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BJP-कांग्रेस के खेल में फंसे हरियाणा के 3 सियासी परिवार:भजनलाल-छोटूराम फैमिली को दलबदली ले डूबी; बंसीलाल परिवार को किनारे कर दिया करने के पीछे सियासत क्या?

 


कभी हरियाणा की राजनीति की दशा-दिशा तय करने वाले 3 दिग्गज सियासी परिवार इस बार भाजपा और कांग्रेस के खेल में फंस गए। चुनावी जोड़तोड़ से जीत की उम्मीद में इन दोनों पार्टियों ने तीनों परिवारों पर भरोसा नहीं किया। ये परिवार पूर्व CM भजनलाल व बंसीलाल और किसान नेता छोटूराम के हैं। इनमें भजनलाल-छोटूराम की फैमिली को पार्टी बदलकर भाजपा में जाना भारी पड़ गया। वहीं बंसीलाल परिवार को कांग्रेस ने ही खुड्‌डे लाइन यानी किनारे कर दिया।

सिलसिलेवार ढंग से जानिए तीनों परिवारों के साथ क्या खेल हुआ

1. भजनलाल परिवार
चौधरी भजनलाल 3 बार हरियाणा के CM रहे। उनकी विरासत बेटे कुलदीप बिश्नोई संभाल रहे हैं। कुलदीप बिश्नोई जब 2014 में कांग्रेस में थे तो उन्हें हिसार से टिकट मिली। हालांकि वे तब इनेलो के दुष्यंत चौटाला से हार गए थे। इसके बाद कुलदीप पत्नी रेणूका बिश्नोई और बेटे भव्य बिश्नोई के साथ अगस्त 2022 में भाजपा में शामिल हो गए। इस बार कुलदीप हिसार सीट से टिकट के बड़े दावेदार थे। उन्होंने इसका दावा भी ठोका था लेकिन भाजपा में उनकी नहीं चली और टिकट पूर्व डिप्टी पीएम चौधरी देवीलाल के बेटे रणजीत चौटाला को मिल गई।

2. बंसीलाल परिवार
पूर्व CM बंसीलाल 4 बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे। उनकी राजनीतिक विरासत विधायक बहू किरण चौधरी संभाल रही हैं। उनका परिवार कांग्रेस में है। इस बार भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से किरण की बेटी श्रुति चौधरी टिकट की दावेदार थी। श्रुति इस सीट से 2009 में सांसद बनी थी। हालांकि 2014 और 2019 में वह चुनाव हार गईं। उन्हें भाजपा उम्मीदवार चौधरी धर्मबीर ने हराया था, जो इस बार भी इसी सीट से भाजपा के उम्मीदवार हैं। कांग्रेस ने उनकी टिकट काटकर विधायक राव दान सिंह को दे दी।

3. छोटूराम परिवार
सर छोटूराम के परिवार की राजनीतिक विरासत उनके नाती पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह संभाल रहे हैं। बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह 2019 में हिसार से भाजपा की टिकट पर लोकसभा चुनाव जीते। बृजेंद्र ने मार्च महीने में ही भाजपा छोड़ दी। इसके बाद वे कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके बाद बीरेंद्र सिंह ने बेटे के लिए हिसार और सोनीपत सीट से दावा ठोका। उन्होंने हिसार को प्राथमिकता तक बताया। हालांकि कांग्रेस ने उन्हें झटका देते हुए कहीं से टिकट नहीं दी।


कभी हरियाणा की राजनीति की दशा-दिशा तय करने वाले 3 दिग्गज सियासी परिवार इस बार भाजपा और कांग्रेस के खेल में फंस गए। चुनावी जोड़तोड़ से जीत की उम्मीद में इन दोनों पार्टियों ने तीनों परिवारों पर भरोसा नहीं किया। ये परिवार पूर्व CM भजनलाल व बंसीलाल और किसान नेता छोटूराम के हैं। इनमें भजनलाल-छोटूराम की फैमिली को पार्टी बदलकर भाजपा में जाना भारी पड़ गया। वहीं बंसीलाल परिवार को कांग्रेस ने ही खुड्‌डे लाइन यानी किनारे कर दिया।

सिलसिलेवार ढंग से जानिए तीनों परिवारों के साथ क्या खेल हुआ

1. भजनलाल परिवार
चौधरी भजनलाल 3 बार हरियाणा के CM रहे। उनकी विरासत बेटे कुलदीप बिश्नोई संभाल रहे हैं। कुलदीप बिश्नोई जब 2014 में कांग्रेस में थे तो उन्हें हिसार से टिकट मिली। हालांकि वे तब इनेलो के दुष्यंत चौटाला से हार गए थे। इसके बाद कुलदीप पत्नी रेणूका बिश्नोई और बेटे भव्य बिश्नोई के साथ अगस्त 2022 में भाजपा में शामिल हो गए। इस बार कुलदीप हिसार सीट से टिकट के बड़े दावेदार थे। उन्होंने इसका दावा भी ठोका था लेकिन भाजपा में उनकी नहीं चली और टिकट पूर्व डिप्टी पीएम चौधरी देवीलाल के बेटे रणजीत चौटाला को मिल गई।

2. बंसीलाल परिवार
पूर्व CM बंसीलाल 4 बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे। उनकी राजनीतिक विरासत विधायक बहू किरण चौधरी संभाल रही हैं। उनका परिवार कांग्रेस में है। इस बार भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से किरण की बेटी श्रुति चौधरी टिकट की दावेदार थी। श्रुति इस सीट 

3. छोटूराम परिवार
सर छोटूराम के परिवार की राजनीतिक विरासत उनके नाती पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह संभाल रहे हैं। बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह 2019 में हिसार से भाजपा की टिकट पर लोकसभा चुनाव जीते। बृजेंद्र ने मार्च महीने में ही भाजपा छोड़ दी। इसके बाद वे कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके बाद बीरेंद्र सिंह ने बेटे के लिए हिसार और सोनीपत सीट से दावा ठोका। उन्होंने हिसार को प्राथमिकता तक बताया। हालांकि कांग्रेस ने उन्हें झटका देते हुए कहीं से टिकट नहीं दी।

टिकट कटने के बाद परिवार के वारिस क्या कर रहे

कुलदीप बिश्नोई ने प्रचार से दूरी बनाई
भजनलाल परिवार के कुलदीप बिश्नोई हिसार से टिकट कटने पर वह नाराज हो गए। इसके बाद उन्होंने भाजपा के प्रचार से दूरी बना रखी है। हालांकि पहले पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्‌टर उन्हें मनाने गए। हालांकि बिश्नोई नहीं माने। इसके बाद सीएम नायब सैनी उनके दिल्ली स्थित घर पहुंचे। जिसके बाद कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि वे नाराज नहीं हैं और प्रचार करेंगे। हालांकि अभी वे प्रचार करने नहीं आए हैं।

कुलदीप बिश्नोई को मनाने के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी उनके दिल्ली स्थित निवास स्थान पर पहुंचे थे। यहां सैनी ने बिश्नोई के साथ ब्रेक फास्ट किया था।
कुलदीप बिश्नोई को मनाने के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी उनके दिल्ली स्थित निवास स्थान पर पहुंचे थे। यहां सैनी ने बिश्नोई के साथ ब्रेक फास्ट किया था।

बीरेंद्र सिंह ने मीटिंग बुलाई
सर छोटूराम परिवार के बीरेंद्र सिंह ने बेटे की टिकट कटने के बाद समर्थकों की मीटिंग बुला ली है। यह मीटिंग 28 अप्रैल को होगी। बेटे को टिकट न देने पर बीरेंद्र सिंह ने कहा कि उनके बेटे की चुनाव लड़ने की इच्छा थी, पता नहीं कांग्रेस ने क्या सोचा?। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई बुलाएगा, वे तभी किसी का प्रचार करने जाएंगे।

पिछले दिनों पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के सांसद बेटे भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
पिछले दिनों पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के सांसद बेटे भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

किरण चौधरी आज लेंगी फैसला
बंसीलाल परिवार से किरण चौधरी ने बेटी श्रुति चौधरी के टिकट कटने के बाद शनिवार यानी आज 27 अप्रैल को समर्थकों की मीटिंग बुलाई है। यह मीटिंग उनके भिवानी आवास पर होगी। इसमें वह कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।

अंत में.. दिग्गज परिवारों को किनारे करने के पीछे सियासत क्या?
बड़ा सवाल ये है कि आखिर इतने दिग्गज परिवारों को भाजपा और कांग्रेस ने साइडलाइन क्यों किया?। पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स की मानें तो अक्टूबर-नवंबर में हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में दोनों पार्टियां किसी परिवार की पीछे चलने या चेहरे की सियासत में नहीं उलझना चाहती। उनकी कोशिश है कि संगठन के जरिए ही सियासत की जाए ताकि पार्टी को किसी तरह का प्रेशर न झेलना पड़े। इसके अलावा अपने किसी भी फैसले के लिए बड़े राजनीतिक परिवारों के आगे झुकना न पड़े। वे इन परिवारों को स्पष्ट संदेश देना चाहती हैं कि राजनीति में परिवार नहीं बल्कि पार्टी बड़ी होती है। इसलिए वे इनके आगे घुटने टेकने जैसी स्थिति में नहीं जा रहे हैं।

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