Skip to main content

Mulank 4: इनके लिए पार्टनर को समय देना होता है मुश्किल, लेकिन जीवनभर निभाते हैं सुरक्षित और मजबूत रिश्ता

 



जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 4, 13, 22, 31 को होता है, उनका मूलांक 4 होता है। अंक ज्योतिष के अनुसार लोगों के जीवन पर उनके जन्मांक का काफी प्रभाव होता है। आज हम इसके प्रेम जीवन के बारे में बात करेंगे। दरअसल मूलांक 4 वाले लोग प्रेम के मामले में बेहद सच्चे, जिम्मेदार और भरोसेमंद साथी माने जाते हैं। इनका स्वभाव स्थिर, अनुशासित और प्रैक्टिकल होता है। रिश्तों में ये हवा में बात करने या दिखावे वाली रोमांटिक एक्टिविटी से ज्यादा सुरक्षा, स्थिरता और गहराई को महत्व देते हैं। 



मूलांक 4 के लोग अपने पार्टनर को भावनात्मक, मानसिक और आर्थिक स्थिरता देने में माहिर होते हैं। एक बार किसी से प्रेम हो जाए, तो ये पूरी तरह समर्पित हो जाते हैं। अक्सर ये लोग ऐसा साथी खोजते हैं जो उनके जीवन में संरचना, रूटीन और संतुलन को समझ सके। इनकी सबसे बड़ी खूबी है, लॉयल्टी। ये छल–कपट से दूर रहते हैं और बदले में अपने पार्टनर से भी ईमानदारी और भरोसे की उम्मीद रखते हैं।

Mulank 4 Numerology Love Life Prediction Compatibility and Best Partner Matches
मूलांक 4 वालों की खासियत - फोटो : adobe stock

मूलांक 4 वालों की खासियत
मूलांक 4 वालों की एक और खास बात है कि ये समस्याओं से बचते नहीं, बल्कि उनका समाधान ढूंढते हैं। अगर रिश्ते में कोई मुद्दा आए, तो ये शांति से उसे समझकर सही दिशा में ले जाते हैं। इनकी प्रैक्टिकल सोच पार्टनर को जीवन में स्थिरता का एहसास कराती है।

Mulank 4 Numerology Love Life Prediction Compatibility and Best Partner Matches
मूलांक 4 वालों की कमजोरियां  - फोटो : adobe stock

मूलांक 4 वालों की कमजोरियां 
जहां खूबियां होती हैं, वहाँ कुछ कमजोरियां भी होती हैं। रिश्तों में मूलांक 4 की सबसे बड़ी चुनौती है, भावनाओं को अभिव्यक्त करना। ये लोग दिल से प्यार करते हैं, लेकिन इसे शब्दों या रोमांटिक तरीकों से व्यक्त करने में थोड़ा हिचकिचाते हैं। कई बार पार्टनर को लगता है कि ये भावुक नहीं हैं, जबकि अंदर से ये बहुत समर्पित होते हैं।

Mulank 4 Numerology Love Life Prediction Compatibility and Best Partner Matches
Numerology - फोटो : adobe stock

इसके अलावा इनका अत्यधिक अनुशासित नेचर कभी-कभी रिश्ते को कठोरता की तरफ ले जा सकता है। अचानक बदलाव या बहुत अधिक भावुकता इन्हें असहज कर सकती है।


कभी-कभी ये अपने काम, जिम्मेदारियों या नियमों में इतने उलझ जाते हैं कि पार्टनर को समय देना भूल जाते हैं। अपने विचारों में अड़े रहना, जिद या कंट्रोल करने की प्रवृत्ति भी कई बार रिश्तों में तनाव पैदा कर सकती है


Mulank 4 Numerology Love Life Prediction Compatibility and Best Partner Matches
मूलांक 4 लव लाइफ के लक्षण हिंदी में - फोटो : Adobe

जब मूलांक 4 वाला व्यक्ति सही साथी चुन लेता है, तो वह रिश्ता बेहद गहरा, स्थिर और भरोसे से भरा होता है। इनके प्रेम का आधार हमेशा सच्चाई, प्रतिबद्धता और लंबी उम्र वाला साथ होता है।

दीपक शर्मा अंक ज्योतिषी

+919810735353


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए Vyas media group उत्तरदायी नहीं है।

Comments

Vyas Media Network

Vyas Media Network

Popular posts from this blog

पूर्व सीएम के PA ने रेवाड़ी CMO को बताया अनुभवहीन:CM सैनी से की शिकायत; बोले- स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल पर ध्यान नहीं दे रहीं

     सीएम नायब सैनी काे ज्ञापन सौंपते हुए पूर्व CM के पीएम अभिमन्यू यादव हरियाणा के रेवाड़ी का सरकारी अस्पताल सुर्खियों में आ गया है। पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के PA अभिमन्यु यादव ने स्वास्थ्य मंत्री पर आरोप लगाया कि वो गृह जिले की सुविधाओं का ध्यान नहीं कर रही है। जिसके चलते यहां व्यवस्था बदहाल हो गई है। रेवाड़ी अस्पताल को लेकर अभिमन्यु यादव ने सीएम नायब सैनी को शिकायती पत्र में कहा कि रेवाड़ी का CMO अनुभवहीन है। सीएमओ को पॉलीक्लिनिक चलाने का ही अनुभव है। अनुभवहीन सीएमओ के कारण यहां की व्यवस्था बिगड़ रही है। जिससे पूरे अस्पताल के प्रबंधन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। अभिमन्यु यादव के पत्र के अहम प्वाइंट 1. रेडियोलॉजिस्ट की कमी: रेवाड़ी अस्पताल में नियुक्त रेडियोलॉजिस्ट को प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया है। जिससे यहां कोई नियमित रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है। अल्ट्रासाउंड की तारीख 3 महीने बाद की दी जाती है। कभी-कभी केस की तारीख के कारण यह तारीख 3 महीने और आगे बढ़ जाती है। 2. त्वचा रोग विभाग पूर्णत निष्क्रिय: डर्मेटोलॉजी विभाग में कोई स्किन स्पेशलिस्ट नहीं कार्यरत है। जिससे मरीजों ...

रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है...? भरोसा किस पर किया जाए...? रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं 12 वाले सर्वेसर्वा बन गये, 19 लुप्त हो गये आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया

  रेवाड़ी शहर से जीते हुए निर्दलीय पार्षदों ने निसंदेह ही लोकतंत्र को शर्मशार कर दिया है।* *जनता के बीच वे सब जवाब देह हैं।* *भरोसा किस पर किया जाए?*  *रेवाड़ी के नागरिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं सवाल यह है भी है कि  लोकतंत्र क्या केवल भाषणों में सुनने और कागजों में ही पढ़ने तक ही सीमित है? क्या उसका कोई व्यवहारिक पहलू नहीं है? आज भी आप के लिए यह थोड़े ठण्डे मन से सोचने की दरकार है। विकास की दलील भी बिल्कुल बेतुकी तार्किक है। कम बजट में भी आप ईमानदारी से, बिना किसी भ्रष्टाचार के, जनता की असली समस्याओं को केन्द्रित कर, जनता की कमेटियां बना कर, जनता की निगरानी में कराते तो हरियाणा की नगर पालिका के इतिहास में एक बड़ी लकीर खींच सकते थे। आपका निजी फैसला न तो जनतंत्र की रक्षा कर पाया, न ही आपके - एक पार्षद होने के सम्मान की रक्षा कर पाया। *पूरे रेवाड़ी शहर की सरकार, इसका बजट, विकास कार्यों के निर्णय लेने का अधिकार सब कुछ तो आपकी मुट्ठी में आ गया था। ना जाने क्यूं आपने अपनी मुट्ठी इतनी सहज ढंग से उन्हीं की झोली में खोल दी जिनके खिलाफ आप चुन कर आए थे।* नगर परिषद का चेयर...

रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी, BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए, जहां राव का इशारा होता है, वहां समीकरण बदल जाते हैं

    रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव: राव साहब की नाराज़गी भाजपा को पड़ सकती है भारी! रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव को लेकर भाजपा इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि राव इंद्रजीत सिंह अगर नाराज़ हुए, तो पूरा खेल बिगड़ सकता है। दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव साहब अपनी रणनीति, संगठन क्षमता और पसंदीदा उम्मीदवार को जिताने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण मानेसर निगम चुनाव रहा, जहां भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन अपनी पसंद के प्रत्याशी सुंदरलाल को जीत नहीं दिला सकी। कारण साफ था—राव साहब ने अपनी समर्थक डॉ. इंद्रजीत यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया और जीत भी दिलवा दी। वहीं, पिछले रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भी राव साहब का दबदबा साफ नजर आया। उन्होंने अपनी समर्थक पूनम यादव को टिकट दिलवाकर मैदान में उतारा। संगठन के कुछ नेताओं ने अंदरखाने विरोध और बगावत की, लेकिन भीतरघात के बावजूद राव समर्थक पूनम यादव अध्यक्ष बनने में सफल रहीं। अब आगामी चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राव साहब को साथ रखे या राजनीतिक नुकसान उठाए। क्य...