Skip to main content

सीट नहीं बढ़ाने पर गेट पर जड़ा ताला



 हरियाणा/ रेवाड़ी 

इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय(आईजीयू) मीरपुर में दो शैक्षणिक सत्र पहले कम की गई सीटों को बढ़ाने की मांग पूरा नहीं होने पर छात्र संगठन इनसो के छात्र नेता विवि के गेट पर ताला जड़ धरने पर बैठ गए। विवि प्रशासन से मिले आश्वासन के बाद विद्यार्थियों ने ताला खोला। दो साल पहले विवि प्रशासन ने अधिकृत विषयों में लैब नहीं होने का हवाला देकर सीटों की संख्या 60 की बजाय 20-20 कर दी गई थी। उस समय भी सीटों को लेेकर छात्रों सहित राजनीतिक संगठनों ने विरोध जताया था। उस समय वीसी ने व्यवस्था में सुधार के बाद सीटों की संख्या बढ़ाने का आश्वासन दिया था तब से विद्यार्थी से लगातार सीट बढ़ाने की मांग कर रहे थे। लेकिन विवि प्रशासन उनकी मांग को अनसुनी कर रहा था। गुस्साए विद्यार्थियों ने सीट बढ़ाने की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। पहले तो विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के मेन गेट पर ताला लगा दिया। एक घंटे विश्वविद्यालय के मेन गेट पर ताला रहा। जब विद्यार्थियों से विवि प्रशासन की ओर से कोई मिलने नहीं आया तो विद्यार्थियों ने वीसी ऑफिस पर ताला भी ताला जड़ दिया। सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन विद्यार्थी अपनी मांग पर अड़े रहे। इस दौरान विद्यार्थियों व पुलिस कर्मचारियों के बीच काफी देर तक धक्का मुक्की चलती रहीं। आखिरकार विवि प्रशासन को विद्यार्थियों की मांग के आगे झुकना पड़ा। वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार ने विद्यार्थियों से बात की और एक सप्ताह के अंदर सीटें बढ़ाने का आश्वासन दिया।


बतौर यूनिवर्सिटी अध्यक्ष रवि मसीत कुलसचिव डॉ. प्रमोद भारद्वाज ने कहा कि वीरवार को बैठक कर विवि प्रशासन के बीच सीट बढ़ाने को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा। मसीत ने बताया कि यूनिवर्सिटी में लैब और अध्यापकों की कमी के कारण सीटें घटाने का फैसला लिया था। लेकिन अभी तक सीटें नहीं बढ़ाई गई। कई सीट बढ़ाने की मांग को लेकर लिखित में भी शिकायत दी जा चुकी है। लेकिन विवि प्रशासन उनकी मांग को अनसुनी कर रहा हैं। दस दिन पहले इनसो ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को सीट बढ़ाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने बताया कि जब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया तो विद्यार्थियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।


धरने पर बैठे इनसो के जिला अध्यक्ष सतेंद्र झाबुआ ने कहा कि जब से नए वाइस चांसलर यूनिवर्सिटी में आए हैं, तब से कोई विकास कार्य नहीं हुआ हैं। अनेक विषयों की सीट बढ़ाने की बजाय घटा दी गई हैं। उन्होंने कहा कि आईजीयू में गांव से मध्यम वर्ग गरीब परिवार के बच्चे भी पढ़ने आते हैं। अगर यूनिवर्सिटी में सीटें नहीं होगी तो विद्यार्थियों को दूसरे जिलों में शिक्षा ग्रहण करने के लिए जाना पड़ेगा। इसलिए विवि प्रशासन को विद्यार्थियों की मांग के अनुसार सीटे बढ़ानी चाहिए। इस अवसर पर युगल यादव, रोबिन, मंजीत, सौरव यादव, मनजीत, संजीव, अशोक, सौरव यादव, आशीष स्वामी, आशीष, जलदीप, राहुल, तरुण, सोना, रिंकल, राहुल, अमन हुड्डा, चिराग, मिथलेश, सौरभ, मनीष, मनोज, अमरजीत, रोहित, मोहित, हितेश, खुशवंत, विजय राठी व भूपेश आदि मौजूद थे।




Comments

Vyas Media Network

Vyas Media Network

Popular posts from this blog

पूर्व सीएम के PA ने रेवाड़ी CMO को बताया अनुभवहीन:CM सैनी से की शिकायत; बोले- स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल पर ध्यान नहीं दे रहीं

     सीएम नायब सैनी काे ज्ञापन सौंपते हुए पूर्व CM के पीएम अभिमन्यू यादव हरियाणा के रेवाड़ी का सरकारी अस्पताल सुर्खियों में आ गया है। पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के PA अभिमन्यु यादव ने स्वास्थ्य मंत्री पर आरोप लगाया कि वो गृह जिले की सुविधाओं का ध्यान नहीं कर रही है। जिसके चलते यहां व्यवस्था बदहाल हो गई है। रेवाड़ी अस्पताल को लेकर अभिमन्यु यादव ने सीएम नायब सैनी को शिकायती पत्र में कहा कि रेवाड़ी का CMO अनुभवहीन है। सीएमओ को पॉलीक्लिनिक चलाने का ही अनुभव है। अनुभवहीन सीएमओ के कारण यहां की व्यवस्था बिगड़ रही है। जिससे पूरे अस्पताल के प्रबंधन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। अभिमन्यु यादव के पत्र के अहम प्वाइंट 1. रेडियोलॉजिस्ट की कमी: रेवाड़ी अस्पताल में नियुक्त रेडियोलॉजिस्ट को प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया है। जिससे यहां कोई नियमित रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है। अल्ट्रासाउंड की तारीख 3 महीने बाद की दी जाती है। कभी-कभी केस की तारीख के कारण यह तारीख 3 महीने और आगे बढ़ जाती है। 2. त्वचा रोग विभाग पूर्णत निष्क्रिय: डर्मेटोलॉजी विभाग में कोई स्किन स्पेशलिस्ट नहीं कार्यरत है। जिससे मरीजों ...

रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है...? भरोसा किस पर किया जाए...? रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं 12 वाले सर्वेसर्वा बन गये, 19 लुप्त हो गये आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया

  रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है।* *जनता के बीच वे सब जवाब देह हैं।* *भरोसा किस पर किया जाए?*  *रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं सवाल यह है भी है कि  लोकतंत्र क्या केवल भाषणों में सुनने और कागजों में ही पढ़ने तक ही सीमित है? क्या उसका कोई व्यवहारिक पहलू नहीं है? आज भी आप के लिए यह थोड़े ठण्डे मन से सोचने की दरकार है। विकास की दलील भी बिल्कुल बेतुकी तार्किक है। कम बजट में भी आप ईमानदारी से, बिना किसी भ्रष्टाचार के, जनता की असली समस्याओं को केन्द्रित कर, जनता की कमेटियां बना कर, जनता की निगरानी में कराते तो हरियाणा की नगर पालिका के इतिहास में एक बड़ी लकीर खींच सकते थे। आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया। *पूरे रेवाड़ी शहर की सरकार, इसका बजट, विकास कार्यों के निर्णय लेने का अधिकार सब कुछ तो आपकी मुट्ठी में आ गया था। ना जाने क्यूं आपने अपनी मुट्ठी इतनी सहज ढंग से उन्हीं की झोली में खोल दी जिनके खिलाफ आप चुन कर आए थे।* नगर परिषद का चेयर...

रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी, BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए, जहां राव का इशारा होता है, वहां समीकरण बदल जाते हैं

    रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी! रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव को लेकर भाजपा इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि राव इंद्रजीत सिंह अगर नाराज़ हुए, तो पूरा खेल बिगड़ सकता है। दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव साहब अपनी रणनीति, संगठन क्षमता और पसंदीदा उम्मीदवार को जिताने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण मानेसर निगम चुनाव रहा, जहां भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन अपनी पसंद के प्रत्याशी सुंदरलाल को जीत नहीं दिला सकी। कारण साफ था—राव साहब ने अपनी समर्थक डॉ. इंद्रजीत यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया और जीत भी दिलवा दी। वहीं, पिछले रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भी राव साहब का दबदबा साफ नजर आया। उन्होंने अपनी समर्थक पूनम यादव को टिकट दिलवाकर मैदान में उतारा। संगठन के कुछ नेताओं ने अंदरखाने विरोध और बगावत की, लेकिन भीतरघात के बावजूद राव समर्थक पूनम यादव अध्यक्ष बनने में सफल रहीं। अब आगामी चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए। क्य...