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हरियाणा: अफसरशाही पर भड़के अनिल विज, कहा-सीएम को खुश करने के लिए मेरे मंत्रालय के कामों में बाधा न डालें

 

      सीएम मनोहर लाल एवं गृहमंत्री अनिल विज (फाइल फोटो)

कुछ समय पहले प्रदेश के डीजीपी मनोज यादव को सेवा विस्तार देने को लेकर विज और मनोहर लाल के बीच विवाद छिड़ गया था। डीजीपी इस साल की शुरुआत में इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) में लौटने वाले थे लेकिन सीएम के आदेश वे पद पर बने रहे।


हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने आरोप लगाया है कि कुछ अधिकारी उनके और सीएम मनोहर लाल के बीच गलतफहमी पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।  विज ने कहा कि कुछ अफसर सीएम को खुश करने के लिए उनके विभागीय कार्यों में बाधा डाल रहे हैं। वे ऐसा गंदा खेल खेलने से बाज आएं क्योंकि वह (विज) और सीएम मनोहर लाल अच्छे दोस्त हैं। हमें एक दूसरे के खिलाफ मानने वाले अधिकारी नुकसान में रहेंगे।



विज का बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ समय पहले प्रदेश के डीजीपी मनोज यादव को सेवा विस्तार देने को लेकर विज और मनोहर लाल के बीच विवाद छिड़ गया था। डीजीपी इस साल की शुरुआत में इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) में लौटने वाले थे लेकिन सीएम के आदेश वे पद पर बने रहे। इस महीने की शुरुआत में डीजीपी यादव ने आईबी में लौटने की इच्छा व्यक्त की थी

अनिल विज और डीजीपी मनोज यादव में काफी तल्खी है। वे विज के भेजे गए पत्रों पर जवाब नहीं देते थे। यह तल्खी उस समय और बढ़ गई थी जब विज ने अंबाला से आते समय अपनी गाड़ी अचानक पुलिस मुख्यालय की तरफ मोड़ दी थी और वहां निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण में एक अधिकारी पर गाज भी गिरी थी, क्योंकि डायल 100 का प्रोजेक्ट उनकी ढिलाई के चलते लेट हो रहा था।

गुरुग्राम निगम कार्यालय का औचक निरीक्षण कर कई पर की थी कार्रवाई

कुछ दिन पहले गृह मंत्री अनिल विज ने गुरुग्राम में नगर निगम कार्यालय का औचक निरीक्षण किया था। सुबह 10:30 बजे वह कार्यालय पहुंचे तो कई अधिकारी गायब मिले। विज ने गैरहाजिर मिलने वाले दो सहायक अभियंताओं राकेश शर्मा और कुलदीप यादव को निलंबित करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही विज ने कार्यकारी अभियंता धर्मबीर मलिक को कार्यभार मुक्त करने के निर्देश दिए। अकाउंट ब्रांच के सेक्शन ऑफिसर भूपेंद्र सिंह का दो घंटे का वेतन काटने की बात कही। विज ने 12:30 बजे तक अकाउंट एवं इंजीनियरिंग विंग का रिकॉर्ड चेक किया। उन्होंने कर्मचारियों से भी तमाम जानकारी ली। उन्होंने कहा कि निगम पार्षदों के फर्जी संतुष्टि पत्र पर भुगतान के मामले में एफआईआर दर्ज करवा कर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।


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