Skip to main content

भीड़ के लिहाज से पूरी तरह फलॉप साबित हुई बावल में आयोजित प्रगति रैली

 


बावल की जनता के मूड को ‘डायग्नॉज’ करने में डॉक्टर फेल!

‘राजनीतिक गुरू’ के साथ बिना डा. बनवारीलाल को प्रगति रैली में हुआ राजनीतिक ताकत का आंकलन

भीड़ के लिहाज से पूरी तरह फलॉप साबित हुई सीएम मनोहरलाल की बावल में आयोजित प्रगति रैली

रैली को सफल बनाने के लिए अकेले अपने दम पर जनसंपर्क अभियान में लगा रहे थे पूरा जोर

 हरियाणा/ रेवाड़ी

बावल में प्रगति रैली फाइनल कराने के बाद कैबिनेट मंत्री डा. बनवारीलाल ने भीड़ जुटाने को लेकर जिस आत्मविश्वास के साथ अपने गृह क्षेत्र में पसीना बहाया था, उसका परिणाम उन्हें रैली में भीड़ की उपस्थिति से आसानी से देख लिया। भीड़ के लिहाज से रैली को सफल नहीं माना जा सकता।  रैली में भीड़ के अभाव का सबसे बड़ा कारण कैबिनेट मंत्री की ओर से भाजपा के जनाधार वाले नेताओं को जनसंपर्क अभियान में साथ नहीं लेना माना जा सकता है। ‘राजनीतिक गुरू’ राव इंद्रजीत सिंह का भीड़ जुटाने के मामले में साथ नहीं मिलना भी एक बड़ा कारण रहा है। इस रैली से राव समर्थकों ने खुद को लगभग पूरी तरह अलग रखा हुआ था। आलम यह रहा कि रैली में वाहन अधिक और लोग कम नजर आए। इसके लिए कैबिनेट मंत्री की ओर से बड़े स्तर पर प्रयास किए गए थे। इसे रैली में भीड़ की कमी का ही नतीजा माना जा रहा है कि सीएम ने जिले के लिए किसी बड़ी घोषणा का पिटारा खोलना जरूरी नहीं समझा।  

लंबे समय बाद बावल में डा. बनवारीलाल ने सीएम की रैली कराने का निर्णय लिया था। रैली में भीड़ जुटाने के लिए डा. बनवारी लाल पिछले कई दिनों से जनसंपर्क अभियान चलाए हुए थे। रैली की सफलता के लिए किए जा रहे प्रयासों में डा. बनवारीलाल ने भाजपा के जिला अध्यक्ष हुकमचंद यादव और वरिष्ठï नेता वीर कुमार यादव पर ही भरोसा जताया था। उन्होंने जिले के दूसरे भाजपा नेताओं को रैली के लिए किए जाने वाले जनसंपर्क अभियान में शामिल नहीं किया था। वीरकुमार और हुकमचंद दोनों का ही बावल हलके में कोई प्रभाव नहीं है। इस क्षेत्र के अधिकांश लोग भाजपा के इन दोनों नेताओं को अच्छी तरह जानते तक नहीं हैं। रैली को सफल बनाने के लिए डा. बनवारी लाल ने अपने ‘राजनीतिक गुरू’ केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत ङ्क्षसह का भी सहारा नहीं लिया। जिले के दो अन्य हलकों से रैली में भीड़ जुटाने के लिए उन्होंने कोई खास प्रयास नहीं किए। यह उनके अति आत्मविश्वास का हिस्सा माना जा सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि डा. बनवारीलाल अकेले अपने दम पर रैली में बावल हलके से भारी भीड़ जुटाकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को इस बात का संदेश देना चाहते थे कि हलके में कराए गए विकासकार्यों की बदौलत उनकी अपनी मजबूत राजनीतिक पैठ बन चुकी है।

रेवाड़ी हलके में भाजपा का विधायक नहीं है और कोसली हलके के विधायक लक्ष्मण सिंह यादव को रैली में भीड़ जुटाने के लिए तैयार करने में पूरी तरह गुरेज किया गया। राव इंद्रजीत सिंह समर्थकों ने भी इस रैली को लेकर खुद को तटस्थ बनाए रखा। ऐसे में रैली की सफलता का सारा दारोमदार डा. बनवारी लाल के कंधों पर था। वह रैली की सफलता को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहे थे। रैली स्थल पर सीएम का आगमन होने से कुछ समय पहले तक बड़ी संख्या में कुर्सियां खाली पड़ी हुई थीं। इससे आयोजकों के पसीने छूटने लगे थे।  रैली के दौरान भीड़ की कमी ने काफी हद तक सीएम को निराश करने का काम किया। यही कारण रहा कि मंच से सीएम जिले के लिए किसी बड़ी घोषणा पर मोहर लगाने की बजाय डा. बनवारीलाल की ओर से रखे गए मांग पत्र की मांगों को फिजीबिलिटी के आधार पर पूरा करने का आश्वासन दे गए।



Comments

Vyas Media Network

Vyas Media Network

Popular posts from this blog

पूर्व सीएम के PA ने रेवाड़ी CMO को बताया अनुभवहीन:CM सैनी से की शिकायत; बोले- स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल पर ध्यान नहीं दे रहीं

     सीएम नायब सैनी काे ज्ञापन सौंपते हुए पूर्व CM के पीएम अभिमन्यू यादव हरियाणा के रेवाड़ी का सरकारी अस्पताल सुर्खियों में आ गया है। पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के PA अभिमन्यु यादव ने स्वास्थ्य मंत्री पर आरोप लगाया कि वो गृह जिले की सुविधाओं का ध्यान नहीं कर रही है। जिसके चलते यहां व्यवस्था बदहाल हो गई है। रेवाड़ी अस्पताल को लेकर अभिमन्यु यादव ने सीएम नायब सैनी को शिकायती पत्र में कहा कि रेवाड़ी का CMO अनुभवहीन है। सीएमओ को पॉलीक्लिनिक चलाने का ही अनुभव है। अनुभवहीन सीएमओ के कारण यहां की व्यवस्था बिगड़ रही है। जिससे पूरे अस्पताल के प्रबंधन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। अभिमन्यु यादव के पत्र के अहम प्वाइंट 1. रेडियोलॉजिस्ट की कमी: रेवाड़ी अस्पताल में नियुक्त रेडियोलॉजिस्ट को प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया है। जिससे यहां कोई नियमित रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है। अल्ट्रासाउंड की तारीख 3 महीने बाद की दी जाती है। कभी-कभी केस की तारीख के कारण यह तारीख 3 महीने और आगे बढ़ जाती है। 2. त्वचा रोग विभाग पूर्णत निष्क्रिय: डर्मेटोलॉजी विभाग में कोई स्किन स्पेशलिस्ट नहीं कार्यरत है। जिससे मरीजों ...

रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है...? भरोसा किस पर किया जाए...? रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं 12 वाले सर्वेसर्वा बन गये, 19 लुप्त हो गये आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया

  रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है।* *जनता के बीच वे सब जवाब देह हैं।* *भरोसा किस पर किया जाए?*  *रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं सवाल यह है भी है कि  लोकतंत्र क्या केवल भाषणों में सुनने और कागजों में ही पढ़ने तक ही सीमित है? क्या उसका कोई व्यवहारिक पहलू नहीं है? आज भी आप के लिए यह थोड़े ठण्डे मन से सोचने की दरकार है। विकास की दलील भी बिल्कुल बेतुकी तार्किक है। कम बजट में भी आप ईमानदारी से, बिना किसी भ्रष्टाचार के, जनता की असली समस्याओं को केन्द्रित कर, जनता की कमेटियां बना कर, जनता की निगरानी में कराते तो हरियाणा की नगर पालिका के इतिहास में एक बड़ी लकीर खींच सकते थे। आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया। *पूरे रेवाड़ी शहर की सरकार, इसका बजट, विकास कार्यों के निर्णय लेने का अधिकार सब कुछ तो आपकी मुट्ठी में आ गया था। ना जाने क्यूं आपने अपनी मुट्ठी इतनी सहज ढंग से उन्हीं की झोली में खोल दी जिनके खिलाफ आप चुन कर आए थे।* नगर परिषद का चेयर...

रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी, BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए, जहां राव का इशारा होता है, वहां समीकरण बदल जाते हैं

    रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी! रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव को लेकर भाजपा इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि राव इंद्रजीत सिंह अगर नाराज़ हुए, तो पूरा खेल बिगड़ सकता है। दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव साहब अपनी रणनीति, संगठन क्षमता और पसंदीदा उम्मीदवार को जिताने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण मानेसर निगम चुनाव रहा, जहां भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन अपनी पसंद के प्रत्याशी सुंदरलाल को जीत नहीं दिला सकी। कारण साफ था—राव साहब ने अपनी समर्थक डॉ. इंद्रजीत यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया और जीत भी दिलवा दी। वहीं, पिछले रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भी राव साहब का दबदबा साफ नजर आया। उन्होंने अपनी समर्थक पूनम यादव को टिकट दिलवाकर मैदान में उतारा। संगठन के कुछ नेताओं ने अंदरखाने विरोध और बगावत की, लेकिन भीतरघात के बावजूद राव समर्थक पूनम यादव अध्यक्ष बनने में सफल रहीं। अब आगामी चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए। क्य...