Skip to main content

Shradh: जीते जी करें खुद का पिंडदान, बिहार में यहां होता है आत्म श्राद्ध, पंडित से जानें सबकुछ!



गया: बिहार के गया स्थित मां मंगला-गौरी मंदिर के परिसर स्थित भगवान जनार्दन मंदिर वह स्थान है, जहां कोई भी जीवित व्यक्ति स्वयं पिंड दान और श्राद्ध कर सकता है. जिस व्यक्ति के पास मृत्यु संस्कार करने वाला कोई नहीं है, वह यहां जीवित रहकर अनुष्ठान कर सकते हैं. भगवान जनार्दन मंदिर गया के भस्म कूट पर्वत के ऊपर मां मंगला गौरी मंदिर के उत्तर में स्थित है. कहा जाता है यहां भगवान विष्णु जनार्दन स्वामी के रूप में पिंड का ग्रहण करते हैं. माना जाता है कि आत्म पिंडदान करने वाले को परलोक में जाने के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है.गया जी में वर्तमान में 45 पिंड वेदी है, जबकि 10 से अधिक तर्पण स्थल है. जहां पर पितरों का पिंडदान किया जाता है. लेकिन, पूरे विश्व में जनार्दन मंदिर वेदी एक मात्र ऐसा स्थल है, जहां आत्म श्राद्ध यानि जीते जी खुद का पिंडदान किया जा सकता है. इस मंदिर में वैसे लोग अपना पिंडदान करने पहुंचते हैं, जिनको संतान नहीं हैं. जिनका घर से मन विमुख हो गया हो या उन्हें लगता हो कि उनके मरने के बाद कोई पिंडदान नहीं करेगा. आत्म श्राद्ध के लिए तीन दिवसीय श्राद्ध किया जाता है.

कितने तरह के होते हैं श्राद्ध ?
गया मंत्रालय वैदिक पाठशाला के पंडित राजा आचार्य ने बताया कि गया क्षेत्र अत्यंत प्राचीन जगह है. यहां मरणोपरांत श्राद्ध किया जाता है और जीवित अवस्था में भी पिंड प्रदान करके स्वयं को मरने के बाद मुक्त कर सकते हैं. यहां श्राद्ध के अनेक प्रक्रिया है और अलग-अलग रूप में इसे किया जाता है. गया श्राद्ध, त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण नाग बलि श्राद्ध.

क्यों है संस्कार विहीन?इसी में एक और विशेष श्राद्ध है वो है आत्म श्राद्ध, जिसमें जीवित व्यक्ति खुद का श्राद्ध कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि आत्म श्राद्ध वही कर सकते हैं, जिनके पुत्र-पुत्री जीवित हैं, लेकिन संस्कार विहीन हैं. इसके अलावा नास्तिक हैं और विदेशों में जाकर बस गए हैं. या फिर किसी की कोई संतान नहीं है तो वो नआत्म श्राद्ध कर सकते हैं.

दामाद कब कर सकता है श्राद्ध ?अगर किसी व्यक्ति के पुत्र नहीं है. सिर्फ पुत्रियां हैं तो ऐसी स्थिति में दामाद को पिंडदान करने को अवसर मिलता है. लेकिन दामाद के माता-पिता जीवित नहीं हो तब उन्हें यह अधिकार मिलता है. अगर दामाद के माता-पिता जीवित हैं तो वह अपने सास-ससुर का श्राद्ध नहीं कर सकेंगे.

इस मंदिर में करें तीन दिनों का आत्म श्राद्धपंडित राजा आचार्य ने बताया कि वैसे तो गया जी में महिलाएं भी पिंडदान करती हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार यह अधिकार पुरूष और ब्राह्मणों को दिया गया है. ऐसी अवस्था में जब मरणोपरांत कोई श्राद्ध नहीं करेगा तो वायु पुराण के अनुसार गया जी में आत्म श्राद्ध के लिए मंगला गौरी मंदिर के समीप स्थित भगवान जनार्दन मंदिर में तीन दिवसीय श्राद्ध कर सकते हैं. प्रथम दिन प्रायश्चित संकल्प होगा. द्वितीय दिन भगवान जनार्दन का अभिषेक और महा पूजा करके दही, चावल मिश्रित पिंड भगवान जनार्दन के हाथ में देना है. तृतीय दिन हवन भगवान गदाधर का पंचामृत महा पूजा अभिषेक करके तीन दिवसीय आत्म श्राद्ध प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. जिससे जीवित अवस्था में सुख-शांति से मरणोपरांत मोक्ष की प्राप्ति हो जाए.

Comments

Vyas Media Network

Vyas Media Network

Popular posts from this blog

पूर्व सीएम के PA ने रेवाड़ी CMO को बताया अनुभवहीन:CM सैनी से की शिकायत; बोले- स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल पर ध्यान नहीं दे रहीं

     सीएम नायब सैनी काे ज्ञापन सौंपते हुए पूर्व CM के पीएम अभिमन्यू यादव हरियाणा के रेवाड़ी का सरकारी अस्पताल सुर्खियों में आ गया है। पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के PA अभिमन्यु यादव ने स्वास्थ्य मंत्री पर आरोप लगाया कि वो गृह जिले की सुविधाओं का ध्यान नहीं कर रही है। जिसके चलते यहां व्यवस्था बदहाल हो गई है। रेवाड़ी अस्पताल को लेकर अभिमन्यु यादव ने सीएम नायब सैनी को शिकायती पत्र में कहा कि रेवाड़ी का CMO अनुभवहीन है। सीएमओ को पॉलीक्लिनिक चलाने का ही अनुभव है। अनुभवहीन सीएमओ के कारण यहां की व्यवस्था बिगड़ रही है। जिससे पूरे अस्पताल के प्रबंधन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। अभिमन्यु यादव के पत्र के अहम प्वाइंट 1. रेडियोलॉजिस्ट की कमी: रेवाड़ी अस्पताल में नियुक्त रेडियोलॉजिस्ट को प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया है। जिससे यहां कोई नियमित रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है। अल्ट्रासाउंड की तारीख 3 महीने बाद की दी जाती है। कभी-कभी केस की तारीख के कारण यह तारीख 3 महीने और आगे बढ़ जाती है। 2. त्वचा रोग विभाग पूर्णत निष्क्रिय: डर्मेटोलॉजी विभाग में कोई स्किन स्पेशलिस्ट नहीं कार्यरत है। जिससे मरीजों ...

रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी, BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए, जहां राव का इशारा होता है, वहां समीकरण बदल जाते हैं

    रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी! रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव को लेकर भाजपा इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि राव इंद्रजीत सिंह अगर नाराज़ हुए, तो पूरा खेल बिगड़ सकता है। दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव साहब अपनी रणनीति, संगठन क्षमता और पसंदीदा उम्मीदवार को जिताने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण मानेसर निगम चुनाव रहा, जहां भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन अपनी पसंद के प्रत्याशी सुंदरलाल को जीत नहीं दिला सकी। कारण साफ था—राव साहब ने अपनी समर्थक डॉ. इंद्रजीत यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया और जीत भी दिलवा दी। वहीं, पिछले रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भी राव साहब का दबदबा साफ नजर आया। उन्होंने अपनी समर्थक पूनम यादव को टिकट दिलवाकर मैदान में उतारा। संगठन के कुछ नेताओं ने अंदरखाने विरोध और बगावत की, लेकिन भीतरघात के बावजूद राव समर्थक पूनम यादव अध्यक्ष बनने में सफल रहीं। अब आगामी चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए। क्य...

नगर निकाय चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के फिर दबाव में आएगी भाजपा...?

      राव समर्थक या संगठन का होगा चेहरा   रेवाड़ी नगर परिषद चेयरपर्सन पद के चेहरे को लेकर भाजपा में लगातार मंथन का दौर जारी है। आम लोगों में चर्चा है कि क्या गत विधानसभा चुनाव की तरह नगर निकाय चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह  को तरजीह मिलेगी या फिर पार्टी संगठन अपनी चला पाएगा। टिकट लेने की लाइन में एक तरफ तो वह चेहरे है जो वर्षों से पार्टी में रहकर संगठन को मजबूत कर रहे हैं। वहीं दूसरी और केंद्रीय मंत्री राव इंदरजीत सिंह के खास समर्थक है जो राव के आशीर्वाद से टिकट प्राप्त करना चाहते हैं। । गत विधानसभा चुनाव की बात करें तो केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को पार्टी ने फ्री हैंड दिया था। जिस तरह से पार्टी ने उन पर विश्वास जताया था उसका परिणाम भी सामने आया था। दक्षिणी हरियाणा की 11 विधानसभा सीटों में से  10 विधानसभा सीट जीत कर भाजपा की झोली में डाली थी। भाजपा जानती है कि केंद्रीय मंत्री  राव इंदरजीत सिंह का इस क्षेत्र में काफी प्रभाव है। पार्टी राव की नाराजगी मोल लेकर  अपने दम पर चुनाव में चेहरा उतारने का दम नहीं दिखा पा रही। चर्चा यह...