किसी भी चौपहिया वाहन को रोक नहीं रहे हैं। ये वाहन सीधे बाजार में घुसकर जाम का बड़ा कारण बन रहे हैं। रविवार को शहर के मोती चौक बाजार में करीब दो घंटे तक लोग जाम में फंसे रहे। अतिक्रमणकारियों ने किया पक्का कब्जा अनलाक के बाद से अतिक्रमणकारी पूरी तरह से बाजारों में हावी हो गए हैं। शहर के बाजारों में अतिक्रमण का एक बड़ा खेल शुरू हो चुका है। बाजार की सड़कों पर दोनों ओर अतिक्रमणकारियों ने अपना कब्जा जमा लिया है। शहर की पुरानी सब्जीमंडी, मोती चौक, गोकल बाजार, रेलवे रोड, काठमंडी, नया बाजार, अपना बाजार आदि में अतिक्रमणकारियों ने सड़क पर ही अपनी दुकानें लगाकर पक्का कब्जा जमाना शुरू कर दिया है। हैरान करने वाली बात यह है कि स्थिति बद से बदतर होती जा रही है और नगर परिषद की टीम बाजारों में निकलकर स्थिति को काबू में करने का कोई प्रयास नहीं कर रही है। बड़ी बात यह है कि इन अतिक्रमणकारियों से बाजार के ही दुकानदार किराया भी वसूल कर रहे हैं। 

सरकारी सड़क पर कब्जा कराने के नाम पर ही 20 से 25 हजार रुपये का किराया वसूला जा रहा है।



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